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जानलेवा हमले में तीन को 10-10 वर्ष की सजा
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:56 AM IST
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जानलेवा हमले में तीन को 10-10 वर्ष की सजा
ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने ग्राम पटना में नौ वर्ष पुराने एक मामले में जानलेवा हमला करने के तीन अभियुक्तों को दस-दस वर्ष की सजा और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर दस-दस माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतना होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि नौ वर्ष पूर्व थाना नाराहट अंतर्गत ग्राम पटना निवासी फूसा पुत्र गंपा धोवी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 30 नवंबर वर्ष 2008 को शाम पांच बजे वह मजदूरी रोजगार गारंटी योजना का चेक बांट रहा था। ग्राम पटना में गोपाल सिंह के मकानों के पास में खड़ा था कि उसके साथ और भी कई लोग थे और साथ में चंद्रभान पुत्र दामोदर आकर भी साथ में था। तभी सामने से गांव के ही भूरे पुत्र गोरेलाल रजक, जानकी पुत्र नत्थू व रामदयाल पुत्र गोरेलाल रजक आए और उसे गाली देने लगे, तभी भूरा ने हाथ में लिए कट्टा से उसके ऊपर फायर कर दिया। वह बच गया, लेकिन उसके बगल में खड़े चंद्रभान को दाहिने हाथ के बांह में छर्रा लगा, जिससे खून बहने लगा। इस पर वह और उसके साथ के सभी लोग किसी प्रकार वहां से गांव वालों के आने पर अपनी जान बचाकर भाग आए। पीड़ित ने थाने जाकर इसकी सूचना दी, जिस पर पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर मुकदमा पंजीकृत किया और विवेचना शुरु कर दी थी। इसके बाद चिकित्सीय जांच में चिकित्सकों ने चंद्रभान के हाथ से बुलेट निकाली थी। जिसके बाद पुलिस ने उक्त तीनों अभियुक्तों भूरे, जानकी और रामदयाल के खिलाफ जानलेवा हमला करने की धारा में बढ़ोत्तरी की थी और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे, तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। शनिवार को न्यायाधीश ने उक्त मामले में तीनों अभियुक्तों भूूरे, रामदयाल और जानकी को जानलेवा हमला करने में दोषी पाते हुए दस-दस वर्ष की सजा और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर दस माह का का अतिरिक्त कारावास की सजा भी भुगतनी होगी।
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ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने ग्राम पटना में नौ वर्ष पुराने एक मामले में जानलेवा हमला करने के तीन अभियुक्तों को दस-दस वर्ष की सजा और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर दस-दस माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतना होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि नौ वर्ष पूर्व थाना नाराहट अंतर्गत ग्राम पटना निवासी फूसा पुत्र गंपा धोवी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 30 नवंबर वर्ष 2008 को शाम पांच बजे वह मजदूरी रोजगार गारंटी योजना का चेक बांट रहा था। ग्राम पटना में गोपाल सिंह के मकानों के पास में खड़ा था कि उसके साथ और भी कई लोग थे और साथ में चंद्रभान पुत्र दामोदर आकर भी साथ में था। तभी सामने से गांव के ही भूरे पुत्र गोरेलाल रजक, जानकी पुत्र नत्थू व रामदयाल पुत्र गोरेलाल रजक आए और उसे गाली देने लगे, तभी भूरा ने हाथ में लिए कट्टा से उसके ऊपर फायर कर दिया। वह बच गया, लेकिन उसके बगल में खड़े चंद्रभान को दाहिने हाथ के बांह में छर्रा लगा, जिससे खून बहने लगा। इस पर वह और उसके साथ के सभी लोग किसी प्रकार वहां से गांव वालों के आने पर अपनी जान बचाकर भाग आए। पीड़ित ने थाने जाकर इसकी सूचना दी, जिस पर पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर मुकदमा पंजीकृत किया और विवेचना शुरु कर दी थी। इसके बाद चिकित्सीय जांच में चिकित्सकों ने चंद्रभान के हाथ से बुलेट निकाली थी। जिसके बाद पुलिस ने उक्त तीनों अभियुक्तों भूरे, जानकी और रामदयाल के खिलाफ जानलेवा हमला करने की धारा में बढ़ोत्तरी की थी और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे, तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। शनिवार को न्यायाधीश ने उक्त मामले में तीनों अभियुक्तों भूूरे, रामदयाल और जानकी को जानलेवा हमला करने में दोषी पाते हुए दस-दस वर्ष की सजा और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर दस माह का का अतिरिक्त कारावास की सजा भी भुगतनी होगी।
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