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गैंगस्टर एक्ट में चार अभियुक्तों को सात वर्ष की सजा
Updated Fri, 28 Sep 2018 02:16 AM IST
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गैंगस्टर एक्ट में चार अभियुक्तों को सात वर्ष की सजा
न्यायालय ने दस-दस हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (गैंगस्टर कोर्ट) जगदीश कुमार की अदालत ने तालबेहट अंतर्गत ग्राम हंसारी निवासी चार अभियुक्तों को गैंगस्टर के अपराध में दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक को चार-चार का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने बताया कि तालबेहट थानाध्यक्ष ईश्वरीदयाल ने दस वर्ष पूर्व पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह 26 अगस्त 2008 को वह हमराही सिपाहियों के साथ गश्त भ्रमण देखरेख व शांति व्यवस्था व तलाश घुमंतु क्षेत्र तेरई फाटक व हंसारी रामपुर आया, जहां गश्त भ्रमण के दौरान जनता के लोगों ने बताया कि वे गवाही नहीं दे सकता हैं, क्योंकि हंसारी रामपुर निवासी बलवीर सिंह पुत्र स्वामी यादव एक गिरोह बंद व्यक्ति हैं व अपने व अपने गिरोह के सदस्यों के लिए आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए अपराध व हिंसा का प्रदर्शन करता है। इसके गिरोह के सदस्य उसी गांव के निवासी प्रजापाल सिंह पुत्र स्वामी यादव, केहर सिंह, संयम सिंह पुत्रगण प्रभुदयाल यादव के साथ मिलकर आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए अपराध व हिंसा का प्रदर्शन करते हैं। इससे ग्राम जनता में भय व आतंक व्याप्त है। यह एक संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक कृत्यों में संलिप्त हैं। इनकी गतिविधियां व कार्य कलाप समाज विरोधी हैं, ऐसे समाज विरोधी आपराधिक व्यक्तियों का समाज में स्वतंत्र रहना जनहित में ठीक नहीं है। इस गैंग ने 21 जुलाई 2008 को अनुचित तरीके से धन कमाने के उद्देश्य से किराए पर ट्रैक्टर चलाने व राशन का कोटा निरस्त कराने की रंजिश को लेकर हंसारी रामपुर के ही शंकर सिंह पुत्र हिम्मत सिंह की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। उक्त लोगों द्वारा अनुचित तरीके से धन अर्जित करने के निमित्त यह समाज विरोधी कार्य किया गया है। वर्तमान में अभियुक्तगण जिला कारागार में न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्घ हैं। कभी भी जमानत पर छूटकर आपराधिक कृत्यों के द्वारा समाज में भय व आतंक उत्पन्न करेंगे। इनकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम की धारा 2/3 के अंतर्गत कार्रवाई के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। जिसके आधार पर पुलिस ने उक्त लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्तों बलवीर सिंह, प्रजापाल सिंह, केहर सिंह व संयम सिंह को गैंगस्टर एक्ट में दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और दस-दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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न्यायालय ने दस-दस हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (गैंगस्टर कोर्ट) जगदीश कुमार की अदालत ने तालबेहट अंतर्गत ग्राम हंसारी निवासी चार अभियुक्तों को गैंगस्टर के अपराध में दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक को चार-चार का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने बताया कि तालबेहट थानाध्यक्ष ईश्वरीदयाल ने दस वर्ष पूर्व पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह 26 अगस्त 2008 को वह हमराही सिपाहियों के साथ गश्त भ्रमण देखरेख व शांति व्यवस्था व तलाश घुमंतु क्षेत्र तेरई फाटक व हंसारी रामपुर आया, जहां गश्त भ्रमण के दौरान जनता के लोगों ने बताया कि वे गवाही नहीं दे सकता हैं, क्योंकि हंसारी रामपुर निवासी बलवीर सिंह पुत्र स्वामी यादव एक गिरोह बंद व्यक्ति हैं व अपने व अपने गिरोह के सदस्यों के लिए आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए अपराध व हिंसा का प्रदर्शन करता है। इसके गिरोह के सदस्य उसी गांव के निवासी प्रजापाल सिंह पुत्र स्वामी यादव, केहर सिंह, संयम सिंह पुत्रगण प्रभुदयाल यादव के साथ मिलकर आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए अपराध व हिंसा का प्रदर्शन करते हैं। इससे ग्राम जनता में भय व आतंक व्याप्त है। यह एक संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक कृत्यों में संलिप्त हैं। इनकी गतिविधियां व कार्य कलाप समाज विरोधी हैं, ऐसे समाज विरोधी आपराधिक व्यक्तियों का समाज में स्वतंत्र रहना जनहित में ठीक नहीं है। इस गैंग ने 21 जुलाई 2008 को अनुचित तरीके से धन कमाने के उद्देश्य से किराए पर ट्रैक्टर चलाने व राशन का कोटा निरस्त कराने की रंजिश को लेकर हंसारी रामपुर के ही शंकर सिंह पुत्र हिम्मत सिंह की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। उक्त लोगों द्वारा अनुचित तरीके से धन अर्जित करने के निमित्त यह समाज विरोधी कार्य किया गया है। वर्तमान में अभियुक्तगण जिला कारागार में न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्घ हैं। कभी भी जमानत पर छूटकर आपराधिक कृत्यों के द्वारा समाज में भय व आतंक उत्पन्न करेंगे। इनकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम की धारा 2/3 के अंतर्गत कार्रवाई के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। जिसके आधार पर पुलिस ने उक्त लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्तों बलवीर सिंह, प्रजापाल सिंह, केहर सिंह व संयम सिंह को गैंगस्टर एक्ट में दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और दस-दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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