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Lalitpur News: शिवलिंग निर्माण व महारुद्राभिषेक के साथ हुआ हवन
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ललितपुर। रामराजा मंदिर में सोमवार को असंख्यात शिवलिंग निर्माण व महारुद्राभिषेक के साथ अखंड रामायण पाठ और वेदी हवन का आयोजन किया गया। सुबह से श्रद्धालुओं ने भगवान शिव परिवार का पूर्ण स्वरूप तैयार कर श्रद्धा व उत्साह के साथ पूजन-अर्चन किया।
लक्ष्मीपुरा स्थित रामराजा मंदिर में 11 जुलाई से असंख्यात पार्थिव शिवलिंग का निर्माण शुरू किया गया, जो सावन के दूसरे सोमवार को संपन्न हो गया। मंदिर परिसर में सुबह आठ बजे से श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग निर्माण शुरू किया। दोपहर 12 बजे तक शिवलिंग का निर्माण किया। इसके बाद पंडित हरिओम शास्त्री ने मंत्रोच्चार के साथ शिवार्चन व महारुद्राभिषेक कराया। श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग का दूध से अभिषेक किया। साथ ही बेलपत्र, रोली, चावल, मेवा के साथ ही पुष्प अर्पित किए। मंदिर परिसर में ही पुजारियों ने भगवान शिव परिवार के पूर्ण स्वरूप तुलसीघर के पास स्थापित किया। इस दौरान महिलाएं पूजन करने के लिए आतुर दिखाई दीं। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित आंगन में पूर्णाहुति हवन का आयोजन किया गया। मंत्रोच्चार के बीच यजमानों व श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं। फिर शाम को श्रद्धालुओं ने बनाए गए शिविलिंग का पूजन-अर्चन व आरती के बाद थालियों को अपने सिर पर रख यात्रा निकालते हुए गाेविंद सागर बांध में विसर्जन किया।
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चंडी मंदिर में 25 लाख पार्थिव शिवलिंग का हुआ निर्माण
ललितपुर। सिद्धपीठ चंडी मंदिर पर सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग के निर्माण आयोजन में सोमवार को श्रद्धालुओं ने 25 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। भोलेनाथ का अभिषेक मुख्य यजमान हरिशंकर साहू व अन्य यजमान संदीप तिवारी, प्रदीप साहू सहित अन्य भक्तों द्वारा किया गया।
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शिवमहापुराण की कथा सुनाते हुए चंडी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि भगवान शिव के नाम का उच्चारण करना परम आनंदकारी है। इसके उच्चारण से पापों का शमन होता है। क्योंकि शिव मंगल, शुभ सौभाग्यसूचक देवता हैं। भगवान शिव का एक नाम सदाशिव है, जिसका अर्थ है जो ब्रह्मा से सृष्टि की रचना कराते हैं। भगवान विष्णु से उसका पालन और रुद्र से उसका विनाश कराते हैं। भगवान भोलेनाथ भक्त की अल्प पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं। साथ ही सावन का माह तो भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। शिव महापुराण की आरती कथा के मुख्य यजमान डॉ. अनूप श्रीवास्तव व डॉ. रानी श्रीवास्तव ने की।
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लक्ष्मीपुरा स्थित रामराजा मंदिर में 11 जुलाई से असंख्यात पार्थिव शिवलिंग का निर्माण शुरू किया गया, जो सावन के दूसरे सोमवार को संपन्न हो गया। मंदिर परिसर में सुबह आठ बजे से श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग निर्माण शुरू किया। दोपहर 12 बजे तक शिवलिंग का निर्माण किया। इसके बाद पंडित हरिओम शास्त्री ने मंत्रोच्चार के साथ शिवार्चन व महारुद्राभिषेक कराया। श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग का दूध से अभिषेक किया। साथ ही बेलपत्र, रोली, चावल, मेवा के साथ ही पुष्प अर्पित किए। मंदिर परिसर में ही पुजारियों ने भगवान शिव परिवार के पूर्ण स्वरूप तुलसीघर के पास स्थापित किया। इस दौरान महिलाएं पूजन करने के लिए आतुर दिखाई दीं। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित आंगन में पूर्णाहुति हवन का आयोजन किया गया। मंत्रोच्चार के बीच यजमानों व श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं। फिर शाम को श्रद्धालुओं ने बनाए गए शिविलिंग का पूजन-अर्चन व आरती के बाद थालियों को अपने सिर पर रख यात्रा निकालते हुए गाेविंद सागर बांध में विसर्जन किया।
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चंडी मंदिर में 25 लाख पार्थिव शिवलिंग का हुआ निर्माण
ललितपुर। सिद्धपीठ चंडी मंदिर पर सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग के निर्माण आयोजन में सोमवार को श्रद्धालुओं ने 25 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। भोलेनाथ का अभिषेक मुख्य यजमान हरिशंकर साहू व अन्य यजमान संदीप तिवारी, प्रदीप साहू सहित अन्य भक्तों द्वारा किया गया।
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शिवमहापुराण की कथा सुनाते हुए चंडी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि भगवान शिव के नाम का उच्चारण करना परम आनंदकारी है। इसके उच्चारण से पापों का शमन होता है। क्योंकि शिव मंगल, शुभ सौभाग्यसूचक देवता हैं। भगवान शिव का एक नाम सदाशिव है, जिसका अर्थ है जो ब्रह्मा से सृष्टि की रचना कराते हैं। भगवान विष्णु से उसका पालन और रुद्र से उसका विनाश कराते हैं। भगवान भोलेनाथ भक्त की अल्प पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं। साथ ही सावन का माह तो भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। शिव महापुराण की आरती कथा के मुख्य यजमान डॉ. अनूप श्रीवास्तव व डॉ. रानी श्रीवास्तव ने की।