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ग्रेनाईट खदानों ने छीना आठ हजार मजदूरों का रोजगार
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ग्रेनाइट की खदान
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। जिले में पिछले आठ साल से ग्रेनाइट के कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ने से मजदूरों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। यहां ग्रेनाइट की 25 खदानों के पट्टों थे, इनमें से पंद्रह शासन ने बंद कर दीं। अब यह खदानें घटकर कुल दस तक ही सीमित रह गईं हैं। खदानें बंद होने से लगभग आठ हजार मजदूरों के सामने रोजगार की समस्या बनी हुई है। इस पत्थर की चीन व हांगकांग समेत कई देशों में मांग थी। इस पत्थर के विदेश में जाने से विदेशी करंसी देश में आती थी। लेकिन, बीते मई 2012 में पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर न्यायालय के आदेश पर जिले की 15 खदानों को बंद करा दिया गया। इससे जिले के लगभग आठ हजार मजदूरों का रोजगार छिन गया था, साथ ही खनिज विभाग के राजस्व को भी प्रतिमाह तीन करोड़ रुपए मिलना बंद हो गया है। अब जनपद के केवल दस ग्रेनाइट खदानें संचालित हो रहीं है। इससे खनिज विभाग को प्रतिमाह केवल लगभग एक करोड़ रुपए का राजस्व मिल पा रहा है।
जनपद में लाल ग्रेनाइट की अकूत संपदा है। इसको लेकर शासन द्वारा बीते वर्षों में 25 खनिज पट्टे आवंटित किए गए। शुरुआात में सभी खदानों के संचालन से कई हजार लोगों को रोजगार मिल गया। इनमें खदानों के आसपास के क्षेत्र में बेरोजगारी का संकट दूर हो गया था। इन खदानों का संचालन होने से खनिज विभाग को भी खूब राजस्व मिला। खदानों से प्रतिमाह लगभग चार करोड़ रुपए का राजस्व मिलता था। वहीं, ट्रांसपोर्ट को भी बढ़ावा मिलने लगा। इस लाल ग्रेनाइट का पत्थर विदेशों में जाता था, पर अचानक पंद्रह खदानें बंद होने से मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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तीन गांव चलती थीं खदानें
जिले में ग्रेनाइट की खदानें शहर कोतवाली अंतर्गत ग्राम मड़वारी, कालापहाड़ व दुर्जनपुरा में चल रहा है। इसी मड़वारी व कालापहाड़ की 15 खदानें बंद पड़ी हुई हैं।
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जिले में ग्रेनाइट की खदानें संचालित होने से विदेशों से करेंसी आती थी। साथ ही आठ हजार मजदूरों को रोजगार के अवसर मिले थे, लेकिन बंद होने से मजदूरों से रोजगार छिन गया है। साथ ही ट्रांसपोर्ट भी प्रभावित हुए हैं।
- सुजान सिंह बुंदेला पूर्व सांसद
खदान संचालक
अब ग्रेनाइट पत्थरों के रेट नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ खदानों में पत्थर नहीं रहा है। डीजल के दाम अधिक होने से खदान संचालकों की कमर टूट गई है। सको लेकर व्यापार कम होता जा रहा है।
तिलक यादव, खदान संचालक
न्यायालय के आदेश पर हुईं खदानें बंद
जिले में संचालित ग्रेनाइट की 15 खदानों को न्यायालय के आदेश पर बंद कर दिया गया है। फैसला आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- नवीन कुमार दास
क्षेत्रीय/ जिला खान अधिकारी
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जनपद में लाल ग्रेनाइट की अकूत संपदा है। इसको लेकर शासन द्वारा बीते वर्षों में 25 खनिज पट्टे आवंटित किए गए। शुरुआात में सभी खदानों के संचालन से कई हजार लोगों को रोजगार मिल गया। इनमें खदानों के आसपास के क्षेत्र में बेरोजगारी का संकट दूर हो गया था। इन खदानों का संचालन होने से खनिज विभाग को भी खूब राजस्व मिला। खदानों से प्रतिमाह लगभग चार करोड़ रुपए का राजस्व मिलता था। वहीं, ट्रांसपोर्ट को भी बढ़ावा मिलने लगा। इस लाल ग्रेनाइट का पत्थर विदेशों में जाता था, पर अचानक पंद्रह खदानें बंद होने से मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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तीन गांव चलती थीं खदानें
जिले में ग्रेनाइट की खदानें शहर कोतवाली अंतर्गत ग्राम मड़वारी, कालापहाड़ व दुर्जनपुरा में चल रहा है। इसी मड़वारी व कालापहाड़ की 15 खदानें बंद पड़ी हुई हैं।
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जिले में ग्रेनाइट की खदानें संचालित होने से विदेशों से करेंसी आती थी। साथ ही आठ हजार मजदूरों को रोजगार के अवसर मिले थे, लेकिन बंद होने से मजदूरों से रोजगार छिन गया है। साथ ही ट्रांसपोर्ट भी प्रभावित हुए हैं।
- सुजान सिंह बुंदेला पूर्व सांसद
खदान संचालक
अब ग्रेनाइट पत्थरों के रेट नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ खदानों में पत्थर नहीं रहा है। डीजल के दाम अधिक होने से खदान संचालकों की कमर टूट गई है। सको लेकर व्यापार कम होता जा रहा है।
तिलक यादव, खदान संचालक
न्यायालय के आदेश पर हुईं खदानें बंद
जिले में संचालित ग्रेनाइट की 15 खदानों को न्यायालय के आदेश पर बंद कर दिया गया है। फैसला आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- नवीन कुमार दास
क्षेत्रीय/ जिला खान अधिकारी