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Lalitpur News: 2.87 करोड़ रुपये करकरावल में खर्च होने के बाद नहीं मिल रही पर्यटन सुविधाएं
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- शासन ने कैंटीन संचालन के लिए बार फिर शुरू की निविदा प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बेतवा नदी पर ग्राम बादरौन के पास करकरावल जलप्रपात पर हाल ही में पर्यटन विकास योजना के तहत 2.87 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। लेकिन वहां पर कैंटीन संचालन व अन्य ठेकों के लिए कोई एजेंसी आगे नहीं आई है। ऐसे में वहां पर लोगों को खासी परेशानी हो रही है।
विकासखंड जखौरा अंतर्गत ग्राम बादरौन के समीप स्थित बेतवा नदी का जलप्रपात है, जहां पर बेतवा नदी का पानी ऊंची चट्टानों से गिरकर नीचे गिरता है, जिससे करकल ध्वनि होती है। इस स्थान को करकरावल के नाम से जाना जाता है। इसे ईको टूरिज्म में पर्यटन विभाग ने चिह्नित किया था, जिसके तहत यहां पर विकास कार्य कराए गए। यहां पर शासन ने पर्यटन विकास के लिए 2.87 करोड़ रुपये निर्गत किए थे। इस धनराशि से यहां पर कैंटीन निर्माण कराया, साथ ही पर्यटकों को बैठने के लिए झोपड़ी व सीमेंट कुर्सियां निर्मित कराई गईं। इसके साथ ही यहां पर वॉच टॉवर का निर्माण कराया गया। वर्तमान में पर्यटन विभाग ने यहां पर कैंटीन संचालन के लिए टेंडर आमंत्रित किए, लेकिन किसी भी ठेकेदार ने रूचि नहीं दिखाई है। अब पर्यटन विभाग ने एक बार फिर कैंटीन संचालन के लिए टेंडर जारी किए हैं।
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पहुंच मार्ग सुगम न होने से पर्यटक नहीं पहुंच पा रहे आसानी से
करकरावल तक पहुंचने के लिए वन मार्ग से जाना होता है, जो काफी खराब है। हालांकि पर्यटन विभाग ने इस मार्ग को दुरुस्त कराने के लिए धनराशि भी आवंटन की थी। लेकिन पर्यावरण विभाग की अनुमति न मिलने के कारण यहां पर कोई भी विकास कार्य नहीं हो पाया है।
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यहां पर पर्यटन विकास कार्य पूर्ण हो चुका है, शासन स्तर से एक बार फिर कैंटीन संचालन के निविदा प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।
हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बेतवा नदी पर ग्राम बादरौन के पास करकरावल जलप्रपात पर हाल ही में पर्यटन विकास योजना के तहत 2.87 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। लेकिन वहां पर कैंटीन संचालन व अन्य ठेकों के लिए कोई एजेंसी आगे नहीं आई है। ऐसे में वहां पर लोगों को खासी परेशानी हो रही है।
विकासखंड जखौरा अंतर्गत ग्राम बादरौन के समीप स्थित बेतवा नदी का जलप्रपात है, जहां पर बेतवा नदी का पानी ऊंची चट्टानों से गिरकर नीचे गिरता है, जिससे करकल ध्वनि होती है। इस स्थान को करकरावल के नाम से जाना जाता है। इसे ईको टूरिज्म में पर्यटन विभाग ने चिह्नित किया था, जिसके तहत यहां पर विकास कार्य कराए गए। यहां पर शासन ने पर्यटन विकास के लिए 2.87 करोड़ रुपये निर्गत किए थे। इस धनराशि से यहां पर कैंटीन निर्माण कराया, साथ ही पर्यटकों को बैठने के लिए झोपड़ी व सीमेंट कुर्सियां निर्मित कराई गईं। इसके साथ ही यहां पर वॉच टॉवर का निर्माण कराया गया। वर्तमान में पर्यटन विभाग ने यहां पर कैंटीन संचालन के लिए टेंडर आमंत्रित किए, लेकिन किसी भी ठेकेदार ने रूचि नहीं दिखाई है। अब पर्यटन विभाग ने एक बार फिर कैंटीन संचालन के लिए टेंडर जारी किए हैं।
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पहुंच मार्ग सुगम न होने से पर्यटक नहीं पहुंच पा रहे आसानी से
करकरावल तक पहुंचने के लिए वन मार्ग से जाना होता है, जो काफी खराब है। हालांकि पर्यटन विभाग ने इस मार्ग को दुरुस्त कराने के लिए धनराशि भी आवंटन की थी। लेकिन पर्यावरण विभाग की अनुमति न मिलने के कारण यहां पर कोई भी विकास कार्य नहीं हो पाया है।
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यहां पर पर्यटन विकास कार्य पूर्ण हो चुका है, शासन स्तर से एक बार फिर कैंटीन संचालन के निविदा प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।
हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी