{"_id":"5a397af04f1c1bd1408bdebd","slug":"191513716464-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ढुलमुल रवैये पर समिति ने अफसरों को भेजा रिमाइंडर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
ढुलमुल रवैये पर समिति ने अफसरों को भेजा रिमाइंडर
Updated Wed, 20 Dec 2017 03:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ढुलमुल रवैये पर समिति ने अफसरों को भेजा रिमाइंडर
ललितपुर। बाल कल्याण समिति ने बाल श्रमिकों के चिह्नींकरण के मामले में हो रही हीलाहवाली मामले में श्रम प्रवर्तन अधिकारी को रिमाइंडर जारी किया है, जिससे विभागीय कर्मियों में खलबली मच गई है।
जिले में उद्योग धंधों की शून्यता के चलते गरीबी बोलाबाला है और इस महंगाई के दौर में घर परिवार चलाना किसी के आसान नहीं है। यही वजह है कि निर्धन परिवारों के बच्चे भी होटल, ढाबों, चाय की दुकानों, किराने व रेडिमेड की दुुकानों पर काम कर रहे हैं। इससे उनका हंसता-खेलता बचपन बर्बाद हो रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से ऐसे बच्चों के पुनर्वास की योजना चलाई जा रही है। श्रम विभाग बाल श्रमिकों को चिह्नित कर उन्हें स्कूल पहुंचाने का काम करती है। लेकिन, जनपद में ऐसा नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में भी बड़ी संख्या बच्चे पढ़ाई छोड़ बाल श्रम कर रहे हैं। जिसे बाल कल्याण समिति (न्याय पीठ) ने संज्ञान में लेते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी को रिमाइंडर जारी किया है। इसमें कहा गया कि दुकानों पर 18 वर्ष से कम आयु के बालकों द्वारा कार्य किया जा रहा है जो बाल संरक्षण अधिनियम के विपरीत है। ऐसे बच्चों का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन इससे समिति को अवगत नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने ऐसे बालकों की तलाश कर समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि उक्त बालकों का शिक्षण/प्रशिक्षण और पारिवारिक पुनर्वासन करते हुए उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके। समिति अध्यक्ष कैलाश नारायण अग्रवाल का कहना है कि संबंधित अधिकारी को तीन पत्र जारी किए जा चुके हैं। लेकिन अभी तक समिति को अवगत नहीं कराया गया है। उधर, श्रम प्रवर्तन अधिकारी राजकुमार का कहना है कि समिति जो जानकारी मांग रही है, वह उन्हें कल ही मुहैया करा दी जाएगी।
विज्ञापन
ललितपुर। बाल कल्याण समिति ने बाल श्रमिकों के चिह्नींकरण के मामले में हो रही हीलाहवाली मामले में श्रम प्रवर्तन अधिकारी को रिमाइंडर जारी किया है, जिससे विभागीय कर्मियों में खलबली मच गई है।
जिले में उद्योग धंधों की शून्यता के चलते गरीबी बोलाबाला है और इस महंगाई के दौर में घर परिवार चलाना किसी के आसान नहीं है। यही वजह है कि निर्धन परिवारों के बच्चे भी होटल, ढाबों, चाय की दुकानों, किराने व रेडिमेड की दुुकानों पर काम कर रहे हैं। इससे उनका हंसता-खेलता बचपन बर्बाद हो रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से ऐसे बच्चों के पुनर्वास की योजना चलाई जा रही है। श्रम विभाग बाल श्रमिकों को चिह्नित कर उन्हें स्कूल पहुंचाने का काम करती है। लेकिन, जनपद में ऐसा नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में भी बड़ी संख्या बच्चे पढ़ाई छोड़ बाल श्रम कर रहे हैं। जिसे बाल कल्याण समिति (न्याय पीठ) ने संज्ञान में लेते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी को रिमाइंडर जारी किया है। इसमें कहा गया कि दुकानों पर 18 वर्ष से कम आयु के बालकों द्वारा कार्य किया जा रहा है जो बाल संरक्षण अधिनियम के विपरीत है। ऐसे बच्चों का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन इससे समिति को अवगत नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने ऐसे बालकों की तलाश कर समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि उक्त बालकों का शिक्षण/प्रशिक्षण और पारिवारिक पुनर्वासन करते हुए उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके। समिति अध्यक्ष कैलाश नारायण अग्रवाल का कहना है कि संबंधित अधिकारी को तीन पत्र जारी किए जा चुके हैं। लेकिन अभी तक समिति को अवगत नहीं कराया गया है। उधर, श्रम प्रवर्तन अधिकारी राजकुमार का कहना है कि समिति जो जानकारी मांग रही है, वह उन्हें कल ही मुहैया करा दी जाएगी।
विज्ञापन