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डीजल महंगा होने से किसानों की होगी ज्यादा जेब ढीली
lalitpur
Updated Sun, 21 Oct 2018 02:16 AM IST
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- फोटो : demo
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खरीफ फसल की उपज से चोट खाया किसान अब अपनी जेब पर मरहम लगाने के लिए रबी सीजन की बुवाई की तैयारी में जुट गया है। लेकिन, अबकी बार डीजल के लगातार बढ़ते दामों से पानी की कीमत भी बढ़ गयी है। इस बार किसानों को सिंचाई के लिए 200 से 250 रुपये का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। ट्रैक्टर चालक भी अपनी सेवाओं की कीमतें बढ़ा चुके हैं।
पाली और उसके ग्रामीण अंचलों में पानी के ऐसे कोई श्रोत नहीं है, जिनसे किसान सिंचाई कर सके। गरीब छोटे किसान तो मोल पानी खरीदकर ही अपनी फसल को आगे बढ़ाते है। पाली की पुलघाट नदी, उससे जुड़ी घुनसी नदी की धार अभी से विलुप्त हो गयी है। इन पर बने चैकडेम की हालत ऐसी रही कि बरसात में भी अपना सिर नहीं ढक सके, इसके अलावा जो अन्य चैकडेम हैं उनमें थोड़ा बहुत पानी है। बालाबेहट के पास से निकलने वाली सौर नदी, पीरघाट नदी मध्यप्रदेश के गांवों के किसानों को लाभ देती है, जिससे इस पठारी बालाबेहट क्षेत्र इलाके में पानी को लेकर किसानों के बीच हाहाकार मचा रहता है। जलस्तर दो सौ से चार सौ फीट की गहराई से तक बना रहता है। ऐसे में जिन किसानों के पास सिंचाई करने के लिए निजी साधन है वह तो समय से खेतों में खड़ी फसलों की सिंचाई कर लेते है, तो कई मोल पानी भी बेचना भी शुरू कर देते हैं। एक किसान ने बताया कि डीजल के बेहताशा बढ़ती कीमतों के चलते वाहन मालिकों ने भी किराया बढ़ा दिया। एक घंटे तक सिंचाई के लिए इंजन/जनरेटर डेढ़ से दो लीटर डीजल खाता है। फिर उसमें ऑयल, मशीन और पाइप वोलों का पिसना। खर्च ज्यादा आ रहा है इसलिए पानी की कीमतें भी मजबूरन 200 से 250 रुपये तक जाएंगी। कीमतों को देख छोटे खेती वाले गरीब किसान बड़े परेशान हैं। इंजन जनरेटरों की अपेक्षा बिजली चलित नलकूपों से सस्ता पानी मिल जाता है, लेकिन पाली पॉवर हाउस से जुड़े क्षेत्र में महज 750 नलकूप कनेक्शन ही हैं, लेकिन सभी किसानों के पास सिंचाई साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें पानी मोल ही लेना पड़ेगा।
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पाली और उसके ग्रामीण अंचलों में पानी के ऐसे कोई श्रोत नहीं है, जिनसे किसान सिंचाई कर सके। गरीब छोटे किसान तो मोल पानी खरीदकर ही अपनी फसल को आगे बढ़ाते है। पाली की पुलघाट नदी, उससे जुड़ी घुनसी नदी की धार अभी से विलुप्त हो गयी है। इन पर बने चैकडेम की हालत ऐसी रही कि बरसात में भी अपना सिर नहीं ढक सके, इसके अलावा जो अन्य चैकडेम हैं उनमें थोड़ा बहुत पानी है। बालाबेहट के पास से निकलने वाली सौर नदी, पीरघाट नदी मध्यप्रदेश के गांवों के किसानों को लाभ देती है, जिससे इस पठारी बालाबेहट क्षेत्र इलाके में पानी को लेकर किसानों के बीच हाहाकार मचा रहता है। जलस्तर दो सौ से चार सौ फीट की गहराई से तक बना रहता है। ऐसे में जिन किसानों के पास सिंचाई करने के लिए निजी साधन है वह तो समय से खेतों में खड़ी फसलों की सिंचाई कर लेते है, तो कई मोल पानी भी बेचना भी शुरू कर देते हैं। एक किसान ने बताया कि डीजल के बेहताशा बढ़ती कीमतों के चलते वाहन मालिकों ने भी किराया बढ़ा दिया। एक घंटे तक सिंचाई के लिए इंजन/जनरेटर डेढ़ से दो लीटर डीजल खाता है। फिर उसमें ऑयल, मशीन और पाइप वोलों का पिसना। खर्च ज्यादा आ रहा है इसलिए पानी की कीमतें भी मजबूरन 200 से 250 रुपये तक जाएंगी। कीमतों को देख छोटे खेती वाले गरीब किसान बड़े परेशान हैं। इंजन जनरेटरों की अपेक्षा बिजली चलित नलकूपों से सस्ता पानी मिल जाता है, लेकिन पाली पॉवर हाउस से जुड़े क्षेत्र में महज 750 नलकूप कनेक्शन ही हैं, लेकिन सभी किसानों के पास सिंचाई साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें पानी मोल ही लेना पड़ेगा।
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