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Lalitpur News: एक साल से बिना स्त्रीरोग विशेषज्ञ के चल रहा जिला महिला चिकित्सालय

Tue, 20 Jun 2023 12:33 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर Updated Tue, 20 Jun 2023 12:33 AM IST
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District Women's Hospital running without gynecologist for one year
तीन पद हैं, तीनों खाली, सिजेरियन प्रसव के लिए बाहर से बुलाना पड़ रहा डॉक्टर
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिला महिला चिकित्सालय पिछले एक साल से स्त्रीरोग विशेषज्ञ के बिना ही चल रहा है। यहां स्त्रीरोग विशेषज्ञ के तीन पद सृजित हैं, लेकिन यह तीनों पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं, कार्यरत डॉक्टरों पर भी बोझ बढ़ता जा रहा है।
अस्पताल में स्थिति यह है कि सिजेरियन प्रसव के लिए अनुबंध के तहत बाहर से डॉक्टर बुलाना पड़ रहा है। ऐसे में आपातकाल की स्थिति में गर्भवती और बीमार महिलाआें को समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है।
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जिला महिला चिकित्सालय को भले की कागजों पर मेडिकल कॉलेज में दर्जा मिल गया हो, लेकिन यहां पर मरीजों को इलाज जिला अस्पताल जैसा भी नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में मात्र तीन एमबीबीएस चिकित्सक ही हैं, जिनके भरोसे अस्पताल चल रहा है। ऐसे में अधिकतर गंभीर मरीजों को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा। हालत ये है कि प्रतिदिन पांच से सात मरीज रेफर किए जा रहे।
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वहीं, अस्पताल में प्रतिदिन 15 से 20 प्रसव हो रहे हैं। प्रसव के दौरान प्रसूता को कोई परेशानी हो जाए तो उसकी सर्जरी बाहर से सर्जन डॉ. राजीव जैन को बुलाकर कराई जाती है। उनका अनुबंध विगत जनवरी माह से 35 सौ रुपये प्रति मरीज के हिसाब से किया गया है। इसका भुगतान अस्पताल द्वारा किया जाता है।

ओपीडी में भी सिर्फ एक डॉक्टर
महिला चिकित्सालय की ओपीडी की हालत यह है कि यहां पर एक ही चिकित्सक रहता है। इस दौरान अगर कोई इमरजेंसी केस आ जाता है, तो उन्हें अपनी सीट छोड़कर मरीज देखने जाना पड़ता है इससे ओपीडी में आए मरीजों को परेशान होना पड़ता है। चिकित्सकों की कमी के चलते दूर-दराज से आने वाली प्रसूताओं का नियमित चेकअप भी प्रभावित होता है। जबकि रोजाना 150 से 170 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं।

जिला पुरुष चिकित्सालय में भी है स्टाफ की कमी
जिला पुरुष चिकित्सालय में नेत्र सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट और जनरल सर्जन का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। वहीं, ईएनटी सर्जन की जिला अस्पताल में तैनाती तो है, लेकिन वह लंबे समय से अनुपस्थित चल रही रही हैं। ईएमओ भी सात के सापेक्ष सिर्फ दो ही सेवा दे रहे हैं।


शासन को कई बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन चिकित्सकों की तैनाती नहीं की गई है। मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने से अब चिकित्सकों के आने संभावना बढ़ गई है।-डॉ. मीनाक्षी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक महिला अस्पताल।
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