{"_id":"677ad13b9f622fad920c0b5c","slug":"god-cannot-stay-away-from-devotee-giri-maharaj-lalitpur-news-c-131-1-ltp1001-127105-2025-01-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान भक्त से दूर नहीं रह सकते : गिरि महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान भक्त से दूर नहीं रह सकते : गिरि महाराज
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। महामंडलेश्वर चंडीपीठाधीश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि भगवान अपने भक्त से दूर नहीं रह सकते। जब कोई भक्तों को भगवान से दूर करता है तो भगवान को भी कष्ट होता है। उन्होंने कहा कि भगवान प्रेम स्वरूप हैं, प्रेम के पाश में बंधकर वह भक्तों का कल्याण करते हैं। वह गोविंद नगर स्थित प्रशांति विद्या मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन कर रहे थे।
कथा व्यास ने कहा कि जो भगवान के भक्तों से प्रेम करता है, भगवान उसे प्रेम करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि गोवर्धन का प्रसंग हमें यही संदेश देता है कि भगवान की बनाई प्रकृति का संरक्षण संवर्धन करें, गायों की सेवा करें एवं भगवान के बने हुए हर एक तत्व का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं एवं हम सभी को उनकी शरण प्राप्त होती है। सनातन धर्म में प्रकृति के संवर्धन के लिए नदी, पर्वत, पेड़, पौधों और जीव जंतु सभी को पूजनीय माना गया है।
कथा व्यास ने प्रयाग में कुंभ के अवसर पर त्रिवेणी स्नान के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि वहां प्रत्यक्ष रूप से गंगा और यमुना नदी के संगम में स्नान का लाभ मिलता है। साथ ही कुंभ में जब बड़े-बड़े ज्ञानी, महात्मा वहां उपस्थित रहकर हम सबको अपने प्रवचन का रस साधन करते हैं तभी हमें वास्तव में सरस्वती में गोते लगाने का अवसर मिलता है। उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं और रुक्मिणी के विवाह का भी विस्तार से वर्णन किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान संजय श्रीवास्तव, विनोद खरे, कमल कुशवाहा, कैलाश बहादुर श्रीवास्तव, संदीप तिवारी, अखिलेश खरे, राजेश श्रीवास्तव, रोहित श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
ललितपुर। महामंडलेश्वर चंडीपीठाधीश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि भगवान अपने भक्त से दूर नहीं रह सकते। जब कोई भक्तों को भगवान से दूर करता है तो भगवान को भी कष्ट होता है। उन्होंने कहा कि भगवान प्रेम स्वरूप हैं, प्रेम के पाश में बंधकर वह भक्तों का कल्याण करते हैं। वह गोविंद नगर स्थित प्रशांति विद्या मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन कर रहे थे।
कथा व्यास ने कहा कि जो भगवान के भक्तों से प्रेम करता है, भगवान उसे प्रेम करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि गोवर्धन का प्रसंग हमें यही संदेश देता है कि भगवान की बनाई प्रकृति का संरक्षण संवर्धन करें, गायों की सेवा करें एवं भगवान के बने हुए हर एक तत्व का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं एवं हम सभी को उनकी शरण प्राप्त होती है। सनातन धर्म में प्रकृति के संवर्धन के लिए नदी, पर्वत, पेड़, पौधों और जीव जंतु सभी को पूजनीय माना गया है।
विज्ञापन
कथा व्यास ने प्रयाग में कुंभ के अवसर पर त्रिवेणी स्नान के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि वहां प्रत्यक्ष रूप से गंगा और यमुना नदी के संगम में स्नान का लाभ मिलता है। साथ ही कुंभ में जब बड़े-बड़े ज्ञानी, महात्मा वहां उपस्थित रहकर हम सबको अपने प्रवचन का रस साधन करते हैं तभी हमें वास्तव में सरस्वती में गोते लगाने का अवसर मिलता है। उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं और रुक्मिणी के विवाह का भी विस्तार से वर्णन किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान संजय श्रीवास्तव, विनोद खरे, कमल कुशवाहा, कैलाश बहादुर श्रीवास्तव, संदीप तिवारी, अखिलेश खरे, राजेश श्रीवास्तव, रोहित श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन