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सर्दी में गोवंश को पहनाए जाएंगे काउ कोट
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- फोटो : cow.jpeg
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ललितपुर। गोवंश आश्रय स्थलों में ठहराए गए गोवंश को कड़ाके की सर्दी से बचाने के लिए काउ कोट पहनाए जाएंगे। इसकी तैयारी अभी शुरू कर दी गई है। पशु चिकित्सा अधिकारी ने जूट के बोरों की डिमांड जिला पूर्ति अधिकारी से की है। पिछले साल 2000 काउ कोट ही उपलब्ध हो सके थे।
किसानों को अन्ना पशुओं से निजात दिलाने के उद्देश्य से जिले में 16 स्थानों पर गोवंश आश्रय स्थल स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 01 पंजीकृत गोशाला और 22 कांजी हाउस भी हैं। इनमें 18000 गोवंश ठहराए गए हैं। ग्राम कल्याणपुरा का गोवंश आश्रय स्थल एक मॉडल के रूप में है, जिसमें गोवंश के लिए हरा चारा उगाया जाता है। इस दौरान कड़ाके की सर्दी में ठहरे गोवंश को बचाना चुनौती बन जाता है। पिछले साल नगर पालिका परिषद ने काहा पशु आश्रय स्थल के टिनशेड तिरपाल से कवर्ड कराए थे। वहीं, जिला प्रशासन ने अन्य जगहों पर स्थित गोवंश में काउ कोट उपलब्ध कराए थे। इसमें जिला पूर्ति के अधिकारियों की भूमिका अहम रही थी। उन्होंने उचित दर की दुकानों से खाली जूट के बोरे मंगवाकर उन्हें काउ कोट में तब्दील कराया था। अब दिसंबर का महीना आरंभ हो गया है। इस माह के अंतिम सप्ताह में कड़ाके की सर्दी पड़ने लगती है। जिसके चलते अधिकारियों ने एक बार फिर गोवंश के लिए काउ कोट का इंतजाम कराने की रणनीति बना ली है। इसके तहत आश्रय स्थलों में रुके कमजोर गोवंश का चिन्हींकरण किया जाएगा। इसके बाद चिंह्नित गोवंश को काउ कोट उपलब्ध कराए जाएंगे।
गोपुत्र सेना भी करती मदद
जो गोवंश आश्रय स्थल में पहुंचने से रह जाते हैं और वे सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे डेरा डाले रहते हैं। ऐसे गोवंश की मदद के लिए गोपुत्र सेना (सामाजिक संगठन) आगे आती है। गोपुत्र सेना के सदस्य उन्हें जूट के बोरे पहनाते हैं। चारा भी खिलाते हैं। तब जाकर खुले आसमान के नीचे सड़कों पर घूूम रहे गोवंश सर्दी से बच पाते हैं।
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दिसंबर-जनवरी माह में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। इस दौरान गोवंश की हालत बिगड़ने लगती है। जिसे ध्यान में रखकर कमजोर गोवंश के लिए काउ कोट का इंतजाम कराया जा रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी से जूट के बोरों की डिमांड की है। उपलब्धता के आधार पर ज्यादा से ज्यादा गोवंश को काउ कोट की व्यवस्था की जाएगी। - डॉ. एस. के शाक्य, जिला पशु चिकित्साधिकारी
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किसानों को अन्ना पशुओं से निजात दिलाने के उद्देश्य से जिले में 16 स्थानों पर गोवंश आश्रय स्थल स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 01 पंजीकृत गोशाला और 22 कांजी हाउस भी हैं। इनमें 18000 गोवंश ठहराए गए हैं। ग्राम कल्याणपुरा का गोवंश आश्रय स्थल एक मॉडल के रूप में है, जिसमें गोवंश के लिए हरा चारा उगाया जाता है। इस दौरान कड़ाके की सर्दी में ठहरे गोवंश को बचाना चुनौती बन जाता है। पिछले साल नगर पालिका परिषद ने काहा पशु आश्रय स्थल के टिनशेड तिरपाल से कवर्ड कराए थे। वहीं, जिला प्रशासन ने अन्य जगहों पर स्थित गोवंश में काउ कोट उपलब्ध कराए थे। इसमें जिला पूर्ति के अधिकारियों की भूमिका अहम रही थी। उन्होंने उचित दर की दुकानों से खाली जूट के बोरे मंगवाकर उन्हें काउ कोट में तब्दील कराया था। अब दिसंबर का महीना आरंभ हो गया है। इस माह के अंतिम सप्ताह में कड़ाके की सर्दी पड़ने लगती है। जिसके चलते अधिकारियों ने एक बार फिर गोवंश के लिए काउ कोट का इंतजाम कराने की रणनीति बना ली है। इसके तहत आश्रय स्थलों में रुके कमजोर गोवंश का चिन्हींकरण किया जाएगा। इसके बाद चिंह्नित गोवंश को काउ कोट उपलब्ध कराए जाएंगे।
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गोपुत्र सेना भी करती मदद
जो गोवंश आश्रय स्थल में पहुंचने से रह जाते हैं और वे सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे डेरा डाले रहते हैं। ऐसे गोवंश की मदद के लिए गोपुत्र सेना (सामाजिक संगठन) आगे आती है। गोपुत्र सेना के सदस्य उन्हें जूट के बोरे पहनाते हैं। चारा भी खिलाते हैं। तब जाकर खुले आसमान के नीचे सड़कों पर घूूम रहे गोवंश सर्दी से बच पाते हैं।
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दिसंबर-जनवरी माह में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। इस दौरान गोवंश की हालत बिगड़ने लगती है। जिसे ध्यान में रखकर कमजोर गोवंश के लिए काउ कोट का इंतजाम कराया जा रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी से जूट के बोरों की डिमांड की है। उपलब्धता के आधार पर ज्यादा से ज्यादा गोवंश को काउ कोट की व्यवस्था की जाएगी। - डॉ. एस. के शाक्य, जिला पशु चिकित्साधिकारी