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खाद में राशन व्यवस्था लागू होने से किसान परेशान
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ललितपुर। कृषि विभाग द्वारा खाद वितरण में लागू की गई राशन की व्यवस्था किसानों के लिए मुुसीबत बन गई है। मजबूरन में उन्हें खुले बाजार से महंगे दामों में खरीदनी पड़ रही है। इससे व्यापारियों का व्यापार चल निकला है। वहीं, सहकारी समितियों को नुकसान होने की चिंता सताने लगी है। नई व्यवस्था में किसान को एक एकड़ जमीन पर दो बोरी यूरिया और इतनी बोरी डीएपी उपलब्ध कराई जा रही है।
शासन ने प्रत्येक किसान को खाद मुहैया कराने के उद्देश्य से राशन व्यवस्था लागू की है। नई व्यवस्था में किसान को एक एकड़ जमीन पर दो बोरी यूरिया और इतनी बोरी डीएपी उपलब्ध कराई जा रही है। इस दौरान खाद खरीदते समय किसान को आधार कार्ड दिखाना होगा। ऐसे में कई किसानों को खाद खरीदने में परेशानी आ रही है। वहीं, खुले बाजार में दुकानदारों की चांदी हो गई है। वे किसानों को मनमाने रेट पर खाद मुहैया करा रहे हैं। हालांकि, खुले बाजार में भी राशन की व्यवस्था लागू है लेकिन यहां इसका पालन नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा लाभ व्यापारियों को मिल रहा है। सहकारी समितियों से खाद कम ही वितरित हो पा रही है। इसकी वजह कई किसान समितियों के सदस्य ही नहीं हैं तो कुछ ऐसे भी किसान हैं जिन्होंने भूमि को बटाई पर ले रखी है या फिर ठेके पे। इन किसानों को आधार कार्ड सहित किसान बही व खतौनी जैसे दस्तावेज जुटाने में परेशानी आ रही है। इस स्थिति में सक्षम किसान खुले बाजार से खाद खरीदने में कामयाब हो रहे हैं लेकिन निर्धन किसानों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इस समय सहकारिता विभाग के बफर में 1910 मीट्रिक टन डीएपी व यूरिया 2450 मीट्रिक टन उपलब्ध है। सहकारी समितियों में 1043 मीट्रिक टन यूरिया व 526 मीट्रिक टन डीएपी है। शासन ने 45 किलो यूरिया की बोरी के रेट 266.50 मीट्रिक टन व डीएपी का दाम 1200 रुपये रेट रखा गया है।
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सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में यूूरिया उपलब्ध है। राशन व्यवस्था से कुछ किसानों को खाद लेने में परेशानी आ रही है। रमेश कुमार गुप्ता, सहायक निबंधक, सहकारी समितियां
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खाद के संबंध में एक-दो शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। किसानों को खाद समय से उपलब्ध हो रही है। गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी
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शासन ने प्रत्येक किसान को खाद मुहैया कराने के उद्देश्य से राशन व्यवस्था लागू की है। नई व्यवस्था में किसान को एक एकड़ जमीन पर दो बोरी यूरिया और इतनी बोरी डीएपी उपलब्ध कराई जा रही है। इस दौरान खाद खरीदते समय किसान को आधार कार्ड दिखाना होगा। ऐसे में कई किसानों को खाद खरीदने में परेशानी आ रही है। वहीं, खुले बाजार में दुकानदारों की चांदी हो गई है। वे किसानों को मनमाने रेट पर खाद मुहैया करा रहे हैं। हालांकि, खुले बाजार में भी राशन की व्यवस्था लागू है लेकिन यहां इसका पालन नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा लाभ व्यापारियों को मिल रहा है। सहकारी समितियों से खाद कम ही वितरित हो पा रही है। इसकी वजह कई किसान समितियों के सदस्य ही नहीं हैं तो कुछ ऐसे भी किसान हैं जिन्होंने भूमि को बटाई पर ले रखी है या फिर ठेके पे। इन किसानों को आधार कार्ड सहित किसान बही व खतौनी जैसे दस्तावेज जुटाने में परेशानी आ रही है। इस स्थिति में सक्षम किसान खुले बाजार से खाद खरीदने में कामयाब हो रहे हैं लेकिन निर्धन किसानों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इस समय सहकारिता विभाग के बफर में 1910 मीट्रिक टन डीएपी व यूरिया 2450 मीट्रिक टन उपलब्ध है। सहकारी समितियों में 1043 मीट्रिक टन यूरिया व 526 मीट्रिक टन डीएपी है। शासन ने 45 किलो यूरिया की बोरी के रेट 266.50 मीट्रिक टन व डीएपी का दाम 1200 रुपये रेट रखा गया है।
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सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में यूूरिया उपलब्ध है। राशन व्यवस्था से कुछ किसानों को खाद लेने में परेशानी आ रही है। रमेश कुमार गुप्ता, सहायक निबंधक, सहकारी समितियां
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खाद के संबंध में एक-दो शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। किसानों को खाद समय से उपलब्ध हो रही है। गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी