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कैसे रुके बिजली की बर्बादी
ललितपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2015 11:03 PM IST
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ललितपुर। नगर में स्ट्रीट और सोडियम लाइट के दिन में जलने से होने वाली बिजली की बर्बादी नहीं रुक पा रही है। स्थिति यह है कि 2,150 स्थानों पर दिन में जलती स्ट्रीट लाइटें सूरज को रोशनी दिखाती नजर आ रही हैं। नगर विकास मंत्री भले ही कहते हों कि दिन में जलने वाली स्ट्रीट लाइट का बिल नगर पालिका के अफसरों के वेतन से भुगतान किया जाएगा, मगर शहर में ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। नगर पालिका की परिषद सीमा के अंतर्गत नगर पालिका का मार्ग प्रकाश विभाग नगरवासियों के लिए प्रकाश की व्यवस्था करता है।
नगरीय सीमा में 102 डिवाइडर वाले स्थानों पर एलईडी लाइट, 650 स्थानों पर सोडियम लाइट, 1,125 स्थानों पर ट्यूब लाइट, 130 स्थानों पर सीएफएल, 1,064 स्थानों पर बल्ब और 20 स्थानों पर फ्लड लाइट लगी हैं। इस तरह कुल 3,099 स्थानों पर नगर पालिका के उपकरण लगे हैं। नगरीय सीमा में दिन में जलने वाली बिजली को रोकने के लिए करीब तीन साल पहले नगर पालिका ने 26 लाख रुपये की धनराशि विद्युत विभाग को दी थी। इस राशि से अलग से केबल डलवाने के अलावा स्विच लगाए जाने थे, ताकि लाइटों को दिन में बंद किया जा सके। इसी क्रम में विद्युत विभाग ने अलग से केबल डलवाने का काम एक एजेंसी के माध्यम से कराया है। लेकिन, एजेंसी ने निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी काम पूर्ण नहीं कर पाया है। यद्यपि बंच केबल 95 प्रतिशत क्षेत्र में डल चुकी है, लेकिन 2,600 स्विच लगाने का करार काफी पीछे छूटता नजर आ रहा है।
नोएडा की प्राइवेट एजेंसी ने अब तक 450 ही स्विच लगा पाए हैं। 2,150 ऐसे स्थान हैं, जहां दिन में भी नगर पालिका के बिजली उपकरण जलते नजर आ रहे हैं। दिन में सूर्य को रोशनी दिखाते इन उपकरणों से हजारों रुपये की बिजली बर्बाद हो रही है। विद्युत विभाग के अफसर जिम्मेदारी को नगर पालिका के ऊपर डालते चले आ रहे हैं। वहीं, नगर पालिका के जिम्मेदारों की मानें तो विभाग पांच कर्मचारियों के माध्यम से स्विच को बंद व चालू कराया जा रहा है, सभी स्विच लगने से उनको भी बंद कराने का काम किया जाएगा।
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लंबे समय बाद नहीं हुआ पूर्ण काम
नगर पालिका ने तीन साल पहले पैसा दे दिया। इसके लिए विद्युत विभाग ने तार डालने का काम किया। काम तीस प्रशित पूर्ण हो जाने के बाद एबीसी बंच केबल योजना आ गई। इससे काम फिर से अधर में चला गया। अब स्विच परेशानी बने हुए हैं।
इनका कहना है-
कंपनी को 31 अगस्त तक काम पूर्ण करना था, लेकिन मुहल्लेवासियों के विरोध के चलते समय से काम नहीं पूर्ण हो सका। हालांकि स्विच लगाने का काम तेजी से चल रहा है। जिन स्थानों पर स्विच लग चुके हैं। नगर पालिका उनको भीघ दिन में बंद नहीं कर पा रही है।
- अजीत सिंह, इंजीनियर पॉवरटेक
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नगरीय सीमा में 102 डिवाइडर वाले स्थानों पर एलईडी लाइट, 650 स्थानों पर सोडियम लाइट, 1,125 स्थानों पर ट्यूब लाइट, 130 स्थानों पर सीएफएल, 1,064 स्थानों पर बल्ब और 20 स्थानों पर फ्लड लाइट लगी हैं। इस तरह कुल 3,099 स्थानों पर नगर पालिका के उपकरण लगे हैं। नगरीय सीमा में दिन में जलने वाली बिजली को रोकने के लिए करीब तीन साल पहले नगर पालिका ने 26 लाख रुपये की धनराशि विद्युत विभाग को दी थी। इस राशि से अलग से केबल डलवाने के अलावा स्विच लगाए जाने थे, ताकि लाइटों को दिन में बंद किया जा सके। इसी क्रम में विद्युत विभाग ने अलग से केबल डलवाने का काम एक एजेंसी के माध्यम से कराया है। लेकिन, एजेंसी ने निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी काम पूर्ण नहीं कर पाया है। यद्यपि बंच केबल 95 प्रतिशत क्षेत्र में डल चुकी है, लेकिन 2,600 स्विच लगाने का करार काफी पीछे छूटता नजर आ रहा है।
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नोएडा की प्राइवेट एजेंसी ने अब तक 450 ही स्विच लगा पाए हैं। 2,150 ऐसे स्थान हैं, जहां दिन में भी नगर पालिका के बिजली उपकरण जलते नजर आ रहे हैं। दिन में सूर्य को रोशनी दिखाते इन उपकरणों से हजारों रुपये की बिजली बर्बाद हो रही है। विद्युत विभाग के अफसर जिम्मेदारी को नगर पालिका के ऊपर डालते चले आ रहे हैं। वहीं, नगर पालिका के जिम्मेदारों की मानें तो विभाग पांच कर्मचारियों के माध्यम से स्विच को बंद व चालू कराया जा रहा है, सभी स्विच लगने से उनको भी बंद कराने का काम किया जाएगा।
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लंबे समय बाद नहीं हुआ पूर्ण काम
नगर पालिका ने तीन साल पहले पैसा दे दिया। इसके लिए विद्युत विभाग ने तार डालने का काम किया। काम तीस प्रशित पूर्ण हो जाने के बाद एबीसी बंच केबल योजना आ गई। इससे काम फिर से अधर में चला गया। अब स्विच परेशानी बने हुए हैं।
इनका कहना है-
कंपनी को 31 अगस्त तक काम पूर्ण करना था, लेकिन मुहल्लेवासियों के विरोध के चलते समय से काम नहीं पूर्ण हो सका। हालांकि स्विच लगाने का काम तेजी से चल रहा है। जिन स्थानों पर स्विच लग चुके हैं। नगर पालिका उनको भीघ दिन में बंद नहीं कर पा रही है।
- अजीत सिंह, इंजीनियर पॉवरटेक