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अफसरों की कृपा से डटे हैं वन दरोगा

Thu, 20 Jul 2017 12:59 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Thu, 20 Jul 2017 12:59 AM IST
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 forest officers transfer denied
प्रशासन - फोटो : demo pic
वन विभाग के स्थानांतरित दरोगा विभागीय उच्च अधिकारियों की शह के चलते कार्यमुक्त नहीं हो रहे हैं। इससे तबादला नीति पर प्रश्न चिह्न खड़ा हो गया है। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इसकी शिकायत सीएम से की है।   
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जून माह में शासन की तबादला नीति के तहत विभिन्न विभागों में अधिकारी, कर्मचारी के स्थानांतरण हुए। इसी कड़ी में 15 से 20 साल का समय एक ही कार्यस्थल पर गुजार चुके वन दरोगाओं को लिया गया। इस दौरान करीब आधा दर्जन दरोगाओं के स्थानांतरण किए गए। एक पखवाड़ा गुजरने के बाद भी किसी भी दरोगा ने अपना कार्य स्थल नहीं छोड़ा है। इसके विपरीत दरोगाओं के स्थानांतरण आदेश निरस्त होने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसे लेकर सिविल लाइन निवासी एक आरटीआई कार्यकर्ता देवेंद्र सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजा है। इसमें कहा गया कि सालों बाद वन विभाग में दरोगाओं के स्थानांतरण गैर जनपद हुए हैं। इसमें कई दरोगाओं को एक ही कार्य स्थल पर 17 से 18 साल हो गए हैं तो कइयों ने आधी से ज्यादा नौकरी एक ही जिले में कर ली है। इस दौरान कई दरोगाओं ने बेनामी संपत्ति बना ली है, तो किसी के पास लक्जरी वाहन व ट्रैक्टर ट्राली आदि हैं। ऐसे दरोगाओं की संपत्ति की जांच कराते हुए उन्हें स्थानांतरित स्थल के लिए कार्यमुक्त किया जाए, जिससे विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। उधर, डीएफओ वीके जैन का कहना है कि किसी भी वन दरोगा के स्थानांतरण निरस्तीकरण की जानकारी नहीं है। उन्होंने माना कि इस तरह की चर्चाएं कर्मचारियों में सुनी जा रही हैं।     
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वन विभाग में तबादले बने मखौल     
वन विभाग इकलौता ऐसा विभाग है जहां स्थानांतरण प्रक्रिया मखौल बन गई है। गत वर्ष दो दरोगाओं के स्थानांतरण जनपद के अंदर हुए थे। इनके कार्यस्थल आज तक नहीं बदले गए। इससे पहले भी एक दो दरोगाओं के तबादले गैर जनपद हो चुके हैं, जिन्हें बाद में रोक दिया गया। यही नहीं, रिक्त रेंज में रेंजर बना दिया। इस तरह का एक बार फिर आदेश जखौरा रेंज के लिए बनाया जा सकता है। इसकी चर्चाएं गर्म हैं, यहां के रेंजर इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
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