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दुकानों पर खर्च किए करोड़ों, कमाया एक रुपया नहीं
lalitpur
Updated Fri, 30 Dec 2016 01:12 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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आर्थिक तंगी से जूझ रही नगर पालिका विकास कार्यों के नाम पर शासन से लगातार बजट की मांग कर रही है, लेकिन करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई दुकानें सालों से खाली पड़ी हैं। इस कारण हर वर्ष नगर पालिका को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। लंबित पड़ी स्वकर प्रणाली लागू करने, फुटपाथी व्यापारियों, फेरी लगाने वाले व्यापारियों, मेडिकल सेंटरों के लाइसेंस जारी करने और शहर में होर्डिंगों से वसूली कर पालिका आय बढ़ा सकती है, लेकिन इस ओर भी गौर नहीं किया जा रहा है।
नगर पालिका की ऐसी कई दुकानें हैं, जो करोड़ों रुपये की लागत से बना तो दी गई हैं, पर पिछले चार-छह सालों से खाली पड़ी हुई है। गेंदालाल पेट्रोल पंप के पास बने पुरुषोत्तम दास टंडन कॉमर्शियल कांपलेक्स का निर्माण करीब पांच वर्ष पूर्व पिछली बोर्ड के दौरान करीब 1.18 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। इस कांपलेक्स के प्रथम तल निर्मित 10 दुकानों को नगर पालिका अभी तक नीलाम नहीं कर पाया है। इससे विभाग को करीब 50 लाख रुपये प्रीमियम राशि का और इन दुकानों से हर साल दो लाख रुपये किराए का विभाग को नुकसान हो रहा है।
इसी तरह नगर पालिका कार्यालय के भवन डा. शादीलाल कांपलेक्स के प्रथम तल पर भी नगर पालिका की 13 दुकानें नीलामी के लिए शेष हैं। यह भवन बीच शहर में और मुख्य मार्ग के किनारे हैं, इसलिए इन दुकानों की खुली नीलामी से नगर पालिका को एक करोड़ रुपये से अधिक प्रीमियम राशि और हर साल करीब साढ़े तीन लाख रुपये किराया मिलेगा। इसी तरह सुपर मार्केट के पास बने मां कर्माबाई कांपलेक्स में चार दुकानें नीलामी के लिए शेष हैं, जिनसें करीब 50 लाख रुपये प्रीमियम और करीब लाख रुपये तक किराया की बसूली होगी। नगर पालिका के नझाई बाजार में स्थित डा. भीमराव कांपलेक्स में भी एक दुकान नीलामी के लिए शेष है। लेकिन नगर पालिका इन दुकानों की नीलामी में कोई रुचि नहीं ले रहा है। फरवरी माह में नगर पालिका इन दुकानों की नीलामी में दिलचस्पी दिखाई थी, जो किन्हीं कारणों से नहीं हो सकी। लेकिन इसके बाद लगभग पूरा साल बीत गया है। विभाग ने दुकानों की नीलामी के लिए दोबारा प्रयास नहीं किया है। इसी तरह नगर पालिका की जो दुकानें पूर्व में नीलाम भी हो चुकी है, उनमें अभी लाखों रुपये प्रीमियम राशि विभाग नहीं वसूल पाया है। इससे विभाग को लाखों रुपये राजस्व की हानि हो रही है।
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योजनाएं लागू न होने से करोड़ों की वसूली बाधित
शासन के निर्देशानुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 से गृहकर की वसूली स्वकर प्रणाली के आधार पर की जानी थी। स्वकर प्रणाली लागू करने के लिए नगर पालिका ने एक वर्ष पूर्व 75 लाख रुपये में एक निजी कंपनी को स्वकर सर्वे करना ठेका दिया था। एक वर्ष बीत गया है, लेकिन अभी तक सर्वे का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। स्वकर प्रणाली लागू होने से नगर पालिका की वार्षिक गृहकर वसूली में दो-ढाई करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो जाएगी। स्वकर प्रणाली के आधार पर गृहकर कर की वसूली वर्ष 2014 से की जानी है, वसूली होने पर नगर पालिका को हर साल करोड़ों रुपये राजस्व की वसूली होगी।
इसके अलावा नगर पालिका अभी तक शहर के फुटपाथ पर व्यापार करने वालों और फेरी लगाकर व्यापार करने वालों की सूची तैयार कर लाइसेंस भी जारी नहीं कर सकी है। इस कारण नगर पालिका हर वर्ष लाखों रुपये राजस्व की छति हो रही है। वहीं, शहर में संचालित निजी अस्पतालों, क्लीनिक, नर्सिंग होम, एक्स-रे सेंटर, पैथोलॉजी आदि मेडिकल सेंटरों को नगर पालिका लाइसेंस जारी करके उनसे शुल्क की वसूली करना है। डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अभी तक मेडिकल सेंटरों के लाइसेंस जारी नहीं कर पाई है। इसके अलावा शहर में अवैध होर्डिंगों की भरमार है, विज्ञापन व होर्डिंग ऐजेंसियों ने बिना नगर पालिका की अनुमति के और बिना कोई टैक्स जमा किए मनमर्जी के होर्डिंग लगा लिए हैं।
पूर्व में दुकानों की नीलामी की गई है, लेकिन विभिन्न कारणों के चलते नीलामी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है। अब जल्द ही दोबारा से खुली नीलामी बैठक आयोजित करके, अवशेष दुकानों की नीलामी की जाएगी।
राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।
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नगर पालिका की ऐसी कई दुकानें हैं, जो करोड़ों रुपये की लागत से बना तो दी गई हैं, पर पिछले चार-छह सालों से खाली पड़ी हुई है। गेंदालाल पेट्रोल पंप के पास बने पुरुषोत्तम दास टंडन कॉमर्शियल कांपलेक्स का निर्माण करीब पांच वर्ष पूर्व पिछली बोर्ड के दौरान करीब 1.18 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। इस कांपलेक्स के प्रथम तल निर्मित 10 दुकानों को नगर पालिका अभी तक नीलाम नहीं कर पाया है। इससे विभाग को करीब 50 लाख रुपये प्रीमियम राशि का और इन दुकानों से हर साल दो लाख रुपये किराए का विभाग को नुकसान हो रहा है।
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इसी तरह नगर पालिका कार्यालय के भवन डा. शादीलाल कांपलेक्स के प्रथम तल पर भी नगर पालिका की 13 दुकानें नीलामी के लिए शेष हैं। यह भवन बीच शहर में और मुख्य मार्ग के किनारे हैं, इसलिए इन दुकानों की खुली नीलामी से नगर पालिका को एक करोड़ रुपये से अधिक प्रीमियम राशि और हर साल करीब साढ़े तीन लाख रुपये किराया मिलेगा। इसी तरह सुपर मार्केट के पास बने मां कर्माबाई कांपलेक्स में चार दुकानें नीलामी के लिए शेष हैं, जिनसें करीब 50 लाख रुपये प्रीमियम और करीब लाख रुपये तक किराया की बसूली होगी। नगर पालिका के नझाई बाजार में स्थित डा. भीमराव कांपलेक्स में भी एक दुकान नीलामी के लिए शेष है। लेकिन नगर पालिका इन दुकानों की नीलामी में कोई रुचि नहीं ले रहा है। फरवरी माह में नगर पालिका इन दुकानों की नीलामी में दिलचस्पी दिखाई थी, जो किन्हीं कारणों से नहीं हो सकी। लेकिन इसके बाद लगभग पूरा साल बीत गया है। विभाग ने दुकानों की नीलामी के लिए दोबारा प्रयास नहीं किया है। इसी तरह नगर पालिका की जो दुकानें पूर्व में नीलाम भी हो चुकी है, उनमें अभी लाखों रुपये प्रीमियम राशि विभाग नहीं वसूल पाया है। इससे विभाग को लाखों रुपये राजस्व की हानि हो रही है।
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योजनाएं लागू न होने से करोड़ों की वसूली बाधित
शासन के निर्देशानुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 से गृहकर की वसूली स्वकर प्रणाली के आधार पर की जानी थी। स्वकर प्रणाली लागू करने के लिए नगर पालिका ने एक वर्ष पूर्व 75 लाख रुपये में एक निजी कंपनी को स्वकर सर्वे करना ठेका दिया था। एक वर्ष बीत गया है, लेकिन अभी तक सर्वे का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। स्वकर प्रणाली लागू होने से नगर पालिका की वार्षिक गृहकर वसूली में दो-ढाई करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो जाएगी। स्वकर प्रणाली के आधार पर गृहकर कर की वसूली वर्ष 2014 से की जानी है, वसूली होने पर नगर पालिका को हर साल करोड़ों रुपये राजस्व की वसूली होगी।
इसके अलावा नगर पालिका अभी तक शहर के फुटपाथ पर व्यापार करने वालों और फेरी लगाकर व्यापार करने वालों की सूची तैयार कर लाइसेंस भी जारी नहीं कर सकी है। इस कारण नगर पालिका हर वर्ष लाखों रुपये राजस्व की छति हो रही है। वहीं, शहर में संचालित निजी अस्पतालों, क्लीनिक, नर्सिंग होम, एक्स-रे सेंटर, पैथोलॉजी आदि मेडिकल सेंटरों को नगर पालिका लाइसेंस जारी करके उनसे शुल्क की वसूली करना है। डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अभी तक मेडिकल सेंटरों के लाइसेंस जारी नहीं कर पाई है। इसके अलावा शहर में अवैध होर्डिंगों की भरमार है, विज्ञापन व होर्डिंग ऐजेंसियों ने बिना नगर पालिका की अनुमति के और बिना कोई टैक्स जमा किए मनमर्जी के होर्डिंग लगा लिए हैं।
पूर्व में दुकानों की नीलामी की गई है, लेकिन विभिन्न कारणों के चलते नीलामी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है। अब जल्द ही दोबारा से खुली नीलामी बैठक आयोजित करके, अवशेष दुकानों की नीलामी की जाएगी।
राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।