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परिषदीय विद्यालयों की ग्रेडिंग ठंडे बस्ते में
ब्यूरो ललितपुर
Updated Wed, 25 Nov 2015 12:50 AM IST
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ललितपुर। बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों की ग्रेडिंग में विभागीय अफसर दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की जगह और बिगड़ने लगी है। इस मामले में अफसरों ने चुप्पी साध ली है।
सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के मकसद से लाखों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहे हैं। न केवल विद्यालयों का भौतिक परिवेश तैयार किया जा रहा है, बल्कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए शिक्षकों को शिक्षण के नए तौरतरीके सिखाए जा रहे हैं। इसके बाद भी अधिकांश स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता निम्न बनी हुई है, जो राज्य परियोजना कार्यालय सर्व शिक्षा अभियान के लिए चिंता सबब बना है।
सितंबर माह में बेसिक शिक्षा सचिव ने विद्यालयों में नवीन श्रेणीकरण व्यवस्था लागू करते हुए डायट प्राचार्य व बीएसए को निर्देश जारी किए थे। इसमें उन्होंने एक से 15 नवंबर तक विद्यालय भ्रमण एवं श्रेणीकरण करने को कहा था। इसके अनुुपालन में खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी हुए। लेकिन, उन्होंने निर्देशों की अनदेखी कर दी। यही वजह है कि आज तक विद्यालयों की ग्रेडिंग नहीं हो सकी। इन हालात में शिक्षा के गुणवत्ता की सच्चाई सामने नहीं आ पा रही है।
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यह है प्रारूप
ग्रेडिंग के दौरान श्रेणीकरण का माह, विद्यालयों की संख्या, अ श्रेणी, ब श्रेणी, स श्रेणी, द श्रेणी, श्रेणी विहीन, योग, विद्यालय विकास योजना निर्माण से संबंधित सूचना संकलित करनी थी। लेकिन, अभी तक कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है।
यह है समय सारणी
डायट प्राचार्य द्वारा तीस सितंबर को द्वि सदस्यीय टीम, जिसमें प्रत्येक विद्यालय के लिए समन्वयक, न्याय पंचायत, नगर शिक्षा संसाधन केंद्र या सह समन्वयक, ब्लाक, नगर संसाधन केंद्र और निकटस्थ विद्यालय के अध्यापक को नामित किया जाना था। एक से पंद्रह नवंबर तक श्रेणीकरण के लिए द्वि सदस्यीय टीम द्वारा विद्यालयों का भ्रमण, 16 से 20 नवंबर तक विद्यालय विकास योजना का निर्माण, 25 नवंबर को न्याय पंचायत स्तर पर प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों का निर्धारित प्रपत्र पर श्रेणी का संकलन, 30 नवंबर को ब्लाक स्तरीय श्रेणीकरण प्रपत्र संकलन, पांच दिसंबर को जिले स्तर पर डायट में विद्यालय श्रेणीकरण प्रपत्रों का संकलन किया जाएगा।
मनाया जा रहा शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष
वर्तमान शैक्षिक सत्र को शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। बेसिक शिक्षा सचिव ने प्रत्येक माह सतत अनुश्रवण के निर्देश दिए हैं। लेकिन, इन सबसे विभागीय अफसर बेखबर बने हुए हैं।
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सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के मकसद से लाखों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहे हैं। न केवल विद्यालयों का भौतिक परिवेश तैयार किया जा रहा है, बल्कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए शिक्षकों को शिक्षण के नए तौरतरीके सिखाए जा रहे हैं। इसके बाद भी अधिकांश स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता निम्न बनी हुई है, जो राज्य परियोजना कार्यालय सर्व शिक्षा अभियान के लिए चिंता सबब बना है।
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सितंबर माह में बेसिक शिक्षा सचिव ने विद्यालयों में नवीन श्रेणीकरण व्यवस्था लागू करते हुए डायट प्राचार्य व बीएसए को निर्देश जारी किए थे। इसमें उन्होंने एक से 15 नवंबर तक विद्यालय भ्रमण एवं श्रेणीकरण करने को कहा था। इसके अनुुपालन में खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी हुए। लेकिन, उन्होंने निर्देशों की अनदेखी कर दी। यही वजह है कि आज तक विद्यालयों की ग्रेडिंग नहीं हो सकी। इन हालात में शिक्षा के गुणवत्ता की सच्चाई सामने नहीं आ पा रही है।
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यह है प्रारूप
ग्रेडिंग के दौरान श्रेणीकरण का माह, विद्यालयों की संख्या, अ श्रेणी, ब श्रेणी, स श्रेणी, द श्रेणी, श्रेणी विहीन, योग, विद्यालय विकास योजना निर्माण से संबंधित सूचना संकलित करनी थी। लेकिन, अभी तक कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है।
यह है समय सारणी
डायट प्राचार्य द्वारा तीस सितंबर को द्वि सदस्यीय टीम, जिसमें प्रत्येक विद्यालय के लिए समन्वयक, न्याय पंचायत, नगर शिक्षा संसाधन केंद्र या सह समन्वयक, ब्लाक, नगर संसाधन केंद्र और निकटस्थ विद्यालय के अध्यापक को नामित किया जाना था। एक से पंद्रह नवंबर तक श्रेणीकरण के लिए द्वि सदस्यीय टीम द्वारा विद्यालयों का भ्रमण, 16 से 20 नवंबर तक विद्यालय विकास योजना का निर्माण, 25 नवंबर को न्याय पंचायत स्तर पर प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों का निर्धारित प्रपत्र पर श्रेणी का संकलन, 30 नवंबर को ब्लाक स्तरीय श्रेणीकरण प्रपत्र संकलन, पांच दिसंबर को जिले स्तर पर डायट में विद्यालय श्रेणीकरण प्रपत्रों का संकलन किया जाएगा।
मनाया जा रहा शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष
वर्तमान शैक्षिक सत्र को शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। बेसिक शिक्षा सचिव ने प्रत्येक माह सतत अनुश्रवण के निर्देश दिए हैं। लेकिन, इन सबसे विभागीय अफसर बेखबर बने हुए हैं।