{"_id":"8adfd733cba5ff779e7e72676d7a0b0f","slug":"free-hold-ground-taken-millions-of-forged-documents-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कूटरचित दस्तावेजों से फ्री-होल्ड करा ली करोड़ों की जमीन","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कूटरचित दस्तावेजों से फ्री-होल्ड करा ली करोड़ों की जमीन
ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jan 2016 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। करीब 17 वर्ष पूर्व कूट रचित दस्तावेज तैयार कर अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा 2.48 एकड़ जमीन के रकबे को फ्री- होल्ड कराने के मामले में अधिवक्ता की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय से दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।
स्टेशन रोड स्थित नजूल आराजी संख्या 1,740 रकबा 2.48 एकड़, जिसका बंदोबस्ती मानचित्र में क्षेत्रफल 9,915 वर्ग मीटर है। उसके विपरीत 10,405 वर्गमीटर का क्षेत्रफल दिखाते हुए भूमि का कूटरचित नक्शा फ्री-होल्ड आवेदनकर्ताओं द्वारा फ्री होल्ड आवेदन के साथ फ्रीहोल्ड के समय प्रस्तुत किया गया था,
जिसमें अलग- अलग प्लाट एवं रास्ते दर्शित किए गए थे, जो कि नजूूल आराजी संख्या 1,740 से पूर्णत: विपरीत थी। मौके पर सैकड़ों झोपड़ पट्टी स्थित थीं।
कोई भी खाली प्लाट स्थित नहीं था। उक्त फ्रीहोल्ड के समय कई लोगों की आपत्तियां भी जिलाधिकारी को दी गई थीं, जिन्हें नजरअंदाज कर कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर ही उक्त लोगों के साथ मिलकर फ्री होल्ड किया गया था।
विज्ञापन
अधिवक्ता लखन यादव द्वारा फ्री- होल्ड को निरस्त कर एफआईआर दर्ज कराए जाने के लिए शासन में प्रार्थना पत्र देकर शिकायत दर्ज कराई थी।
इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्रांक संख्या 23828 एवं पीजी 05727452 के द्वारा जिलाधिकारी को फ्रीहोल्ड प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। यह जमीन करोड़ों रुपए की बताई जा रही है।
विज्ञापन
स्टेशन रोड स्थित नजूल आराजी संख्या 1,740 रकबा 2.48 एकड़, जिसका बंदोबस्ती मानचित्र में क्षेत्रफल 9,915 वर्ग मीटर है। उसके विपरीत 10,405 वर्गमीटर का क्षेत्रफल दिखाते हुए भूमि का कूटरचित नक्शा फ्री-होल्ड आवेदनकर्ताओं द्वारा फ्री होल्ड आवेदन के साथ फ्रीहोल्ड के समय प्रस्तुत किया गया था,
विज्ञापन
जिसमें अलग- अलग प्लाट एवं रास्ते दर्शित किए गए थे, जो कि नजूूल आराजी संख्या 1,740 से पूर्णत: विपरीत थी। मौके पर सैकड़ों झोपड़ पट्टी स्थित थीं।
कोई भी खाली प्लाट स्थित नहीं था। उक्त फ्रीहोल्ड के समय कई लोगों की आपत्तियां भी जिलाधिकारी को दी गई थीं, जिन्हें नजरअंदाज कर कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर ही उक्त लोगों के साथ मिलकर फ्री होल्ड किया गया था।
विज्ञापन
अधिवक्ता लखन यादव द्वारा फ्री- होल्ड को निरस्त कर एफआईआर दर्ज कराए जाने के लिए शासन में प्रार्थना पत्र देकर शिकायत दर्ज कराई थी।
इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्रांक संख्या 23828 एवं पीजी 05727452 के द्वारा जिलाधिकारी को फ्रीहोल्ड प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। यह जमीन करोड़ों रुपए की बताई जा रही है।