{"_id":"690260b88063c3c5e4021cf5","slug":"if-you-cannot-go-to-submit-the-life-certificate-then-take-the-help-of-the-postman-lalitpur-news-c-131-1-ltp1020-145177-2025-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: जीवित प्रमाणपत्र देने नहीं जा सकते तो लें डाकिए की मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: जीवित प्रमाणपत्र देने नहीं जा सकते तो लें डाकिए की मदद
विज्ञापन
शारीरिक रूप से अक्षम और बीमार पेंशनर्स घर बैठे जमा कर सकते हैं अपना प्रमाणपत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पेंशनरों के जीवित होने का प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया एक नवंबर से प्रारंभ होगी। जो पेंशनर चलने-फिरने में अक्षम है या असाध्य बीमारी से जूझ रहे हैं, वे बैंक व कोषागार में अपना जीवित प्रमाणपत्र अपने क्षेत्र के डाकिए की मदद ले सकते हैं। डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर सकते हैं।
आमतौर पर उम्र के साथ बुजुर्गों के हाथ की लकीरें भी धुंधली पड़ने लगती हैं। ऐसे में आधार कार्डधारक वरिष्ठ नागरिकों के लिए पहचान के लिए बायोमीट्रिक मशीन काम नहीं करती है। अब घर आने वाला डाकिया आइरिस स्कैनर भी साथ लाएगा और आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग के माध्यम से पेंशनर की पहचान को सत्यापित करेगा। जीवित होने का प्रमाणपत्र डिजिटल रूप से प्रस्तुत कर देगा। इसका लाभ केंद्रीय व राज्य पेंशनर्स उठा सकते हैं। इसके लिए पेंशनर्स को 70 रुपया शुल्क जमा करना होगा।
यह सुविधा अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए भी उपलब्ध होगी। जिले में पांच हजार पेंशनर्स हैं। इनमें करीब आठ सौ पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। इसके अलावा, नजदीकी सीएससी सेंटर से भी पेंशनर्स अपना ऑनलाइन विवरण भर बायोमीट्रिक तरीके से अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।
विज्ञापन
वर्जन
इस प्रक्रिया में आधार नंबर, पीपीओ नंबर व बैंक एकाउंट में से कोई भी एक चीज गलत होने पर जीवित प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें इसे दुरुस्त कराने के कोषागार ही आना पड़ेगा। ऐसे में पेंशनर्स इस बात का ध्यान रखें कि वह अपना सही विवरण दर्ज कराएं। - अटल राय भारती, जिला कोषागार अधिकारी
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पेंशनरों के जीवित होने का प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया एक नवंबर से प्रारंभ होगी। जो पेंशनर चलने-फिरने में अक्षम है या असाध्य बीमारी से जूझ रहे हैं, वे बैंक व कोषागार में अपना जीवित प्रमाणपत्र अपने क्षेत्र के डाकिए की मदद ले सकते हैं। डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर सकते हैं।
आमतौर पर उम्र के साथ बुजुर्गों के हाथ की लकीरें भी धुंधली पड़ने लगती हैं। ऐसे में आधार कार्डधारक वरिष्ठ नागरिकों के लिए पहचान के लिए बायोमीट्रिक मशीन काम नहीं करती है। अब घर आने वाला डाकिया आइरिस स्कैनर भी साथ लाएगा और आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग के माध्यम से पेंशनर की पहचान को सत्यापित करेगा। जीवित होने का प्रमाणपत्र डिजिटल रूप से प्रस्तुत कर देगा। इसका लाभ केंद्रीय व राज्य पेंशनर्स उठा सकते हैं। इसके लिए पेंशनर्स को 70 रुपया शुल्क जमा करना होगा।
विज्ञापन
यह सुविधा अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए भी उपलब्ध होगी। जिले में पांच हजार पेंशनर्स हैं। इनमें करीब आठ सौ पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। इसके अलावा, नजदीकी सीएससी सेंटर से भी पेंशनर्स अपना ऑनलाइन विवरण भर बायोमीट्रिक तरीके से अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।
विज्ञापन
वर्जन
इस प्रक्रिया में आधार नंबर, पीपीओ नंबर व बैंक एकाउंट में से कोई भी एक चीज गलत होने पर जीवित प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें इसे दुरुस्त कराने के कोषागार ही आना पड़ेगा। ऐसे में पेंशनर्स इस बात का ध्यान रखें कि वह अपना सही विवरण दर्ज कराएं। - अटल राय भारती, जिला कोषागार अधिकारी