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Lalitpur News: गुरबानी कीर्तन सुन निहाल हुए भक्त

Tue, 07 Jan 2025 12:28 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2025 12:28 AM IST
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Devotees were delighted to hear Gurbani Kirtan.
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। सिखों के दसवें गुरु श्रीगुरु गोविंद सिंह महाराज का प्रकाश पर्व श्रीगुरु सिंह सभा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्वावधान में श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। लक्ष्मीपुरा स्थित गुरुद्वारा साहिब में अखंड पाठ एवं गुरबानी कीर्तन और लंगर का आयोजन किया गया।
मोहल्ला लक्ष्मीपुरा स्थित गुरुद्वारा साहिब में अखंड पाठ की समाप्ति सरदार अवतार सिंह व मनमोहन सिंह मोनी के परिवार की ओर से हुई। निशान साहिब के चोले की सेवा सरदार कृपाल सिंह परमार व मनमोहन सिंह मोनी परिवार की ओर से, लंगर की सेवा भी मनमोहन सिंह मोनी परिवार की ओर से हुई। रात में रहिरास साहिब के पाठ के उपरांत गुरबानी कीर्तन लंगर व दूध की सेवा हुई और भव्य आतिशबाजी का प्रदर्शन किया गया।
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दिल्ली से पधारे ज्ञानी करमजीत सिंह ने अपने जत्थे के साथ गुरबानी कीर्तन कर संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें गुरु हैं। उन्हीं के वचनों के अनुसार गुरुजी का नाम गोविंद राय रखा गया और सन् 1699 को बैसाखी वाले दिन गुरुजी पंज प्यारों से अमृत छक कर गोविंद राय से गुरु गोविंद सिंह जी बन गए। उनके बचपन के पांच साल पटना में ही गुजरे।
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अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा ने कहा कि 1675 को कश्मीरी पंडितों की फरियाद सुनकर गुरु तेगबहादुर ने दिल्ली के चांदनी चौक में बलिदान दिया। गुरु गोविंद सिंह 11 नवंबर 1675 को गुरु गद्दी पर विराजमान हुए। धर्म एवं समाज की रक्षा के लिए गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 ई. में खालसा पंथ की स्थापना की। पांच प्यारे बनाकर उन्हें गुरु का दर्जा देकर स्वयं उनके शिष्य बन जाते हैं और कहते हैं-जहां पांच सिख इकट्ठे होंगे, वहीं वह भी निवास करेंगे।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह की पत्नियां, माता जीतो, माता सुंदरी और माता साहिब कौर थीं। बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह बड़े साहिबजादे थे, जिन्होंने चमकौर के युद्ध में शहादत प्राप्त की थी। कोषाध्यक्ष परमजीत सिंह छतवाल ने कहा कि दमदमा साहिब में आपने अपनी याद शक्ति और ब्रह्मबल से गुरुग्रंथ साहिब का उच्चारण किया और लिखारी (लेखक) भाई मनी सिंह जी ने गुरबानी को लिखा।

महामंत्री सुरजीत सिंह सलूजा ने कहा कि धर्म, संस्कृति और देश की आन-बान के लिए पूरा परिवार कुर्बान करके नांदेड़ में अबचल नगर (हुजूर साहिब) में गुरुग्रंथ साहिब को गुरु का दर्जा देते हुए और इसका श्रेय भी प्रभु को देते हुए कहते हैं ‘आज्ञा भई अकाल की तभी चलाइयो पंथ, सब सिक्खन को हुक्म है गुरु मान्यो ग्रंथ’। इस दौरान गुरु सिंह सभा के मंत्री चरणजीत सिंह, उपाध्यक्ष डॉक्टर सुरेंद्र कौर वालिया, परसन सिंह परमार, गुरचरण सिंह सलूजा, हरजीत सिंह, मेजर सिंह, गुरमुख सिंह, डॉक्टर हरजीत कौर, मनजीत कौर आदि मौजूद रहे।
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