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जनपद में फल-फूल रहा अवैध शराब का धंधा
lalitpur
Updated Mon, 27 Jun 2016 01:20 AM IST
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अवैध्ा श्ाराब
- फोटो : demo pic
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सिलावन (ललितपुर)। जिले में कच्ची शराब बनाने का अवैध कारोबार कुटीर उद्योग का रूप लेता जा रहा है। यह शराब वैध दुकानों पर मिलने वाली ब्रांडेड शराब की अपेक्षा काफी सस्ती होती है, जिससे लोग इसका अधिक मात्रा में सेवन करते हैं। आबकारी व पुलिस विभाग की शिथिलता से अवैध शराब के कारोबारियों का धंधा खूब फल- फूल रहा है।
जनपद का शायद ही ऐसा कोई इलाका होगा, जहां पर कच्ची शराब का धंधा न किया जा रहा हो। इसमें पुरुष ही नहीं, बल्किमहिलाएं और बच्चे भी जुटे रहते हैं। हर दिन सैकड़ों लीटर कच्ची शराब बनाई जाती है। बाद में सस्ती दर पर बेचने के लिए इसे पाउच में पैक किया जाता है। गांवों में इन अवैध देसी शराब के कारोबारियों के बारे में क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक से लेकर थाना पुलिस तक सबको पता रहता है। लेकिन, विभागीय उच्चाधिकारियों की शिथिलता के कारण अवैध शराब का धंधा खूब फल-फूल रहा है। साथ ही इससे दिन- प्रतिदिन सामाजिक एवं आर्थिक अपराध में बढ़ोत्तरी भी दर्ज की गई।
ऐसे बनती हैं जानलेवा शराब
अवैध शराब के धंधे से जुड़े लोग कच्ची शराब बनाने के लिए पीने वालों की सेहत दांव पर लगाने से भी नहीं हिचकते हैं। कम कीमत पर ज्यादा नशा देने के लिए नाम मात्र के महुआ के साथ एक लीटर स्प्रिट से साढ़े तीन लीटर कच्ची शराब बनाने के लिए शराब में यूरिया, आक्सीटोसिन इंजेक्शन व गुड़ का शीरा मिलाया जाता है। इससे तैयार देसी शराब को पॉलीथिन के पाउच में पैक कर सस्ती दर पर गांवों में बेचा जाता है। जानकार यह भी बताते हैं कि कई धंधेबाज सुरूर बढ़ाने के लिए इसमें नींद की गोलियां भी मिलाते है।
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जीवन के लिए हैं घातक
मिलावटी देसी शराब पीने से लीवर और गुर्दे के साथ- साथ आंखों की रोशनी और तंत्रिका तंत्र पर भी असर पड़ता है। इसका असर पीने वाले के शरीर पर इतना तेजी से होता है कि उन्हें समझ में नहीं आता और वह मिलावटी शराब के शिकार हो जाते है।
रोकथाम के लिए महज खानापूर्ति
कच्ची शराब की रोकथाम के लिए आबकारी विभाग द्वारा समय- समय पर अभियान चलाता है, लेकिन यह सिर्फ खानापूर्ति ही साबित होता है। आबकारी टीम क्षेत्रीय पुलिस के साथ मिलकर जानी-पहचानी जगहों पर औपचारिक छापामार कार्रवाई कर छोटे-मोटे धंधेबाजों को दस पंद्रह लीटर देसी शराब व महुआ के साथ पकड़कर अपनी पीठ थपथपा लेती है।
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महरौनी से सटे गांवों में बनती हैं कच्ची शराब
कसबा महरौनी से सटे ग्राम पाली, पचौड़ा, चौकी, सिंगेपुर, कुरौरा आदि गांवों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाने के लिए भट्टियां धधकती हैं। यहां के आस-पास के गांवों में पॉलीथिन के पाउचों में पैक करके कच्ची शराब सप्लाई की जाती है।
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पूर्व एसपी ने चलाई थी मुहिम
जिला के पूर्व पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने कच्ची शराब के खिलाफ मुहिम चलाई थी। उन्होंने जिले भर में कच्ची शराब बिकने के अड्डे चिह्ंित कर सभी थानेदारों को पत्र जारी कर कार्रवाई के लिए कहा था, साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिसका असर भी हुआ था।
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प्रदेश में हो शराब बंदी
सिलावन (ललितपुर)। समाजसेवी संस्था जीवन ज्योति ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बिहार की तर्ज पर प्रदेश में शराब बंदी की मांग की है। सीएम को भेजे पत्र में कहा है कि अत्यधिक शराब खोरी के चलते कई परिवार टूट रहे हैं। महिला हिंसा और अन्य अपराधों का कारण भी शराब बनती जा रही है। कई परिवार बर्बादी की कगार पर आ गए हैं। शराब के लती पुरुष जेवर आदि गिरवी रखकर अपना शौक पूरा कर रहे हैं। इतना ही नहीं घर-घर में महिलाएं नशे में धुत लोगों की हिंसा का शिकार बन रही हैं। उन्होंने बिहार की तर्ज पर यूपी में भी शराब बंदी करने की मांग की है।
तीन माह से लगातार कच्ची शराब बनाने वाले और अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसमें लाखों लीटर लहन और कच्ची शराब को नष्ट किया गया है। आम लोग भी कच्ची शराब का बहिष्कार करें।
- पीके गिरि
आबकारी निरीक्षक
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जनपद का शायद ही ऐसा कोई इलाका होगा, जहां पर कच्ची शराब का धंधा न किया जा रहा हो। इसमें पुरुष ही नहीं, बल्किमहिलाएं और बच्चे भी जुटे रहते हैं। हर दिन सैकड़ों लीटर कच्ची शराब बनाई जाती है। बाद में सस्ती दर पर बेचने के लिए इसे पाउच में पैक किया जाता है। गांवों में इन अवैध देसी शराब के कारोबारियों के बारे में क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक से लेकर थाना पुलिस तक सबको पता रहता है। लेकिन, विभागीय उच्चाधिकारियों की शिथिलता के कारण अवैध शराब का धंधा खूब फल-फूल रहा है। साथ ही इससे दिन- प्रतिदिन सामाजिक एवं आर्थिक अपराध में बढ़ोत्तरी भी दर्ज की गई।
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ऐसे बनती हैं जानलेवा शराब
अवैध शराब के धंधे से जुड़े लोग कच्ची शराब बनाने के लिए पीने वालों की सेहत दांव पर लगाने से भी नहीं हिचकते हैं। कम कीमत पर ज्यादा नशा देने के लिए नाम मात्र के महुआ के साथ एक लीटर स्प्रिट से साढ़े तीन लीटर कच्ची शराब बनाने के लिए शराब में यूरिया, आक्सीटोसिन इंजेक्शन व गुड़ का शीरा मिलाया जाता है। इससे तैयार देसी शराब को पॉलीथिन के पाउच में पैक कर सस्ती दर पर गांवों में बेचा जाता है। जानकार यह भी बताते हैं कि कई धंधेबाज सुरूर बढ़ाने के लिए इसमें नींद की गोलियां भी मिलाते है।
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जीवन के लिए हैं घातक
मिलावटी देसी शराब पीने से लीवर और गुर्दे के साथ- साथ आंखों की रोशनी और तंत्रिका तंत्र पर भी असर पड़ता है। इसका असर पीने वाले के शरीर पर इतना तेजी से होता है कि उन्हें समझ में नहीं आता और वह मिलावटी शराब के शिकार हो जाते है।
रोकथाम के लिए महज खानापूर्ति
कच्ची शराब की रोकथाम के लिए आबकारी विभाग द्वारा समय- समय पर अभियान चलाता है, लेकिन यह सिर्फ खानापूर्ति ही साबित होता है। आबकारी टीम क्षेत्रीय पुलिस के साथ मिलकर जानी-पहचानी जगहों पर औपचारिक छापामार कार्रवाई कर छोटे-मोटे धंधेबाजों को दस पंद्रह लीटर देसी शराब व महुआ के साथ पकड़कर अपनी पीठ थपथपा लेती है।
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महरौनी से सटे गांवों में बनती हैं कच्ची शराब
कसबा महरौनी से सटे ग्राम पाली, पचौड़ा, चौकी, सिंगेपुर, कुरौरा आदि गांवों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बनाने के लिए भट्टियां धधकती हैं। यहां के आस-पास के गांवों में पॉलीथिन के पाउचों में पैक करके कच्ची शराब सप्लाई की जाती है।
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पूर्व एसपी ने चलाई थी मुहिम
जिला के पूर्व पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने कच्ची शराब के खिलाफ मुहिम चलाई थी। उन्होंने जिले भर में कच्ची शराब बिकने के अड्डे चिह्ंित कर सभी थानेदारों को पत्र जारी कर कार्रवाई के लिए कहा था, साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिसका असर भी हुआ था।
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प्रदेश में हो शराब बंदी
सिलावन (ललितपुर)। समाजसेवी संस्था जीवन ज्योति ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बिहार की तर्ज पर प्रदेश में शराब बंदी की मांग की है। सीएम को भेजे पत्र में कहा है कि अत्यधिक शराब खोरी के चलते कई परिवार टूट रहे हैं। महिला हिंसा और अन्य अपराधों का कारण भी शराब बनती जा रही है। कई परिवार बर्बादी की कगार पर आ गए हैं। शराब के लती पुरुष जेवर आदि गिरवी रखकर अपना शौक पूरा कर रहे हैं। इतना ही नहीं घर-घर में महिलाएं नशे में धुत लोगों की हिंसा का शिकार बन रही हैं। उन्होंने बिहार की तर्ज पर यूपी में भी शराब बंदी करने की मांग की है।
तीन माह से लगातार कच्ची शराब बनाने वाले और अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसमें लाखों लीटर लहन और कच्ची शराब को नष्ट किया गया है। आम लोग भी कच्ची शराब का बहिष्कार करें।
- पीके गिरि
आबकारी निरीक्षक