{"_id":"58e7b00dbebfab5515f796da7fa85666","slug":"crop-drying-unhappy-farmer-suicides-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फसल सूखने से दुखी किसान ने की आत्महत्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फसल सूखने से दुखी किसान ने की आत्महत्या
ललितपुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2015 10:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महरौनी /सिलावन (ललितपुर)। ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के बाद सूखा जिले के किसानों पर कहर बनकर टूट रहा है। महरौनी तहसील के गुंदरापुर गांव में उड़द की फसल सूखने से दुखी एक किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। किसान पर बैंक और साहूकारों का भी कर्ज था।
ग्राम गुंदरापुर निवासी रामप्रसाद पुत्र कनई कुशवाहा (40 वर्ष) ने बैंक और साहूकारों से कर्जा लेकर 12 एकड़ खेत में उर्द की फसल बोयी थी। सोमवार की सुबह वह फसल देखने के लिए खेत पर गया, वहां से लौटने के बाद उसने पत्नी एवं बच्चों से खेत में सूख रही फसल के बारे में चरचा की। इसके बाद खाना खाकर सो गया। रात साढ़े आठ बजे लघु शंका को जाने की बात कहकर घर से निकल गया। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर पत्नी लक्ष्मी उसे खोजते हुए बगल में बने भूसे के कमरे में चली गई, जहां रामप्रसाद का शव फांसी के फंदे पर रस्सी के सहारे बड़ेरे पर लटक रहा था। यह देख मृतक के परिवार में चीख पुकार मच गई। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को घटना की सूचना दी गई। रात लगभग 12 बजे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को फांसी के फंदे से नीचे उतारकर पंचनामा तैयार किया।
परिजनों का कहना है कि रामप्रसाद ने किसान क्रेडिट कार्ड पर पंजाब नेशनल बैंक महरौनी से 1.80 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसके अलावा लगभग एक लाख रुपये साहूकारों से कर्ज लिया था, जिससे उसने उड़द की फसल तैयार की। लेकिन, सूखा के कारण उड़द की फसल पीली पड़ गई, जिससे पौधों में फूल भी नहीं लगे। खराब फसल से दुखी होकर उसने मौत को गले लगा लिया। घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं, घटना की जानकारी मिलने पर महरौनी एसडीएम यशु रुस्तगी ने तहसीलदार महरौनी सुनील दुबे को मौके पर भेजकर घटना की रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
सहन नहीं हुआ कुदरत का दोहरा बज्रपात
गांव वालों का कहना है कि ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के कारण रामप्रसाद की रबी की फसल बरबाद हो गई थी, जिसका मुआवजा भी नहीं मिला था। खरीफ फसल से उसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन मेहनत से तैयार की गई उड़द की फसल भी पीली पड़ गई। कुदरत का यह दोहरा बज्रपात रामप्रसाद सहन नहीं कर सका।
पूरे परिवार की थी जिम्मेदारी
रामप्रसाद के पिता कनई कुशवाहा ने 15 वर्ष पूर्व सन्यास ले लिया था। रामप्रसाद इकलौता पुत्र था, जिस पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी का भार था। उसकी एक पुत्री का विवाह हो चुका है तथा दूसरी पुत्री की शादी इसी वर्ष करनी थी। इसके अलावा उसके दो पुत्र रामफल 11 वर्ष एवं भरत 16 वर्ष के हैं।
इनका कहना है -
ग्राम गुंदरापुर निवासी किसान रामप्रसाद की मौत के पीछे कर्ज कोई वजह नहीं है। फसल पूरे गांव की प्रभावित हुई है, इस कारण फसल और कर्ज से मौत की बात सही नहीं है।
- मनोज पांडेय, कानूनगो
तहसील महरौनी, जिला ललितपुर।
विज्ञापन
ग्राम गुंदरापुर निवासी रामप्रसाद पुत्र कनई कुशवाहा (40 वर्ष) ने बैंक और साहूकारों से कर्जा लेकर 12 एकड़ खेत में उर्द की फसल बोयी थी। सोमवार की सुबह वह फसल देखने के लिए खेत पर गया, वहां से लौटने के बाद उसने पत्नी एवं बच्चों से खेत में सूख रही फसल के बारे में चरचा की। इसके बाद खाना खाकर सो गया। रात साढ़े आठ बजे लघु शंका को जाने की बात कहकर घर से निकल गया। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर पत्नी लक्ष्मी उसे खोजते हुए बगल में बने भूसे के कमरे में चली गई, जहां रामप्रसाद का शव फांसी के फंदे पर रस्सी के सहारे बड़ेरे पर लटक रहा था। यह देख मृतक के परिवार में चीख पुकार मच गई। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को घटना की सूचना दी गई। रात लगभग 12 बजे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को फांसी के फंदे से नीचे उतारकर पंचनामा तैयार किया।
विज्ञापन
परिजनों का कहना है कि रामप्रसाद ने किसान क्रेडिट कार्ड पर पंजाब नेशनल बैंक महरौनी से 1.80 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसके अलावा लगभग एक लाख रुपये साहूकारों से कर्ज लिया था, जिससे उसने उड़द की फसल तैयार की। लेकिन, सूखा के कारण उड़द की फसल पीली पड़ गई, जिससे पौधों में फूल भी नहीं लगे। खराब फसल से दुखी होकर उसने मौत को गले लगा लिया। घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं, घटना की जानकारी मिलने पर महरौनी एसडीएम यशु रुस्तगी ने तहसीलदार महरौनी सुनील दुबे को मौके पर भेजकर घटना की रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
सहन नहीं हुआ कुदरत का दोहरा बज्रपात
गांव वालों का कहना है कि ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के कारण रामप्रसाद की रबी की फसल बरबाद हो गई थी, जिसका मुआवजा भी नहीं मिला था। खरीफ फसल से उसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन मेहनत से तैयार की गई उड़द की फसल भी पीली पड़ गई। कुदरत का यह दोहरा बज्रपात रामप्रसाद सहन नहीं कर सका।
पूरे परिवार की थी जिम्मेदारी
रामप्रसाद के पिता कनई कुशवाहा ने 15 वर्ष पूर्व सन्यास ले लिया था। रामप्रसाद इकलौता पुत्र था, जिस पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी का भार था। उसकी एक पुत्री का विवाह हो चुका है तथा दूसरी पुत्री की शादी इसी वर्ष करनी थी। इसके अलावा उसके दो पुत्र रामफल 11 वर्ष एवं भरत 16 वर्ष के हैं।
इनका कहना है -
ग्राम गुंदरापुर निवासी किसान रामप्रसाद की मौत के पीछे कर्ज कोई वजह नहीं है। फसल पूरे गांव की प्रभावित हुई है, इस कारण फसल और कर्ज से मौत की बात सही नहीं है।
- मनोज पांडेय, कानूनगो
तहसील महरौनी, जिला ललितपुर।