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ट्रैक्टर लो, तो जल्द मिल जाएगा मुआवजा

Wed, 06 Apr 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर
अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर Updated Wed, 06 Apr 2016 01:47 AM IST
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farmers compensation
क‌िसान - फोटो : demo pic
ललितपुर। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे बंडई बांध से प्रभावित किसानों को दलालों से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि दलाल किसानों पर ट्रैक्टर खरीदने का दबाव डाल रहे हैं। वह कहते हैं कि ट्रैक्टर खरीद लो तो मुआवजा जल्द मिल जाएगा। दरअसल, ट्रैक्टर खरीद के पीछे उनको मिलने वाला मोटा कमीशन है।
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232 करोड़ रुपये की लागत से मड़ावरा तहसील के ग्राम धौरीसागर में बंडई बांध का निर्माण किया जा रहा है। बांध केे निर्माण के लिए कुल 385 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। सिंचाई निर्माण खंड प्रथम की मानें तो अभी तक 272 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। वहीं, ग्राम सकरा निवासी सहारिया बस्ती के लोगों का कहना है कि उनकी जमीन पर सिंचाई विभाग की तरफ से सीमांकन कर दिया गया है, लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। जबकि, आशाराम सहारिया ने बताया कि विभाग से कई बार जमीन का मुआवजा देने को कहा गया, लेकिन हर बार नई तारीख बताकर टाल दिया जाता है। आशाराम बताता है कि कई दलाल गांव में घूमकर ट्रैक्टर खरीदने का प्रलोभन दे रहे हैं। दलालों का कहना है कि ट्रैक्टर लेने की हामी भर दो तो सारा मुआवजा जल्द दिला दिया जाएगा। दरअसल, सहारिया बस्ती के कई लोगों की जमीन बंडई बांध के डूब क्षेत्र में जा रही है। कई आदिवासी तो ऐसे हैं कि उनकी पूरी जमीन ही बांध डूब क्षेत्र में जा रही है। उनके भूमिहीन होने के  बाद उनके पास गुजर-बसर के नाम पर केवल मुआवजा ही रह जाएगा। इन लोगों के पुनर्वास को लेकर विभाग की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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जनपद में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बांधों का निर्माण हुआ है, लेकिन किसी भी बांध परियोजना से प्रभावित संपूर्ण किसानों को मुआवजा वितरित नहीं हो पाया है। कचनौंदा बांध का तो उद्घाटन तक कर दिया गया, लेकिन अभी तक इस परियोजना से प्रभावित 50 फीसदी किसानों को मुआवजा वितरित नहीं किया गया है। कचनौंदा  बांध प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा वितरण को दो सौ करोड़ रुपये बजट की आवश्यकता है। सरकार निर्माण कार्यों के लिए भले ही बजट जारी कर रही हो, लेकिन किसानों के मुआवजे के लिए कोई बजट जारी नहीं हो पाया है।
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बाल मजदूरों से करा रहे काम
बंडई बांध परियोजना में काम कर रहे मजदूरों के बीच बच्चों को काम करते देखा जा सकता है। 41 डिग्री सेल्सियस के तापमान में स्पिल-वे की तराई कर रहे भुवन ने बताया कि उसकी उम्र 14 साल है और पिछले छह महीने से बांध पर काम कर रहा  है। ठेकेदार उसे दिन भर के काम के एक सौ बीस रुपये देता है। यह मजदूरी  मनरेगा मजदूरी से भी कम है। वहीं, बांध की पिंचिग बनाने के लिए बड़े-बड़े  बोल्डरों को अपने सिर पर ले जा रही बच्चियां बड़ी तादाद में काम कर रही हैं। साधना ने बताया कि उसकी उम्र 12 साल है, स्कूल जाने में क्या मिलने वाला है। इसलिए पूरे परिवार के साथ मजदूरी करने आ रही है। देखा जाए तो बाल मजूदरी  रोकने के सरकारी दावों की पोल बंडई बांध परियोजना में खुल रही है।

अवैध खनन से ठेकेदार के वारे न्यारे
बांध निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में बोल्डरों का उपयोग किया जाता है। बांध के दोनों तरफ पिचिंग में बोल्डर का उपयोग होता है। माइनर मिनरल्स की श्रेणी  में आने वाले बोल्डर के उपयोग, परिवहन व उत्खनन के लिए खनिज विभाग की अनुमति व रायल्टी जमा करनी होती है। लेकिन, बंडई बांध परियोजना में लग रहे लाखों क्यूबिक मीटर बोल्डर के लिए खजिन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई है। ऐसे में शासन को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। बांध की तलहटी में अवैध खनन करके बोल्डर निकाले जा रहे हैं, जिनकी कोई रायल्टी खनिज विभाग में जमा नहीं है।

विभागीय कर्मियों ने किया खेल
सिंचाई निर्माण खंड प्रथम की ओर से बंडई बांध बनाने की परियोजना पर काम वर्ष 2014  से शुरु हो गया था। जमीन चिह्नित करने को लेकर विभागीय कर्मियों ने खूब लाभ उठाया। गरीब किसान व आदिवासियों से सस्ते दामों में जमीन खरीद ली। सिंचाई निर्माण खंड प्रथम में तैनात जिलेदार व अन्य कर्मियों ने अपने साले, भाई, भाभी व  अन्य रिश्तेदारों के नाम पर किसानों से कम दाम पर जमीन खरीद ली और सिंचाई विभाग को बांध के लिए देकर मुआवजा प्राप्त कर लिया। इसकी जानकारी उच्च  स्तरीय अधिकारियों को भी लेकिन कोई शिकायत नहीं आने के कारण सब चुप्पी साधे हैं।

वन विभाग की मंजूरी लंबित
वन विभाग की जमीन का उपयोग कई बांधों में किया गया है। बंडई बांध में भी 10  हेक्टेयर जमीन वन विभाग की अधिग्रहित की जा रही है। फारेस्ट कंजरवेशन एक्ट- 1980 के तहत केंद्रीय वन मंत्रालय की अनुमति के बाद ही वन विभाग की जमीन का उपयोग किया जा सकता है। डीएफओ वीके जैन का कहना है कि बंडई बांध में विभाग की दस हेक्टेयर जमीन को लेकर सिंचाई विभाग ने पत्र  लिखा है। नियमों का पालन करके ही जमीन का अधिग्रहण करने दिया जाएगा।



बंडई बांध के लिए जरूरी जमीन में केवल 113 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण बाकी है। किसानों से जमीन खरीदने की प्रक्रिया लगातार जारी है। बांध के निर्माण होने तक किसानों को संपूर्ण मुआवजा वितरित कर दिया जाएगा। बाल मजदूरी को गंभीरता से लेते हुए ठेकेेदार को नोटिस जारी किया जाएगा। अवैध खनन के संबंध  में जांच कराई जाएगी।
- नरेंद्र कुमार जड़िया, अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड प्रथम
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