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Lalitpur News: संत और श्रद्धालु बोले- महाकुंभ में दिखा दिव्यता का संगम
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। महाकुंभ के समापन के बाद वहां से लौटे संतों व श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्होंने कई कुंभ देखे, लेकिन इस महाकुंभ में दिव्यता का महासंगम रहा। गरीब हो या अमीर सभी ने एक जगह स्नान किए। महाकुंभ में ही नेत्र कुंभ का आयोजन भी हुआ, जिसमें आंखों का निशुल्क परीक्षण हुआ। किसी ने कुंभ की दिव्यता का बखान किया तो कुछ ने कुंभ में दिव्य आत्माओं व महापुरुषों के स्नान का महत्व बताया।
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फोटो-06
ऐसा कुंभ पहले कभी नहीं देखा। लग रहा कि था कि महाकुंभ में लोगों के साथ देवता और न दिखाई देने वाली दिव्य आत्माओं ने भी स्नान किए। जैसे कण-कण और रज में भी देवताओं का वास रहा हो। वास्तव में इस कुंभ को दिव्य महाकुंभ ही कहना ठीक होगा।
-गंगादास महाराज, महंत, श्रीनृसिंह मंदिर
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फोटो-07
पहले भी नासिक, हरिद्वार और उज्जैन के साथ ही प्रयागराज के कुंभ किए हैं, लेकिन इस बार के महाकुंभ की दिव्यता की बात ही अलग रही। घाटों की व्यवस्थाएं काफी सुंदर रहीं। हेलीकॉप्टर से घाटों पर फूलों की बारिश और शाम 7.10 बजे से बीस मिनट का आकाश में रोशनी का जो वृतांत दिखाया गया, वह काफी आकर्षक रहा। कुंभ में गरीबों को भी छड़ी, व्हील चेयर की व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं।
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-कृष्णगिरी महाराज, महामंडलेश्वर, सर्वेश्वरधाम मंदिर।
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फोटो-47
महाशिवरात्रि के एक दिन पहले ही कुंभ स्पेशल ट्रेन से रवाना हुए, लेकिन नैनी स्टेशन के दो किलोमीटर पहले ही ट्रेन रुक गई तो वहां से उतरकर पैदल ही स्टेशन तक पहुंचे। वहां से बाइक ने तीन-तीन सौ रुपये लेकर संगम घाट के तीन किलोमीटर पहले प्रमुख प्रवेश द्वार तक पहुंचाया। वहां से फिर पैदल चलकर संगम घाट पहुंचे। लेकिन, स्नान करके कुंभ की दिव्यता का पता चला। कुंभ में स्नान करना बड़ा सौभाग्य रहा।
-दीपेंद्र, श्रद्धालु।
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फोटो-48
महाकुंभ के लिए ट्रेन से रवाना हुए और दूसरे दिन दोपहर में प्रयागराज स्टेशन से पांच किलोमीटर पहले ही ट्रेन से उतर कर कुछ देर पैदल चलना पड़ा। फिर बाइक से कुंभ परिसर पहुंचा। वहां से तीन किलोमीटर पैदल चलकर अरैल घाट स्थित संगम पर पहुंचा, जहां कुंभ स्नान किए और सूर्य नारायण को अर्घ्य दिया। संगम पर स्नान कर काफी अच्छा लगा। सारी थकावट उतर गई। महाकुंभ की दिव्यता देखना और स्नान करना ही बड़े सौभाग्य की बात रही।
-अनुज हुंडैत, श्रद्धालु।
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ललितपुर। महाकुंभ के समापन के बाद वहां से लौटे संतों व श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्होंने कई कुंभ देखे, लेकिन इस महाकुंभ में दिव्यता का महासंगम रहा। गरीब हो या अमीर सभी ने एक जगह स्नान किए। महाकुंभ में ही नेत्र कुंभ का आयोजन भी हुआ, जिसमें आंखों का निशुल्क परीक्षण हुआ। किसी ने कुंभ की दिव्यता का बखान किया तो कुछ ने कुंभ में दिव्य आत्माओं व महापुरुषों के स्नान का महत्व बताया।
फोटो-06
ऐसा कुंभ पहले कभी नहीं देखा। लग रहा कि था कि महाकुंभ में लोगों के साथ देवता और न दिखाई देने वाली दिव्य आत्माओं ने भी स्नान किए। जैसे कण-कण और रज में भी देवताओं का वास रहा हो। वास्तव में इस कुंभ को दिव्य महाकुंभ ही कहना ठीक होगा।
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-गंगादास महाराज, महंत, श्रीनृसिंह मंदिर
फोटो-07
पहले भी नासिक, हरिद्वार और उज्जैन के साथ ही प्रयागराज के कुंभ किए हैं, लेकिन इस बार के महाकुंभ की दिव्यता की बात ही अलग रही। घाटों की व्यवस्थाएं काफी सुंदर रहीं। हेलीकॉप्टर से घाटों पर फूलों की बारिश और शाम 7.10 बजे से बीस मिनट का आकाश में रोशनी का जो वृतांत दिखाया गया, वह काफी आकर्षक रहा। कुंभ में गरीबों को भी छड़ी, व्हील चेयर की व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं।
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-कृष्णगिरी महाराज, महामंडलेश्वर, सर्वेश्वरधाम मंदिर।
फोटो-47
महाशिवरात्रि के एक दिन पहले ही कुंभ स्पेशल ट्रेन से रवाना हुए, लेकिन नैनी स्टेशन के दो किलोमीटर पहले ही ट्रेन रुक गई तो वहां से उतरकर पैदल ही स्टेशन तक पहुंचे। वहां से बाइक ने तीन-तीन सौ रुपये लेकर संगम घाट के तीन किलोमीटर पहले प्रमुख प्रवेश द्वार तक पहुंचाया। वहां से फिर पैदल चलकर संगम घाट पहुंचे। लेकिन, स्नान करके कुंभ की दिव्यता का पता चला। कुंभ में स्नान करना बड़ा सौभाग्य रहा।
-दीपेंद्र, श्रद्धालु।
फोटो-48
महाकुंभ के लिए ट्रेन से रवाना हुए और दूसरे दिन दोपहर में प्रयागराज स्टेशन से पांच किलोमीटर पहले ही ट्रेन से उतर कर कुछ देर पैदल चलना पड़ा। फिर बाइक से कुंभ परिसर पहुंचा। वहां से तीन किलोमीटर पैदल चलकर अरैल घाट स्थित संगम पर पहुंचा, जहां कुंभ स्नान किए और सूर्य नारायण को अर्घ्य दिया। संगम पर स्नान कर काफी अच्छा लगा। सारी थकावट उतर गई। महाकुंभ की दिव्यता देखना और स्नान करना ही बड़े सौभाग्य की बात रही।
-अनुज हुंडैत, श्रद्धालु।