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Lalitpur News: खरीफ की फसल का बीज खराब होने से दलहन के व्यापार में पड़ेगा फर्क
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- लगातार बारिश के कारण कम हो पाई बोआई, खेतों में पानी भरने से हुआ बीज नष्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। खरीफ की फसल का बीज नष्ट हो गया है, जिससे सबसे ज्यादा फर्क दलहन के व्यापार को पड़ने के आसार नजर आ रहे हैं। क्योंकि जिले की उड़द देश के कई प्रांतों में भेजी जाती है।
जिले में दलहनी फसलों में मूंग, उड़द, मसूर व चना का उत्पादन होता है। दलहनी फसलों की दाल बनाने के लिए जिले में 15 से अधिक मिल का संचालन हो रहा है। इन मिलों से तैयार दाल दिल्ली, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात के अलावा तमिलनाडु तक जाती है। सबसे ज्यादा जनपद में उड़द का उत्पादन होता है, जो कई प्रांतों में पसंद की जाती है। यहां पर दलहनी फसलों का उत्पादन काफी अच्छा होता है। खरीफ की फसल में तो जिले के 2.34 लाख हेक्टेयर भूमि पर उड़द की फसल बोई जाती है। जिले में प्रतिवर्ष करीब 1.76 लाख मीट्रिक टन उड़द की पैदावार होती है, तो वहीं साथ ही 1300 मीट्रिक टन मूंग की पैदावार है। यहां की दालों की विशेष डिमांड तमिलनाडु, बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक में होती है। लेकिन अतिवृष्टि के कारण जिले में करीब 60 से 70 प्रतिशत खेतों में बोआई हो पाई है, जहां पर बोआई हुई है, वहां पर बारिश के कारण बीज नष्ट हो गया है। इसका सीधा असर जिले के दाल के व्यापार पर पड़ने की संभावना है।
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फोटो- 27
जिले में बारिश के कारण आगामी सीजन में दालों का व्यापार प्रभावित होगा। क्योंकि यहां से कई प्रांतों में दाल को भेजा जाता है। प्रमुख रूप से उड़द की दाल कई प्रांतों में भेजी जाती है।
अशोक जैन अनौरा, व्यवसायी।
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फोटो- 29
अतिवृष्टि के कारण खरीफ की फसल प्रभावित हुई है, इससे दालों के व्यापार पर खासा असर पड़ेगा। क्योंकि जिले की उड़द दाल की कई जनपदों में विशेष मांग होती है।
संजीव जैन कप्तान, व्यवसायी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। खरीफ की फसल का बीज नष्ट हो गया है, जिससे सबसे ज्यादा फर्क दलहन के व्यापार को पड़ने के आसार नजर आ रहे हैं। क्योंकि जिले की उड़द देश के कई प्रांतों में भेजी जाती है।
जिले में दलहनी फसलों में मूंग, उड़द, मसूर व चना का उत्पादन होता है। दलहनी फसलों की दाल बनाने के लिए जिले में 15 से अधिक मिल का संचालन हो रहा है। इन मिलों से तैयार दाल दिल्ली, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात के अलावा तमिलनाडु तक जाती है। सबसे ज्यादा जनपद में उड़द का उत्पादन होता है, जो कई प्रांतों में पसंद की जाती है। यहां पर दलहनी फसलों का उत्पादन काफी अच्छा होता है। खरीफ की फसल में तो जिले के 2.34 लाख हेक्टेयर भूमि पर उड़द की फसल बोई जाती है। जिले में प्रतिवर्ष करीब 1.76 लाख मीट्रिक टन उड़द की पैदावार होती है, तो वहीं साथ ही 1300 मीट्रिक टन मूंग की पैदावार है। यहां की दालों की विशेष डिमांड तमिलनाडु, बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक में होती है। लेकिन अतिवृष्टि के कारण जिले में करीब 60 से 70 प्रतिशत खेतों में बोआई हो पाई है, जहां पर बोआई हुई है, वहां पर बारिश के कारण बीज नष्ट हो गया है। इसका सीधा असर जिले के दाल के व्यापार पर पड़ने की संभावना है।
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जिले में बारिश के कारण आगामी सीजन में दालों का व्यापार प्रभावित होगा। क्योंकि यहां से कई प्रांतों में दाल को भेजा जाता है। प्रमुख रूप से उड़द की दाल कई प्रांतों में भेजी जाती है।
अशोक जैन अनौरा, व्यवसायी।
फोटो- 29
अतिवृष्टि के कारण खरीफ की फसल प्रभावित हुई है, इससे दालों के व्यापार पर खासा असर पड़ेगा। क्योंकि जिले की उड़द दाल की कई जनपदों में विशेष मांग होती है।
संजीव जैन कप्तान, व्यवसायी।