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Lalitpur News: जाखलौन में सूखा जलाशय भी हो सकता चमगादड़ों की मौत का कारण
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जाखलौन और दैलवारा में बीते दिन सैकड़ों की संख्या में हुई चमगादड़ों की मौत के मामले में वन विभाग ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद भीषण गर्मी में मौत होने की बात कही है।
शुक्रवार को डीएफओ ने बताया कि जाखलौन में तालाब सूखा था, जिस वजह से बरगद के पेड़ पर बड़ी संख्या में रह रहे चमगादड़ों को पानी नहीं मिल सका, इससे उनकी जान चली गई। दैलवारा में तो तालाब में पानी बताया जा रहा, लेकिन वहां दो दिनों से चमगादड़ मरने की बात ग्रामीण बता रहे हैं। अधिकारियों को आरबीआरआई बरेली व भोपाल भेजे गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। डीएफओ ने बताया कि 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान होने के कारण हीटवेव की चपेट में आकर भी चमगादड़ मर सकते हैं।
ललितपुर रेंज की ग्राम पंचायत जाखलौन व दैलवारा में दो सौ से अधिक चमगादड़ मरे मिले थे। वन विभाग ने चमगादड़ों के शव का पोस्टमार्टम कराया था। अधिकारियों का कहना है कि 40 डिग्री सेल्सियस के पास तापमान होने पर कुछ प्रजाति के पक्षियों पर असर पड़ने लगता है, जिसमें चमगादड़ पहले आते हैं। आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए पेड़ों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। जिन पेड़ों पर चमगादड़ रह रहे हैं, उन पर गीले बोरे टंगवाए। वहीं उनके खाने का भी इंतजाम किया। ग्रामीणों को आगाह किया कि अब कोई चमगादड़ मरा मिले तो उसे छुएं नहीं। क्योंकि संक्रमण का खतरा रहता है।
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अगले सप्ताह आ सकी है बरेली से जांच रिपोर्ट
मृत चमगादड़ों का सैंपल आरबीआरआई बरेली भेजा गया है। शनिवार और रविवार अवकाश होने के कारण अगले सप्ताह बुधवार तक रिपोर्ट आ सकती है।
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चमगादड़ की मौत का कारण गर्मी है। यह एक स्तनधारी जीव है जो 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान सहन नहीं कर पाता है। चमगादड़ों की सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं।
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।
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फोटो- 46
चमगादड़ विशेष रूप से गर्मी के प्रति संवेदनशील होते हैं, क्योंकि वे छोटे स्तनधारी होते हैं। उनमें अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की सीमित क्षमता होती है। उच्च तापमान से जलस्रोत सूख गए हैं। पर्याप्त पानी के बिना चमगादड़ अत्यधिक गर्मी के दौरान अपने शारीरिक तापमान को बनाए नहीं रख सकते हैं।
डॉ. सोनिका कुशवाहा अध्यक्ष, भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान, झांसी ।
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फोटो- 47
चमगादड़ की प्रजाति हीट रेजिस्टेंट होती है। यह न तो अधिक सर्दी सहन कर सकते और न ही अधिक तापमान। इस समय दिन का तापमान लगभग 46 डिग्री सेल्सियस और रात का 34.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा चल रहा है, जो जीव जंतुओं के हिसाब से बहुत ज्यादा है। -डॉ.राजीव कुमार निरंजन, पर्यावरण विभाग नेहरू महाविद्यालय।
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फोटो- 48
चमगादड़ों के पंख महीन झिल्ली से बने होते हैं। वह अधिक तापमान नहीं सह पाते हैं। गर्मी दूर करने के लिए यह पानी में गोता लगाते हैं, जिससे इनके शरीर का तापमान कम हो जाता है। जहां आसपास जलस्रोत नहीं हैं, ऐसे स्थानों पर चमगादड़ों की मौत हो रही है।
पुष्पेंद्र सिंह चौहान पर्यावरणविद, गौरैया बचाओ अभियान।
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ललितपुर। जाखलौन और दैलवारा में बीते दिन सैकड़ों की संख्या में हुई चमगादड़ों की मौत के मामले में वन विभाग ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद भीषण गर्मी में मौत होने की बात कही है।
शुक्रवार को डीएफओ ने बताया कि जाखलौन में तालाब सूखा था, जिस वजह से बरगद के पेड़ पर बड़ी संख्या में रह रहे चमगादड़ों को पानी नहीं मिल सका, इससे उनकी जान चली गई। दैलवारा में तो तालाब में पानी बताया जा रहा, लेकिन वहां दो दिनों से चमगादड़ मरने की बात ग्रामीण बता रहे हैं। अधिकारियों को आरबीआरआई बरेली व भोपाल भेजे गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। डीएफओ ने बताया कि 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान होने के कारण हीटवेव की चपेट में आकर भी चमगादड़ मर सकते हैं।
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ललितपुर रेंज की ग्राम पंचायत जाखलौन व दैलवारा में दो सौ से अधिक चमगादड़ मरे मिले थे। वन विभाग ने चमगादड़ों के शव का पोस्टमार्टम कराया था। अधिकारियों का कहना है कि 40 डिग्री सेल्सियस के पास तापमान होने पर कुछ प्रजाति के पक्षियों पर असर पड़ने लगता है, जिसमें चमगादड़ पहले आते हैं। आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए पेड़ों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। जिन पेड़ों पर चमगादड़ रह रहे हैं, उन पर गीले बोरे टंगवाए। वहीं उनके खाने का भी इंतजाम किया। ग्रामीणों को आगाह किया कि अब कोई चमगादड़ मरा मिले तो उसे छुएं नहीं। क्योंकि संक्रमण का खतरा रहता है।
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अगले सप्ताह आ सकी है बरेली से जांच रिपोर्ट
मृत चमगादड़ों का सैंपल आरबीआरआई बरेली भेजा गया है। शनिवार और रविवार अवकाश होने के कारण अगले सप्ताह बुधवार तक रिपोर्ट आ सकती है।
चमगादड़ की मौत का कारण गर्मी है। यह एक स्तनधारी जीव है जो 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान सहन नहीं कर पाता है। चमगादड़ों की सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं।
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।
फोटो- 46
चमगादड़ विशेष रूप से गर्मी के प्रति संवेदनशील होते हैं, क्योंकि वे छोटे स्तनधारी होते हैं। उनमें अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की सीमित क्षमता होती है। उच्च तापमान से जलस्रोत सूख गए हैं। पर्याप्त पानी के बिना चमगादड़ अत्यधिक गर्मी के दौरान अपने शारीरिक तापमान को बनाए नहीं रख सकते हैं।
डॉ. सोनिका कुशवाहा अध्यक्ष, भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान, झांसी ।
फोटो- 47
चमगादड़ की प्रजाति हीट रेजिस्टेंट होती है। यह न तो अधिक सर्दी सहन कर सकते और न ही अधिक तापमान। इस समय दिन का तापमान लगभग 46 डिग्री सेल्सियस और रात का 34.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा चल रहा है, जो जीव जंतुओं के हिसाब से बहुत ज्यादा है। -डॉ.राजीव कुमार निरंजन, पर्यावरण विभाग नेहरू महाविद्यालय।
फोटो- 48
चमगादड़ों के पंख महीन झिल्ली से बने होते हैं। वह अधिक तापमान नहीं सह पाते हैं। गर्मी दूर करने के लिए यह पानी में गोता लगाते हैं, जिससे इनके शरीर का तापमान कम हो जाता है। जहां आसपास जलस्रोत नहीं हैं, ऐसे स्थानों पर चमगादड़ों की मौत हो रही है।
पुष्पेंद्र सिंह चौहान पर्यावरणविद, गौरैया बचाओ अभियान।