{"_id":"5ef62d258ebc3e433b735eab","slug":"ill-hospital-how-will-be-fight-for-corona-lalitpur-news-jhs1700236183","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमार अस्पताल कैसे लड़ेंगे कोराना महामारी से जंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमार अस्पताल कैसे लड़ेंगे कोराना महामारी से जंग
विज्ञापन
अस्पताल
- फोटो : ???????
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। कोरोना काल में भी जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ सकीं । आज भी सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों व कर्मचारियों की कमी है तो वहीं उपकरण भी धूल फांक रहे हैं। यह स्थिति कोरोना काल की है तो जब सब कुछ सामान्य था उस समय की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। बीमार अस्पताल कोरोना जैसी महामारी से कैसे लड़ेंगे जंग यह एक बड़ा सवाल है।
ललितपुर बुंदेलखंड का सबसे पिछड़ा जनपद माना जाता है। यहां पर अब तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल सकी हैं। स्थिति यह है कि जनपद के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी किसी से छिपी नहीं हैं। चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई हैं। यहां पर विशेषज्ञों की भी कमी है, इससे गंभीर स्थिति में मरीजों को रेफर करना पड़ता है। इनमें मेजर अटैक, हेडइंजरी, लकवा, किडनी फैल, प्लेट कम होने पर व गंभीर बुखार तक के मरीजों के रेफर करना एक मात्र विकल्प है। इतना ही नहीं कई मरीजों को केवल जांच के अभाव में ही रेफर करना पड़ता है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों पर रेडियोलॉजिस्ट के पांच पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष सभी पद खाली हैं। वहीं, पैथोलॉजिस्ट के तीन पद के सापेक्ष एक पद पर कार्यरत हैं। साथ ही तीन सर्जनों में दो कार्यरत हैं। ऐनेस्थेटिस्ट तीन पद में सभी पद रिक्त हैं। ईएमओ चार में एक कार्यरत हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में शासन से भले ही उपकरणों की सुविधा दी हो, लेकिन चिकित्सकों व विशेषज्ञों के अभाव में धूल फांक रही है। यहां पर बीते लगभग दो वर्ष बाद भी सीटी स्कैन मशीन चालू नहीं हो सकी है। इसके साथ ही जिले में न्यूरो सर्जन की कमी के चलते एक्सीडेंटल केसों को रेफर किया जाता है। हृदयरोग विशेषज्ञ के अभाव में मरीजों को महानगरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। जहां पर मोटी रकम चुका कर परेशान हो रहे हैं।
22 मार्च से बंद पड़ी ओपीडी सेवा
वैश्विक बीमारी कोरोना वायरस संक्रमण नियंत्रण को लेकर शासन ने ओपीडी सेवा बंद कर दी गई। आपातकालीन सेवाएं ही जारी रखीं गई है। ऐसे में जहां प्रतिदिन लगभग डेढ़ हजार मरीज अस्पताल पहुंचते थे, लेकिन ओपीडी बंद होने से अब मरीजों के आने की संख्या सिमट कर एक सैकड़ा तक पहुंच गई है। अब मरीजों को केवल क्षेत्र में संचालित क्लीनिकों का सहारा बना हुआ है।
विज्ञापन
सपना बनकर रह गया मेडिकल कॉलेज का निर्माण
जिले में तीन वर्ष पूर्व मेडिकल कॉलेज के निर्माण की नींव रखी गई। इसके लिए जमीन को चिह्नित किया गया। निर्माण को कंपनी का चयन हुआ, लेकिन धरातल पर अब तक कुछ नहीं हो सका है। बीते वर्ष मेडिकल कॉलेज के निर्माण होने तक जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज संचालित करने की तैयारी की गई। इसमें जिला अस्पताल में मानकों की जांच की गई, जांच में अस्पताल को 90 प्रतिशत मानकों पर खरा पाया, जिसे अप्रैल माह में उच्चीकृत करने की अवधि तय की गई, लेकिन अब तक न तो निर्माण कार्य शुरु किया गया और न ही जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर संचालित किया गया है। इससे अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदतर बनी हुई है।
एक नजर में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
जिले की आबादी 14 लाख
जिला अस्पताल - 01
जिला महिला अस्पताल - 01
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र - 04
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 02
नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 23
उपकेंद्र - 198
-------
एक नजर में चिकित्सकों की स्थिति
पदनाम स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त
लेवल - 1 46 23 23
लेवल - 2 02 12 00
लेवल - 3 15 07 08
लेवल - 4 14 05 09
कुल 77 47 40
डेंटल सर्जन 02 00 02
चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 18 12 06
कुल 97 59 48
----------
जिला अस्पताल
स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त पद
35 18 17
--------
शासन से किया पत्राचार
जिले में चिकित्सकों व विशेषज्ञों की कमी है। जिन्हें भरने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलते ही तैनात किया जाएगा।
- डा. प्रताप सिंह,
मुख्य चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
ललितपुर बुंदेलखंड का सबसे पिछड़ा जनपद माना जाता है। यहां पर अब तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल सकी हैं। स्थिति यह है कि जनपद के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी किसी से छिपी नहीं हैं। चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई हैं। यहां पर विशेषज्ञों की भी कमी है, इससे गंभीर स्थिति में मरीजों को रेफर करना पड़ता है। इनमें मेजर अटैक, हेडइंजरी, लकवा, किडनी फैल, प्लेट कम होने पर व गंभीर बुखार तक के मरीजों के रेफर करना एक मात्र विकल्प है। इतना ही नहीं कई मरीजों को केवल जांच के अभाव में ही रेफर करना पड़ता है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों पर रेडियोलॉजिस्ट के पांच पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष सभी पद खाली हैं। वहीं, पैथोलॉजिस्ट के तीन पद के सापेक्ष एक पद पर कार्यरत हैं। साथ ही तीन सर्जनों में दो कार्यरत हैं। ऐनेस्थेटिस्ट तीन पद में सभी पद रिक्त हैं। ईएमओ चार में एक कार्यरत हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में शासन से भले ही उपकरणों की सुविधा दी हो, लेकिन चिकित्सकों व विशेषज्ञों के अभाव में धूल फांक रही है। यहां पर बीते लगभग दो वर्ष बाद भी सीटी स्कैन मशीन चालू नहीं हो सकी है। इसके साथ ही जिले में न्यूरो सर्जन की कमी के चलते एक्सीडेंटल केसों को रेफर किया जाता है। हृदयरोग विशेषज्ञ के अभाव में मरीजों को महानगरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। जहां पर मोटी रकम चुका कर परेशान हो रहे हैं।
विज्ञापन
22 मार्च से बंद पड़ी ओपीडी सेवा
वैश्विक बीमारी कोरोना वायरस संक्रमण नियंत्रण को लेकर शासन ने ओपीडी सेवा बंद कर दी गई। आपातकालीन सेवाएं ही जारी रखीं गई है। ऐसे में जहां प्रतिदिन लगभग डेढ़ हजार मरीज अस्पताल पहुंचते थे, लेकिन ओपीडी बंद होने से अब मरीजों के आने की संख्या सिमट कर एक सैकड़ा तक पहुंच गई है। अब मरीजों को केवल क्षेत्र में संचालित क्लीनिकों का सहारा बना हुआ है।
विज्ञापन
सपना बनकर रह गया मेडिकल कॉलेज का निर्माण
जिले में तीन वर्ष पूर्व मेडिकल कॉलेज के निर्माण की नींव रखी गई। इसके लिए जमीन को चिह्नित किया गया। निर्माण को कंपनी का चयन हुआ, लेकिन धरातल पर अब तक कुछ नहीं हो सका है। बीते वर्ष मेडिकल कॉलेज के निर्माण होने तक जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज संचालित करने की तैयारी की गई। इसमें जिला अस्पताल में मानकों की जांच की गई, जांच में अस्पताल को 90 प्रतिशत मानकों पर खरा पाया, जिसे अप्रैल माह में उच्चीकृत करने की अवधि तय की गई, लेकिन अब तक न तो निर्माण कार्य शुरु किया गया और न ही जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर संचालित किया गया है। इससे अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदतर बनी हुई है।
एक नजर में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
जिले की आबादी 14 लाख
जिला अस्पताल - 01
जिला महिला अस्पताल - 01
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र - 04
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 02
नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 23
उपकेंद्र - 198
-------
एक नजर में चिकित्सकों की स्थिति
पदनाम स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त
लेवल - 1 46 23 23
लेवल - 2 02 12 00
लेवल - 3 15 07 08
लेवल - 4 14 05 09
कुल 77 47 40
डेंटल सर्जन 02 00 02
चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 18 12 06
कुल 97 59 48
----------
जिला अस्पताल
स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त पद
35 18 17
--------
शासन से किया पत्राचार
जिले में चिकित्सकों व विशेषज्ञों की कमी है। जिन्हें भरने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलते ही तैनात किया जाएगा।
- डा. प्रताप सिंह,
मुख्य चिकित्सा अधिकारी