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Lalitpur News: बारिश का बूंद-बूंद सहेजा तो भूगर्भ जल दोहन में आई कमी

Sun, 19 Jan 2025 12:35 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2025 12:35 AM IST
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If every drop of rain is saved then ground water exploitation is reduced.
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। बारिश के पानी को सहेजने के लिए किए जा रहे उपायों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। भूगर्भ जल के दोहन में कमी आई है। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों के अनुसार 2021 में 4.41 मीटर पानी का दोहन किया था। जबकि, वर्ष 2024 में यह कम होकर 3.30 मीटर पर आ गया। इन चार वर्षों में 1.11 मीटर कम भूगर्भ जल का दोहन किया गया।
कभी सूखे का दंश झेलने वाले जनपद में भूमिगत जलस्तर बढ़ाने और बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए अमृत सरोवरों का निर्माण, नदियों का जीर्णोद्धार, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने सहित अन्य काम कराए गए। अमृत सरोवरों और नदियों में बारिश का पानी संरक्षित होने लगा। इस पानी का उपयोग लोग सिंचाई सहित अन्य कार्यों में करने लगे। इसका नतीजा यह हुआ कि भूगर्भ से पानी कम निकाला जाने लगा और भूगर्भ जलस्तर बढ़ने लगा।
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भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में 4.41 मीटर भूगर्भ पानी का दोहन किया गया। जबकि, 2022 में यह घटकर 3.84 मीटर पर पहुंच गया। 2023 में इसमें और कमी आई और यह 3.53 मीटर तक पहुंच गया। वर्ष 2024 में भूगर्भ जल का दोहन 3.30 मीटर तक किया गया। ये आंकड़े विभाग द्वारा पोस्ट और प्री मानसून में की गई भूगर्भ जलस्तर की जांच में निकलकर सामने आए हैं।
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इस प्रकार से किया जाता है आकलन
भूगर्भ जल विभाग जलस्तर और दोहन जानने के लिए बारिश से पूर्व और बाद में आकलन करता है। बारिश शुरू होने से पूर्व जून में भूमिगत जलस्तर को नापते हैं, जिसे प्री मानसून कहा जाता है। मानसून के बाद अक्तूबर-नवंबर में एक बार फिर भूगर्भ जलस्तर नापा जाता है, जिसे पोस्ट मानसून कहा जाता है। अधिकारियों ने बताया कि पोस्ट मानसून के बाद अगले वर्ष प्री मानसून में भूगर्भ जलस्तर जांच के बीच जो अंतर आता है, उसके आधार पर भूगर्भ जल दोहन का आकलन किया जाता है।
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चार वर्षों में भूगर्भ जल दोहन का विवरण
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में पोस्ट मानसून में भूमिगत जलस्तर 5.69 मीटर था। 2021 में जून में प्री मानसून की जांच में यह 10.10 मीटर तक पहुंच गया। इस प्रकार 4.41 मीटर पानी का दोहन किया गया। 2021 में पोस्ट मानसून में 4.84 मीटर भूगर्भ जलस्तर था, जोकि 2022 में प्री मानसून की जांच में 8.68 मीटर पर पहुंच गया। इस प्रकार 3.84 मीटर का दोहन होना पाया गया। 2022 में पोस्ट मानसून 4.84 मीटर था और वर्ष 2023 में प्री मानसून में यह 8.37 मीटर तक पहुंच गया। इस प्रकार 3.53 मीटर पानी का दोहन किया गया। वर्ष 2023 में पोस्ट मानसून 5.05 मीटर था। 2024 में प्री मानसून में यह 8.35 मीटर तक पहुंच गया। इस प्रकार 3.30 मीटर पानी का दोहन होना पाया गया। वर्ष 2024 में पोस्ट मानसून के बाद भूगर्भ जलस्तर 4.35 मीटर आया। अब इस वर्ष जून में प्री मानसून की जांच करने के बाद आकलन किया जाएगा कि इस बीच भूगर्भ जल का कितना दोहन किया गया।

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बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए किए गए उपायों और अच्छे मानसून के चलते पिछले चार वर्षों में भूगर्भ जल दोहन में काफी कमी आई है। इसका लाभ आने वाले दिनों में लोगों को मिलेगा।
आकाशदीप, भू-भौतिकविद, भूगर्भ जल विभाग
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