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एसडीएम को गुमराह करने पर शक के दायरे में आई जीआरपी
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एसडीएम को गुमराह करने पर शक के दायरे में आई जीआरपी
ललितपुर। तालबेहट रेलवे स्टेशन के पास पेड़ से लटकते मिले किसान के शव के मामले में जांच शुरू हो गई है। मामले में जीआरपी एसडीएम से झूठ बोलकर फंसती नजर आ रही है। डीएम योगेश शुक्ला ने संज्ञान लेते हुए जांच एडीएम को सौंपी है। साथ ही आशंका जताई जा रही है कि किसान पर कोई कर्ज नहीं था। ऐसे में मामले में जीआरपी की भूमिका पर सवाल खड़े होते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, शनिवार सुबह तालबेहट रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर तीसरी लाइन के पास लगे पेड़ पर महरौनी के गांव सिंगेपुर निवासी गुमान पुत्र बख्ते बुनकर का शव लटका मिला था। जानकारी पर पहुंची तालबेहट पुलिस ने जीआरपी को सूचना दी। जिस पर जीआरपी शव को कब्जे में लेकर ललितपुर पोस्टमार्टम के लिए आई। मगर शव को 24 घंटे बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मामले की जानकारी पर डीएम ने एसडीएम तालबेहट और एसएचओ तालबेहट को मौके पर भेजकर मामले की पड़ताल करने के निर्देश दिए। रविवार सुबह एसडीएम सदर ने जीआरपी पहुंचकर शव के बारे में जानकारी ली। जहां शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की जानकारी दी गई। जब पोस्टमार्टम हाउस में जानकारी की गई, तो शव जीआरपी के कब्जे में रखे होने की बात सामने आई।
इस पर जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने तीन चिकित्सकों के पैनल की देखरेख में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। डीएम के निर्देश पर एडीएम अनिल कुमार मिश्रा ने भी परिजनों के बयान दर्ज किए। मामले में जीआरपी की भूमिका संदिग्ध होने पर जिलाधिकारी ने एडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी है।
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प्रशासन नहीं मान रहा कर्ज से फांसी का मामला
जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ला ने बताया कि परिजनों के अनुसार गुुमान 12 नबंवर को अपनी पत्नी की दवा लेने के लिए झांसी गया था। गुमान के पास आठ एकड़ जमीन थी, जिसे उसके पुत्र ने बंटवारा कर लिया था। अब उसके पास चार एकड़ जमीन थी। पुत्र दवा में सहयोग नहीं करते थे। 16 नबंवर को तालबेहट पुलिस ने फोन करने परिजनों को गुमान की मृत्यु की सूचना दी थी। गुमान अक्सर मथुरा, वृंदावन, चित्रकूट आदि तीर्थ स्थल जाता था। डीएम ने जीआरपी की भूमिका संदिग्ध बताते हुए कहा कि जब मृतक का शव रेलवे स्टेशन पर था, तो जीआरपी ने एसडीएम से झूठ बोला कि शव पोस्टमार्टम हाउस पहुुं्चा दिया गया। उन्होंने कहा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई भी दोषी पाया जाएगा, तो सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि गुमान की जो भी परिस्थितियां थीं, वे गुमान के आत्महत्या करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। गुमान के पास चार एकड़ जमीन थी और वह लिमिट पर दो लाख रुपये बैंक से निकालता था और जमा करता था। उसके ऊपर कोई कर्ज भी नहीं था।
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ललितपुर। तालबेहट रेलवे स्टेशन के पास पेड़ से लटकते मिले किसान के शव के मामले में जांच शुरू हो गई है। मामले में जीआरपी एसडीएम से झूठ बोलकर फंसती नजर आ रही है। डीएम योगेश शुक्ला ने संज्ञान लेते हुए जांच एडीएम को सौंपी है। साथ ही आशंका जताई जा रही है कि किसान पर कोई कर्ज नहीं था। ऐसे में मामले में जीआरपी की भूमिका पर सवाल खड़े होते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, शनिवार सुबह तालबेहट रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर तीसरी लाइन के पास लगे पेड़ पर महरौनी के गांव सिंगेपुर निवासी गुमान पुत्र बख्ते बुनकर का शव लटका मिला था। जानकारी पर पहुंची तालबेहट पुलिस ने जीआरपी को सूचना दी। जिस पर जीआरपी शव को कब्जे में लेकर ललितपुर पोस्टमार्टम के लिए आई। मगर शव को 24 घंटे बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मामले की जानकारी पर डीएम ने एसडीएम तालबेहट और एसएचओ तालबेहट को मौके पर भेजकर मामले की पड़ताल करने के निर्देश दिए। रविवार सुबह एसडीएम सदर ने जीआरपी पहुंचकर शव के बारे में जानकारी ली। जहां शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की जानकारी दी गई। जब पोस्टमार्टम हाउस में जानकारी की गई, तो शव जीआरपी के कब्जे में रखे होने की बात सामने आई।
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इस पर जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने तीन चिकित्सकों के पैनल की देखरेख में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। डीएम के निर्देश पर एडीएम अनिल कुमार मिश्रा ने भी परिजनों के बयान दर्ज किए। मामले में जीआरपी की भूमिका संदिग्ध होने पर जिलाधिकारी ने एडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी है।
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प्रशासन नहीं मान रहा कर्ज से फांसी का मामला
जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ला ने बताया कि परिजनों के अनुसार गुुमान 12 नबंवर को अपनी पत्नी की दवा लेने के लिए झांसी गया था। गुमान के पास आठ एकड़ जमीन थी, जिसे उसके पुत्र ने बंटवारा कर लिया था। अब उसके पास चार एकड़ जमीन थी। पुत्र दवा में सहयोग नहीं करते थे। 16 नबंवर को तालबेहट पुलिस ने फोन करने परिजनों को गुमान की मृत्यु की सूचना दी थी। गुमान अक्सर मथुरा, वृंदावन, चित्रकूट आदि तीर्थ स्थल जाता था। डीएम ने जीआरपी की भूमिका संदिग्ध बताते हुए कहा कि जब मृतक का शव रेलवे स्टेशन पर था, तो जीआरपी ने एसडीएम से झूठ बोला कि शव पोस्टमार्टम हाउस पहुुं्चा दिया गया। उन्होंने कहा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई भी दोषी पाया जाएगा, तो सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि गुमान की जो भी परिस्थितियां थीं, वे गुमान के आत्महत्या करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। गुमान के पास चार एकड़ जमीन थी और वह लिमिट पर दो लाख रुपये बैंक से निकालता था और जमा करता था। उसके ऊपर कोई कर्ज भी नहीं था।