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कांजी हाउस के निर्माण को काट दिए हरे पेड़
lalitpur
Updated Mon, 01 May 2017 01:12 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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मुहल्ला खिरकापुरा स्थित मुक्ति धाम में चल रहे निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए हरे पेड़ों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। श्मशान घाट में खड़े हरे पेड़ों पर जेसीबी व कुल्हाड़ी चला दी गई है। इससे श्मशान स्थल का प्राकृतिक सौंदर्य गुम सा हो गया है।
नगर पालिका परिषद ने आवारा जानवरों की आवाजाही पर अंकुश लगाने के मकसद से कान्हा आश्रय योजना के अंतर्गत कांजी हाउस का निर्माण करा रही है। इसके लिए स्थल का चयन खिरकापुरा स्थित श्मशानघाट पर किया गया है। तत्कालीन नपाध्यक्ष रमेश खटीक ने नगर के श्मशानघाट का सौदर्यीकरण कराया था। इसमें से एक खिरकापुरा स्थित मुक्तिधाम शामिल है। वर्तमान में श्मशान घाट करीब पांच एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इसमें से तीन एकड़ से ज्यादा भूमि को कांजी हाउस के लिए ले लिया गया है। इससे यहां खड़े हरे पेड़ों पर जेसीबी व कुल्हाड़ी चला दी गई है। सूचना पाकर डीएफओ वीके जैन ने वन दरोगा कमलापत त्रिपाठी को मौके पर भेजा। उन्होंने कटे व उखड़े पेड़ पास के ही एक व्यक्ति के सुपुर्द कर दिए हैं। वहीं, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार को इसकी सूचना दे दी गई है। डीएफओ वीके जैन का कहना है कि मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। अब ठेकेदार से शमन शुल्क वसूला जाएगा। उधर, वन दारोगा कमलापत त्रिपाठी का कहना है कि तीन पेड़ शीशम एवं एक पेड़ चिरोल व एक नीम का है।
यह है योजना
कांजी हाउस के निर्माण के दौरान शमशानघाट का पृथक से गेट बनाया जाएगा। इसके अलावा एक टीनशेड कांजी हाउस के दायरे में आ रहा है। इस स्थिति में एक ही टीनशेड अंतिम संस्कार के लिए रह जाएगा।
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बाढ़ की चपेट में आ सकता कांजी हाउस
गोविंद सागर बांध में स्वचालित साइफन की व्यवस्था है। जब कभी बांध के साइफन चलते हैं तो इसका पानी ब्याने नाले से होकर श्मशान घाट में पहुंच जाता है। यदि ऐसा कभी हुआ तो कांजी हाउस के डूबने की स्थिति बन जाएगी।
एक और बनेगा टीनशेड
श्मशान घाट के खाली क्षेत्र को कांजी हाउस के लिए चिह्नित किया गया है। एक अन्य टीनशेड बनवाने के लिए स्थल का चिह्नींकरण कर लिया गया है।
सुभाष जायसवाल
अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद ललितपुर।
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नगर पालिका परिषद ने आवारा जानवरों की आवाजाही पर अंकुश लगाने के मकसद से कान्हा आश्रय योजना के अंतर्गत कांजी हाउस का निर्माण करा रही है। इसके लिए स्थल का चयन खिरकापुरा स्थित श्मशानघाट पर किया गया है। तत्कालीन नपाध्यक्ष रमेश खटीक ने नगर के श्मशानघाट का सौदर्यीकरण कराया था। इसमें से एक खिरकापुरा स्थित मुक्तिधाम शामिल है। वर्तमान में श्मशान घाट करीब पांच एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इसमें से तीन एकड़ से ज्यादा भूमि को कांजी हाउस के लिए ले लिया गया है। इससे यहां खड़े हरे पेड़ों पर जेसीबी व कुल्हाड़ी चला दी गई है। सूचना पाकर डीएफओ वीके जैन ने वन दरोगा कमलापत त्रिपाठी को मौके पर भेजा। उन्होंने कटे व उखड़े पेड़ पास के ही एक व्यक्ति के सुपुर्द कर दिए हैं। वहीं, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार को इसकी सूचना दे दी गई है। डीएफओ वीके जैन का कहना है कि मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। अब ठेकेदार से शमन शुल्क वसूला जाएगा। उधर, वन दारोगा कमलापत त्रिपाठी का कहना है कि तीन पेड़ शीशम एवं एक पेड़ चिरोल व एक नीम का है।
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यह है योजना
कांजी हाउस के निर्माण के दौरान शमशानघाट का पृथक से गेट बनाया जाएगा। इसके अलावा एक टीनशेड कांजी हाउस के दायरे में आ रहा है। इस स्थिति में एक ही टीनशेड अंतिम संस्कार के लिए रह जाएगा।
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बाढ़ की चपेट में आ सकता कांजी हाउस
गोविंद सागर बांध में स्वचालित साइफन की व्यवस्था है। जब कभी बांध के साइफन चलते हैं तो इसका पानी ब्याने नाले से होकर श्मशान घाट में पहुंच जाता है। यदि ऐसा कभी हुआ तो कांजी हाउस के डूबने की स्थिति बन जाएगी।
एक और बनेगा टीनशेड
श्मशान घाट के खाली क्षेत्र को कांजी हाउस के लिए चिह्नित किया गया है। एक अन्य टीनशेड बनवाने के लिए स्थल का चिह्नींकरण कर लिया गया है।
सुभाष जायसवाल
अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद ललितपुर।