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2017 में आधा दर्जन गावं के लोगों ने किया था विधानसभा चुनाव का बहिष्कार
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डोंगराखुर्द/ललितपुर। महरौनी विधानसभा अंतर्गत पाली तहसील के करीब आधा दर्जन गांव के लोगों वर्ष 2017 में क्षेत्रीय समस्याओं की अनदेखी के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया था और गांव के बाहर काले झंडे गाढ़ दिए थे। हालांकि चुनाव के बाद यहां समस्याओं से काफी हद तक निजात भी मिल गई।
तहसील पाली अंतर्गत ग्राम पारौल, बरखेरा गांव और प्राचीन स्थल पांडववन से सटे होने के बाद भी बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं से कोसों दूर रहे हैं। बारिश के दिनों में तो बीमारियों के चलते कई ग्रामीण काल के मुख चले गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के चलते यहां के ग्रामीणों वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गांव के बाहर काले झंडे लगाकर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। इसका पता चलते ही जनप्रतिनिधियों व प्रशासन ने मतदाताओं को खूब मनाया, लेकिन वह नहीं माने थे और ग्रामीणों ने शासन से छह सूत्री मांगों के तहत ग्राम बरखेरा में जामनी नदी पर पुल बनाए जाने, इंटरमीडिएट कॉलेज, साधन सहकारी समिति, स्वास्थ्य, सिंचाई, विद्युत व्यवस्था, तपो भूमि पांडव वन पर्यटन स्थल में विकसित करने की मांग रखी थी। ऐसे में ग्राम पारौल व बरखेरा गांव में कुछ मांगे तो चुनाव बहिष्कार के बाद पूरी हुई, जिसमें ग्राम बरखेरा में पुल निर्माण शुरू कराया गया और तहसील पाली से कटकर 23 गांव महरौनी मड़ावरा तहसील में जोड़ दिए गए हैं। पांडव वन में सौंदर्यीकरण के लिए पचास लाख रुपए स्वीकृत हुए, लेकिन कुछ मांगे अभी भी अधूरी पड़ी है लेकिन अब ग्रामीण बहुत सी समस्याएं हल होने के बाद मतदान करने को तैयार हैं।
महरौनी तहसील क्षेत्र से कई गावों को नवनिर्मित गठित तहसील पाली में जोड़ दिया गया था, जिससे उक्त गांव के ग्रामीण दो वर्ष से लगातार पुन: महरौनी तहसील में जोड़ने की उठाते आ रहे थे। चूंकि ग्रामीणों को पाली तहसील मुख्यालय पहुंचने के लिए 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। साथ में नवनिर्मित तहसील तक पहुंचने के लिए कोई सीधा सुगम मार्ग भी नहीं है। इन गावों की महरौनी तहसील से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी है। आक्रोशित ग्रामीणों ने उस समय वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रशासन के समक्ष विधानसभा चुनाव बहिष्कार का इरादा मतदान के काफी पहले स्पष्ट कर दिया था। ग्राम बारचौन, सक्तू, बमराना, गदनपुर, पारौल के ग्रामीण अपने मत अधिकार का प्रयोग करने पोलिंग बूथों पर ही नहीं पहुंचे थे। उस समय प्रशासन के आला अधिकारी असंतुष्ट ग्रामीणों को मनाने का प्रयास करते रहे। इन गावों में प्रत्याशी असंतुष्ट ग्रामीणों को मनाने पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने उनकी एक न सुनी और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा था।
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तहसील पाली अंतर्गत ग्राम पारौल, बरखेरा गांव और प्राचीन स्थल पांडववन से सटे होने के बाद भी बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं से कोसों दूर रहे हैं। बारिश के दिनों में तो बीमारियों के चलते कई ग्रामीण काल के मुख चले गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के चलते यहां के ग्रामीणों वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गांव के बाहर काले झंडे लगाकर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। इसका पता चलते ही जनप्रतिनिधियों व प्रशासन ने मतदाताओं को खूब मनाया, लेकिन वह नहीं माने थे और ग्रामीणों ने शासन से छह सूत्री मांगों के तहत ग्राम बरखेरा में जामनी नदी पर पुल बनाए जाने, इंटरमीडिएट कॉलेज, साधन सहकारी समिति, स्वास्थ्य, सिंचाई, विद्युत व्यवस्था, तपो भूमि पांडव वन पर्यटन स्थल में विकसित करने की मांग रखी थी। ऐसे में ग्राम पारौल व बरखेरा गांव में कुछ मांगे तो चुनाव बहिष्कार के बाद पूरी हुई, जिसमें ग्राम बरखेरा में पुल निर्माण शुरू कराया गया और तहसील पाली से कटकर 23 गांव महरौनी मड़ावरा तहसील में जोड़ दिए गए हैं। पांडव वन में सौंदर्यीकरण के लिए पचास लाख रुपए स्वीकृत हुए, लेकिन कुछ मांगे अभी भी अधूरी पड़ी है लेकिन अब ग्रामीण बहुत सी समस्याएं हल होने के बाद मतदान करने को तैयार हैं।
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महरौनी तहसील क्षेत्र से कई गावों को नवनिर्मित गठित तहसील पाली में जोड़ दिया गया था, जिससे उक्त गांव के ग्रामीण दो वर्ष से लगातार पुन: महरौनी तहसील में जोड़ने की उठाते आ रहे थे। चूंकि ग्रामीणों को पाली तहसील मुख्यालय पहुंचने के लिए 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। साथ में नवनिर्मित तहसील तक पहुंचने के लिए कोई सीधा सुगम मार्ग भी नहीं है। इन गावों की महरौनी तहसील से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी है। आक्रोशित ग्रामीणों ने उस समय वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रशासन के समक्ष विधानसभा चुनाव बहिष्कार का इरादा मतदान के काफी पहले स्पष्ट कर दिया था। ग्राम बारचौन, सक्तू, बमराना, गदनपुर, पारौल के ग्रामीण अपने मत अधिकार का प्रयोग करने पोलिंग बूथों पर ही नहीं पहुंचे थे। उस समय प्रशासन के आला अधिकारी असंतुष्ट ग्रामीणों को मनाने का प्रयास करते रहे। इन गावों में प्रत्याशी असंतुष्ट ग्रामीणों को मनाने पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने उनकी एक न सुनी और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा था।
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