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जमीन में घट गई उर्वरा शक्ति
Lalitpur
Updated Mon, 20 Jun 2016 01:02 AM IST
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जमीन में घट गई उर्वरा शक्ति
- फोटो : demo
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ललितपुर। अंधाधुंध रासायनिक खाद का प्रयोग खेती योग्य जमीन को बंजर बना रहा है। ब्लाक जखौरा और ब्लाक बिरधा की मिट्टी के परीक्षण के दौरान पाया गया कि साल दर साल पैदावार गिरती जा रही है। इसकी वजह जमीन में मौजूद बोरान, सल्फर और पोटाश की मात्रा की कमी होना है।
एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने को प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विज्ञान कार्यक्रम के समन्वयक डा. एके सिंह ने बताया कि जिले के ब्लॉक जखौरा व बिरधा के अंतर्गत आने वाले ग्राम बंट, सिमरधा, जखौरा, बिरधा, पिपरई, खाइखेड़ा, चीराकोडऱ, मैकुआं, पटौरा, पटौराकलां, पटौरा खुर्द, महेशपुरा, पिपरिया, बारौद समेत करीब साठ गांव में मिट्टी की जांच की गई। जांच में बोरान, सल्फर व पोटाश की मात्रा कम निकल रही है, जबकि नाइट्रोजन और फास्फोरस अधिक पाया जा रहा है। इस वजह से खेतों की मिट्टी हार्ड और ऊसर होती जा रही है। बोरान और सल्फर कम होने से फसल की पैदावार पर असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि नए तरीके से खेती करने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है। यह उत्पाद मिट्टी का पीएचमान बढ़ा देता है, जिससे फसल उत्पादन अधिक और मृदा भी दूषित होने से बच जाती है। इस दौरान सोयाबीन और उर्द की फसल के साथ उगने वाले खरपतवारों की समस्या का समाधान भी सुझाया।
इस मौके पर मनोज दुबे ने बताया कि विलोवुड क्रॉप साइंस द्वारा जिले के अलावा झांसी, मऊरानीपुर व बेलाताल में करीब ढाई सौ मृदा परीक्षण किए गए हैं। उनकी 51 मृदा परीक्षण वैन किसानों के हित में काम कर रही हैं।
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एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने को प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विज्ञान कार्यक्रम के समन्वयक डा. एके सिंह ने बताया कि जिले के ब्लॉक जखौरा व बिरधा के अंतर्गत आने वाले ग्राम बंट, सिमरधा, जखौरा, बिरधा, पिपरई, खाइखेड़ा, चीराकोडऱ, मैकुआं, पटौरा, पटौराकलां, पटौरा खुर्द, महेशपुरा, पिपरिया, बारौद समेत करीब साठ गांव में मिट्टी की जांच की गई। जांच में बोरान, सल्फर व पोटाश की मात्रा कम निकल रही है, जबकि नाइट्रोजन और फास्फोरस अधिक पाया जा रहा है। इस वजह से खेतों की मिट्टी हार्ड और ऊसर होती जा रही है। बोरान और सल्फर कम होने से फसल की पैदावार पर असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि नए तरीके से खेती करने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है। यह उत्पाद मिट्टी का पीएचमान बढ़ा देता है, जिससे फसल उत्पादन अधिक और मृदा भी दूषित होने से बच जाती है। इस दौरान सोयाबीन और उर्द की फसल के साथ उगने वाले खरपतवारों की समस्या का समाधान भी सुझाया।
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इस मौके पर मनोज दुबे ने बताया कि विलोवुड क्रॉप साइंस द्वारा जिले के अलावा झांसी, मऊरानीपुर व बेलाताल में करीब ढाई सौ मृदा परीक्षण किए गए हैं। उनकी 51 मृदा परीक्षण वैन किसानों के हित में काम कर रही हैं।
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