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सीएमओ कार्यालय में डीएम की दस्तक से मचा हड़कंप
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- फोटो : gov office.jpg
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ललितपुर। बुधवार को जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक व प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर कागजात खंगाले। इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में खलबली मच गई। अफसर किस मामले की जांच करने के लिए आए थे, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने चुप्पी साध रखी है।
दोपहर में डीएम अन्नावि दिनेश कुमार, पुलिस अधीक्षक निखिल पाठक व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सीएमओ कार्यालय अचानक पहुंच गए। वहां पर स्टोर में काफी समय तक अफसर जांच-पड़ताल करते रहे। स्टोर से घंटों के बाद डीएम का काफिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में सीएमओ कक्ष पहुंचा। जहां पर भी अधिक समय तक रुक रहे। मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी बचते नजर आए। वहीं कई अधिकारी व कर्मचारी अपनी फाइलों को लेकर आते-जाते रहे, पर किसी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। हालांकि अब तक किसी भी प्रकार की जांच की जानकारी नहीं दी जा रही है।
दो वर्ष पहले भी ऑडिट में पाया था एक करोड़ सत्तासी लाख का गबन
स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से जांच के घेरे में है। कई मामलों में जांचें चल रही है। बीते वर्ष 2018-19 में भी एनएचएम के ऑडिट में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी कर बिना टेंडर प्रक्रिया के अनियमित रूप से भुगतान करना और टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए बिलों को टुकड़ों में बांटना पाया गया था। इसके साथ ही बिना जैम पोर्टल के भी खरीदारी की गई जिसमें पाया गया था कि फार्मों को लाभ पहुंचने के लिए बिना ई-टेंडर के खरीद की गई है। इसके अलावा एक ही फर्म से कई कार्य करना पाया गया था, जो कि संभव नहीं होना पाया गया था। इस पर एनएचएम मिशन निदेशक पंकज कुमार ने एक करोड़ सत्तासी लाख रुपये गबन की गई राशि को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के खतों में जमा कराने व संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। ढाई वर्ष बीतने के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में है।
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वर्ष 2009 -10 में हुई थी नौ लाख की वित्तीय अनियमितता, अब तक नहीं हुई वसूली
स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2009-10 में रोगी कल्याण समिति की जिलाधिकारी ने जांच कराई थी, जिसमें दस लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई थी। इस मामले में सभी छह ब्लाक के अधीक्षकों से दस लाख रुपये की वसूली के आदेश दिए थे, इसमें अंतिम चेतावनी नोटिस दिया गया था।
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दोपहर में डीएम अन्नावि दिनेश कुमार, पुलिस अधीक्षक निखिल पाठक व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सीएमओ कार्यालय अचानक पहुंच गए। वहां पर स्टोर में काफी समय तक अफसर जांच-पड़ताल करते रहे। स्टोर से घंटों के बाद डीएम का काफिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में सीएमओ कक्ष पहुंचा। जहां पर भी अधिक समय तक रुक रहे। मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी बचते नजर आए। वहीं कई अधिकारी व कर्मचारी अपनी फाइलों को लेकर आते-जाते रहे, पर किसी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। हालांकि अब तक किसी भी प्रकार की जांच की जानकारी नहीं दी जा रही है।
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दो वर्ष पहले भी ऑडिट में पाया था एक करोड़ सत्तासी लाख का गबन
स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से जांच के घेरे में है। कई मामलों में जांचें चल रही है। बीते वर्ष 2018-19 में भी एनएचएम के ऑडिट में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी कर बिना टेंडर प्रक्रिया के अनियमित रूप से भुगतान करना और टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए बिलों को टुकड़ों में बांटना पाया गया था। इसके साथ ही बिना जैम पोर्टल के भी खरीदारी की गई जिसमें पाया गया था कि फार्मों को लाभ पहुंचने के लिए बिना ई-टेंडर के खरीद की गई है। इसके अलावा एक ही फर्म से कई कार्य करना पाया गया था, जो कि संभव नहीं होना पाया गया था। इस पर एनएचएम मिशन निदेशक पंकज कुमार ने एक करोड़ सत्तासी लाख रुपये गबन की गई राशि को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के खतों में जमा कराने व संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। ढाई वर्ष बीतने के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में है।
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वर्ष 2009 -10 में हुई थी नौ लाख की वित्तीय अनियमितता, अब तक नहीं हुई वसूली
स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2009-10 में रोगी कल्याण समिति की जिलाधिकारी ने जांच कराई थी, जिसमें दस लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई थी। इस मामले में सभी छह ब्लाक के अधीक्षकों से दस लाख रुपये की वसूली के आदेश दिए थे, इसमें अंतिम चेतावनी नोटिस दिया गया था।