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Lalitpur News: ईको टूरिज्म से बदलेगी जनपद के पर्यटन स्थलों की तस्वीर
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वन विभाग ने ईको टूरिज्म का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है, जिले में अधिकांश पर्यटनस्थल व ऐतिहासिक स्थल वन क्षेत्र में होने के कारण यहां पर सैलानियाें गतिविधियों में तेजी बड़ाने के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें पर्यावरण संरक्षण को भी ध्यान में रखा गया है। बंदरगुढ़ा, रणछोर, अमझरा व पांडव वन को इसमें शामिल किया गया है।
वन विभाग ने ईको टूरिज्म पॉलिसी के तहत निजी संस्थाओं के साथ मिलकर वन क्षेत्र में मौजूद रमणीक स्थलों पर पर्यटन की दृष्टि से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। ईको टूरिज्म पॉलिसी के तहत संभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के सहयोग से बिना प्रकृति को नुकसान पहुंचाए पर्यटकों को लुभाने योग्य सुविधाओं को जोड़ा जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जनपद में महावीर वन्य जीव अभ्यारण, देवगढ़, पांडव वन, बंदरगुढ़ा, रणछोरधाम, अमझरा धाम, पांडववन व चंदन वन को ईको टूरिज्म के लिए विकसित करने की योजना तैयार की गई है। ईको टूरिज्म के लिए जिन बिदुंओं का मापदंड बनाया गया है, उनमें दर्शनीय स्थल वन के अंदर या नजदीक हो, स्थल के पास वाटर बॉडीज हो, स्थल का ऐतिहासिक व पुरातत्विक महत्व हो। जनपद के कई पर्यटन स्थलों में ईको टूरिज्म के यह मापदंड पूरे करने की क्षमता है, बस देरी है तो ईको टूरिज्म की शुरुआत करने की।
ललितपुर। वन विभाग ने ईको टूरिज्म का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है, जिले में अधिकांश पर्यटनस्थल व ऐतिहासिक स्थल वन क्षेत्र में होने के कारण यहां पर सैलानियाें गतिविधियों में तेजी बड़ाने के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें पर्यावरण संरक्षण को भी ध्यान में रखा गया है। बंदरगुढ़ा, रणछोर, अमझरा व पांडव वन को इसमें शामिल किया गया है।
वन विभाग ने ईको टूरिज्म पॉलिसी के तहत निजी संस्थाओं के साथ मिलकर वन क्षेत्र में मौजूद रमणीक स्थलों पर पर्यटन की दृष्टि से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। ईको टूरिज्म पॉलिसी के तहत संभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के सहयोग से बिना प्रकृति को नुकसान पहुंचाए पर्यटकों को लुभाने योग्य सुविधाओं को जोड़ा जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जनपद में महावीर वन्य जीव अभ्यारण, देवगढ़, पांडव वन, बंदरगुढ़ा, रणछोरधाम, अमझरा धाम, पांडववन व चंदन वन को ईको टूरिज्म के लिए विकसित करने की योजना तैयार की गई है। ईको टूरिज्म के लिए जिन बिदुंओं का मापदंड बनाया गया है, उनमें दर्शनीय स्थल वन के अंदर या नजदीक हो, स्थल के पास वाटर बॉडीज हो, स्थल का ऐतिहासिक व पुरातत्विक महत्व हो। जनपद के कई पर्यटन स्थलों में ईको टूरिज्म के यह मापदंड पूरे करने की क्षमता है, बस देरी है तो ईको टूरिज्म की शुरुआत करने की।
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