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अमझरा घाटी गोशाला जा रहे 400 से अधिक अन्ना जानवरों को ग्रामीणों ने गांव से खदेड़ा
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बिरधा। ग्राम पंचायत सिंदवाहा और जरया से 400 से ज्यादा अन्ना जानवर अमझरा गोशाला जा रहे थे, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें छोड़ने जा रहे लोगों को रोक लिया, बाद में जानवरों को वापस खदेड़ दिया। इस दौरान दोनों तरफ से ग्रामीणों में जानवरों को लेकर देर तक बहस भी होती रही।
शुक्रवार को जानवर ग्राम कलोथरा से सजनम तिराहा होते हुए ग्राम बंगारिया बेटना पहुंचे थे कि तभी ग्रामीणों ने उन्हें लेकर जा रहे दूसरे गांव के लोगों को रोक लिया और जानवर छोड़े जाने का विरोध करने लगे। हालांकि, दूसरे गांव के ग्रामीणों ने बताया कि वह लोग इन जानवरों को अमझरा गोशाला ले जा रहे हैं, लेकिन संबंधित गांव के ग्रामीण नहीं माने। उनका आरोप था कि जानवर गोशाला तक नहीं पहुंचेंगे, उन्हें छोड़ने जा रहे लोग जानवरों को बाहर ही छोड़कर चले जाएंगे और फिर जानवर उनके खेतों में खड़ी फसल को बरबाद कर देंगे। इसी बात को लेकर काफी देर तक जानवर ले जाने वालों और ग्रामीणों में बहस होती रही। सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष नाराहट मौके पर पहुंचे। लेकिन, ग्रामीण जानवरों को आगे जाने देने के लिए तैयार नहीं हुए। इस पर जानवरों को उन्हीं गांवों में खदेड़ दिया गया। ग्रामीण हरगोविंद सिंह राजपूत का कहना है कि अन्ना जानवर किसानों की फसलों को खाकर बहुत नुकसान करते हैं। बृजभान सिंह राजपूत ने कहा कि प्रत्येक वर्ष अन्ना जानवरों की समस्या विकराल होती जा रही है। इस समस्या का समुचित निदान किया जाए।
छुट्टा जानवरों को अमझरा घाटी ले जाया जा रहा था। ग्रामीणों ने उन्हें नहीं जाने दिया, क्योंकि जानवरों को बीच रास्ते में छोड़ दिया जाता है। इससे परेशानी बढ़ जाती है। जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
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-मलखान सिंह, ग्राम प्रधान पटौवा
जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे फ़सल बर्बाद हो जाती है। हम लोगों ने जानवरों को रोका इसलिए कि कुछ जानवर बीच में छूट जाते हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
- ब्रजभान सिंह राजपूत
एक तो किसान पानी नहीं गिरने से परेशान है, दूसरे जो फ़सल बची है वह भी छुट्टा जानवर नष्ट कर रहे हैं। ऐसे में हम क्या करें। फसलों को बहुत नुकसान हो जाता है।
- प्रागीलाल लोधी, ग्राम पटौवा
किसानों को चारों तरफ से मार झेलनी पड़ रही है। जुलाई आधा बीत गया, अभी तक पानी नहीं गिरा है। खेतों में छुट्टा जानवर घूम रहे हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- जगदीश कुशवाहा
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शुक्रवार को जानवर ग्राम कलोथरा से सजनम तिराहा होते हुए ग्राम बंगारिया बेटना पहुंचे थे कि तभी ग्रामीणों ने उन्हें लेकर जा रहे दूसरे गांव के लोगों को रोक लिया और जानवर छोड़े जाने का विरोध करने लगे। हालांकि, दूसरे गांव के ग्रामीणों ने बताया कि वह लोग इन जानवरों को अमझरा गोशाला ले जा रहे हैं, लेकिन संबंधित गांव के ग्रामीण नहीं माने। उनका आरोप था कि जानवर गोशाला तक नहीं पहुंचेंगे, उन्हें छोड़ने जा रहे लोग जानवरों को बाहर ही छोड़कर चले जाएंगे और फिर जानवर उनके खेतों में खड़ी फसल को बरबाद कर देंगे। इसी बात को लेकर काफी देर तक जानवर ले जाने वालों और ग्रामीणों में बहस होती रही। सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष नाराहट मौके पर पहुंचे। लेकिन, ग्रामीण जानवरों को आगे जाने देने के लिए तैयार नहीं हुए। इस पर जानवरों को उन्हीं गांवों में खदेड़ दिया गया। ग्रामीण हरगोविंद सिंह राजपूत का कहना है कि अन्ना जानवर किसानों की फसलों को खाकर बहुत नुकसान करते हैं। बृजभान सिंह राजपूत ने कहा कि प्रत्येक वर्ष अन्ना जानवरों की समस्या विकराल होती जा रही है। इस समस्या का समुचित निदान किया जाए।
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छुट्टा जानवरों को अमझरा घाटी ले जाया जा रहा था। ग्रामीणों ने उन्हें नहीं जाने दिया, क्योंकि जानवरों को बीच रास्ते में छोड़ दिया जाता है। इससे परेशानी बढ़ जाती है। जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
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-मलखान सिंह, ग्राम प्रधान पटौवा
जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे फ़सल बर्बाद हो जाती है। हम लोगों ने जानवरों को रोका इसलिए कि कुछ जानवर बीच में छूट जाते हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
- ब्रजभान सिंह राजपूत
एक तो किसान पानी नहीं गिरने से परेशान है, दूसरे जो फ़सल बची है वह भी छुट्टा जानवर नष्ट कर रहे हैं। ऐसे में हम क्या करें। फसलों को बहुत नुकसान हो जाता है।
- प्रागीलाल लोधी, ग्राम पटौवा
किसानों को चारों तरफ से मार झेलनी पड़ रही है। जुलाई आधा बीत गया, अभी तक पानी नहीं गिरा है। खेतों में छुट्टा जानवर घूम रहे हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- जगदीश कुशवाहा