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Lalitpur News: छोड़े गए पानी से टीकमगढ़ में खत्म होगा पेयजल संकट
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ललितपुर। जमरार बांध से छोड़ा गया पानी नदी के रास्ते बृहस्पतिवार की सुबह करीब 11 बजे मध्य प्रदेश के कुंडेश्वर में अस्थाई स्टापडेम के रास्ते जामनी नदी के माध्यम से वरीघाट पहुंच गया और यहां का जलस्तर बढ़ गया। इस दौरान जमरार नदी से आ रहे पानी को कोई किसान लिफ्ट न कर ले, इसके लिए एमपी पुलिस रात को निगरानी करती रही। बांध से छोड़े गए पानी से टीकमगढ़ नगर क्षेत्र में एक माह तक पेयजल आपूर्ति हो सकेगी।
जनपद से सटे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ नगर में पेयजल संकट दूर करने के लिए बुधवार की रात प्रदश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमरार बांध के गेट खोलकर टीकमगढ़ को पानी देने की हरी झंडी दी। इसके बाद सिंचाई निर्माण खंड प्रथम इंजी. भागीरथ बरुआ सिंचाई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ जमरार बांध पर पहुंचे। उनकी निगरानी में बांध का एक गेट 0.5 मीटर खोल दिए गए। बांध के गेट सुबह 6 बजे बंद कर दिए गए।
बांध से पानी जमरार नदी के माध्यम से करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करते हुए बृहस्पतिवार की सुबह करीब 11 बजे एमपी क्षेत्र के कुंडेश्वर में मिट्टी और सीमेंट की बोरियों से निर्मित कराए अस्थाई स्टापडेम तक पहुंचा। यहां से पानी जामनी नदी के माध्यम से वरीघाट तक पहुंचा। वरीघाट पर करीब एक से डेढ़ एमसीएम पानी एकत्रित किया जाता है। टीकमगढ़ नगरपालिका प्रशासन के कर्मचारी और अधिकारी भी रात में नदी किनारे भ्रमणशील रहकर पानी इधर-उधर न चला जाए, इसके लिए भ्रमणशील रहे। वरीघाट में पानी पहुंचने से टीकमगढ़ प्रशासन सहित यहां के लोगों ने राहत की सांस ली।
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इन गांव से होते हुए वरीघाट पहुंचा जमरार बांध का पानी
जमरार बांध का पानी जमरार नदी के माध्यम से क्योलारी, अगोरा, घाट खिरिया, तिंदारी, करमारी, अस्तौन, नचनवारा और कुंडेश्वर पहुंचा। टीकमगढ़ नगर पालिका प्रशासन ने कुंडेश्वर में जमरार नदी में आने वाले पानी का मार्ग परिवर्तन करने के लिए मिट्टी व सीमेंट की बोरियों से एक अस्थाई स्टापडेम बनाया था। यहां से पानी को जमानी नदी के माध्यम से वरीघाट में पहुंचाया गया।
गर्मी और उपयोग करने से कम हो गया था जामनी नदी का पानी
जामनी बांध से निकली जामनी नदी मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के दो जिलों की सीमा तय करती है। जामनी नदी टीकमगढ़ शहर को सप्लाई होने वाले पेयजल का मुख्य स्रोत है। कुंडेश्वर के पास वरीघाट में जामनी नदी के पानी को एकत्रित कर यहां पर इंटेकवेल बनाया गया है। यहां से टीकमगढ़ के लिए पेयजल आपूर्ति की जाती है। इस बार भीषण गर्मी और जायद की फसल में नदी किनारे खेत वाले किसानों द्वारा सिंचाई के लिए इस नदी के पानी का उपयोग करने से जामनी नदी का पानी काफी कम हो गया था। इससे वरीघाट का जलस्तर कम हो गया था और टीकमगढ़ में पेयजल की दिक्कत पैदा हो गई थी।
वरीघाट में पनडुब्बी डालकर टीकमगढ़ चला रहा था पेयजल का काम
वरीघाट का जलस्तर कम होने से यहां बने इंटेकवेल में पानी नहीं पहुंच पा रहा था। इसके लिए टीकमगढ़ नगर प्रशासन ने विकल्प के तौर पर वरीघाट में करीब 10 पनडुब्बी डालकर पानी की आपूर्ति कर रहा था। लेकिन अब वरीघाट का जलस्तर बढ़ जाने से इंटेकवेल के जरिए पानी की सप्लाई होगी।
पानी की स्वीकृति में लगे 19 दिन
- 24 मई को टीकमगढ़ कलेक्टर ने ललितपुर डीएम को लिखा पत्र मांगा जामनी बांध से पानी।
- 26 मई को सिंचाई विभाग ने जामनी बांध का क्रस्ट लेविल कम होेने से पानी छोड़ने में जताई असमर्थता।
- 27 मई को टीकमगढ़ कलेक्टर ने जमरार बांध से पानी देने के लिए ललितपुर डीएम को लिखा पत्र।
- 30 मई को टीकमगढ़ नगर प्रशासन की टीम और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने जमरार बांध में देखी पानी की उपलब्धता।
- 31 मई को जमरार बांध से पानी छोड़ने का मामला मुख्य अभियंता स्तर तक पहुंचा।
- 12 जून को एमपी के मुख्यमंत्री ने यूपी के सीएम से पानी छोड़ने की रखी मांग, जिस पर यूपी सीएम ने हरी झंडी दे दी।
जमरार बांध के गेट बुधवार की रात को खोले गए और सुबह छह बजे बंद कर दिए गए। बांध से छोड़ा गया पानी नदी के माध्यम से टीकमगढ़ क्षेत्र के कुंडेश्वर के पास स्थित बरीघाट में पहुंच गया। इससे वरीघाट का जलस्तर बढ़ गया। अब टीकमगढ़ शहर में पेयजल संकट दूर हो जाएगा। - इं. भागीरथ बरुआ, अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड प्रथम
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जनपद से सटे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ नगर में पेयजल संकट दूर करने के लिए बुधवार की रात प्रदश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमरार बांध के गेट खोलकर टीकमगढ़ को पानी देने की हरी झंडी दी। इसके बाद सिंचाई निर्माण खंड प्रथम इंजी. भागीरथ बरुआ सिंचाई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ जमरार बांध पर पहुंचे। उनकी निगरानी में बांध का एक गेट 0.5 मीटर खोल दिए गए। बांध के गेट सुबह 6 बजे बंद कर दिए गए।
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बांध से पानी जमरार नदी के माध्यम से करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करते हुए बृहस्पतिवार की सुबह करीब 11 बजे एमपी क्षेत्र के कुंडेश्वर में मिट्टी और सीमेंट की बोरियों से निर्मित कराए अस्थाई स्टापडेम तक पहुंचा। यहां से पानी जामनी नदी के माध्यम से वरीघाट तक पहुंचा। वरीघाट पर करीब एक से डेढ़ एमसीएम पानी एकत्रित किया जाता है। टीकमगढ़ नगरपालिका प्रशासन के कर्मचारी और अधिकारी भी रात में नदी किनारे भ्रमणशील रहकर पानी इधर-उधर न चला जाए, इसके लिए भ्रमणशील रहे। वरीघाट में पानी पहुंचने से टीकमगढ़ प्रशासन सहित यहां के लोगों ने राहत की सांस ली।
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इन गांव से होते हुए वरीघाट पहुंचा जमरार बांध का पानी
जमरार बांध का पानी जमरार नदी के माध्यम से क्योलारी, अगोरा, घाट खिरिया, तिंदारी, करमारी, अस्तौन, नचनवारा और कुंडेश्वर पहुंचा। टीकमगढ़ नगर पालिका प्रशासन ने कुंडेश्वर में जमरार नदी में आने वाले पानी का मार्ग परिवर्तन करने के लिए मिट्टी व सीमेंट की बोरियों से एक अस्थाई स्टापडेम बनाया था। यहां से पानी को जमानी नदी के माध्यम से वरीघाट में पहुंचाया गया।
गर्मी और उपयोग करने से कम हो गया था जामनी नदी का पानी
जामनी बांध से निकली जामनी नदी मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के दो जिलों की सीमा तय करती है। जामनी नदी टीकमगढ़ शहर को सप्लाई होने वाले पेयजल का मुख्य स्रोत है। कुंडेश्वर के पास वरीघाट में जामनी नदी के पानी को एकत्रित कर यहां पर इंटेकवेल बनाया गया है। यहां से टीकमगढ़ के लिए पेयजल आपूर्ति की जाती है। इस बार भीषण गर्मी और जायद की फसल में नदी किनारे खेत वाले किसानों द्वारा सिंचाई के लिए इस नदी के पानी का उपयोग करने से जामनी नदी का पानी काफी कम हो गया था। इससे वरीघाट का जलस्तर कम हो गया था और टीकमगढ़ में पेयजल की दिक्कत पैदा हो गई थी।
वरीघाट में पनडुब्बी डालकर टीकमगढ़ चला रहा था पेयजल का काम
वरीघाट का जलस्तर कम होने से यहां बने इंटेकवेल में पानी नहीं पहुंच पा रहा था। इसके लिए टीकमगढ़ नगर प्रशासन ने विकल्प के तौर पर वरीघाट में करीब 10 पनडुब्बी डालकर पानी की आपूर्ति कर रहा था। लेकिन अब वरीघाट का जलस्तर बढ़ जाने से इंटेकवेल के जरिए पानी की सप्लाई होगी।
पानी की स्वीकृति में लगे 19 दिन
- 24 मई को टीकमगढ़ कलेक्टर ने ललितपुर डीएम को लिखा पत्र मांगा जामनी बांध से पानी।
- 26 मई को सिंचाई विभाग ने जामनी बांध का क्रस्ट लेविल कम होेने से पानी छोड़ने में जताई असमर्थता।
- 27 मई को टीकमगढ़ कलेक्टर ने जमरार बांध से पानी देने के लिए ललितपुर डीएम को लिखा पत्र।
- 30 मई को टीकमगढ़ नगर प्रशासन की टीम और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने जमरार बांध में देखी पानी की उपलब्धता।
- 31 मई को जमरार बांध से पानी छोड़ने का मामला मुख्य अभियंता स्तर तक पहुंचा।
- 12 जून को एमपी के मुख्यमंत्री ने यूपी के सीएम से पानी छोड़ने की रखी मांग, जिस पर यूपी सीएम ने हरी झंडी दे दी।
जमरार बांध के गेट बुधवार की रात को खोले गए और सुबह छह बजे बंद कर दिए गए। बांध से छोड़ा गया पानी नदी के माध्यम से टीकमगढ़ क्षेत्र के कुंडेश्वर के पास स्थित बरीघाट में पहुंच गया। इससे वरीघाट का जलस्तर बढ़ गया। अब टीकमगढ़ शहर में पेयजल संकट दूर हो जाएगा। - इं. भागीरथ बरुआ, अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड प्रथम