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राजकीय महाविद्यालय का हाल: मैदान में बन रहे कंडे, प्राचार्य आवास में भरा भूसा

Fri, 24 Dec 2021 02:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 24 Dec 2021 02:21 AM IST
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Condition of Government College: Conduit being built in the ground, straw filled in the principal's residence
ललितपुर। युवाओं को उच्च शिक्षित बनाने और रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकार तमाम दावे कर रही है, लेकिन नगर में उच्च शिक्षा का हाल बदहाल है। हालात यह हैं कि नगर में वर्ष 1998 में बने राजकीय महाविद्यालय के मैदान में कंडे पाथे जा रहे हैं, तो प्राचार्य आवास में भूसा भरा हुआ है। इसके साथ ही कॉलेज में पढ़ाने के लिए न तो प्रोफेसर हैं और न ही अन्य स्टाफ है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन के साथ विद्यार्थी भी परेशान हैं।
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सूबे के अति पिछड़े जनपद ललितपुर में उच्च शिक्षा के लिए हाईवे मंडी के पीछे करीब 23 साल पहले करीब 14.67 एकड़ क्षेत्रफल में खोले गए रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय में छह विषयों में परास्नातक कक्षाओं का संचालन शुरू हुआ था। इनमें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान और कामर्स से परास्नातक करने वाले छात्र छात्राओं ने प्रवेश लिया। कॉलेज में आज भी करीब एक हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं, लेकिन यहां प्रोफेसरों के पद रिक्त पड़े हैं। हैरत की बात तो यह है कि प्राचार्य पद भी काफी समय से रिक्त होने के कारण वरिष्ठ प्रवक्ता को कार्यवाहक प्राचार्य बना दिया गया। चतुर्थ श्रेणी के 17 पदों के खाली होने से कॉलेज कैंपस कटीली झाड़ियों से घिर गया है। पूरे कॉलेज की देखरेख की जिम्मेदारी दो कर्मचारियों पर होने से यहां अव्यवस्थाओं का बोलवाला है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन को जहां दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कॉलेज कैंपस का एक हिस्सा मिट्टी खुदाई होने से अब तालाब में तब्दील हो गया है। परिसर में कांटेदार झाड़ियां उग आईं। वहीं बाउंड्रीवाल टूटने से अराजक तत्व भी यहां आने से नहीं चूकते। प्राचार्य आवास खाली रहने के कारण यहां के कमरे में जानवरों के लिए भूसा भरा है और कुछ दूरी पर कंडे बन रहे हैं।
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कॉलेज के स्टाफ पर एक नजर
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विषय कुल पद खाली
भौतिक विज्ञान 3 0
गणित 3 3
रसायन विज्ञान 4 3
वनस्पति विज्ञान 3 1
जीव विज्ञान 3 0
कॉमर्स 5 4
लैब असिस्टेंट 5 5
चतुर्थ श्रेणी 19 17
लकड़ी की पट्टी लगाकर रोकी जा रही हवा
करीब 23 साल पहले बने कॉलेज भवन की पुताई के लिए शासन से फूटी कौड़ी तक नहीं मिली जिसके कारण भवन की स्थित बदहाल हो रही है। सड़क से मुख्यगेट तक करीब 20 मीटर सड़क जर्जर हो गई। जिससे आवागमन करने में शिक्षकों से लेकर छात्र छात्राओं को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। वहीं खिड़कियों में सीसे टूटने के बाद अब लकड़ी की पट्टियां लगाकर हवा को रोका गया है। हैरत की बात तो यह है कि अफसरों ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
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बोले विद्यार्थी
कॉलेज कैंपस में छात्रावास बनाने के लिए पर्याप्त जगह है। यदि छात्रावास बनवा दिया जाए तो दूर दराज से आने वाले छात्रों को लाभ होगा। -प्रिंस राठौर, बीएससी (द्वितीय वर्ष)
कॉलेज में जीव विज्ञान प्रयोगशाला में लैब सहायक न होने से काफी दिक्कत होती है। एक प्रवक्ता का पद भी खाली उसे जल्द भरा जाना चाहिए। -राज खान, बीएससी बायो(तृतीय वर्ष)
कॉलेज में गणित का कोई प्रोफेसर न होने से पढ़ाई में काफी दिक्कत हो रही है। उच्चाधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।-यशवंत प्रताप सिंह बीएससी मैथ (तृतीय वर्ष)
प्रदेश में योजनाओं व सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों का बजट खर्च हो रहा लेकिन कॉलेजों में रिक्त पदों पर शिक्षकों की तैनाती नहीं हो रही, इस ओर ध्यान देना चाहिए।-दिव्या राजपूत,बीएससी बायो (तृतीय वर्ष)
कॉलेज में घुसते ही खस्ताहाल सड़क पर चलना पड़ता है। परिसर में छात्रावास बनवा दिया जाए जिससे बाहर से आने वाले छात्रों को रहने का स्थान मिल जाए।-अंकित झा
विधायक और सांसद निधि की दस प्रतिशत धनराशि शिक्षा पर खर्च करने की अनिवार्यता होनी चाहिए क्योकि युवा मतदाता भी उन्हें वोट देते हैं, तभी समस्याओं का निदान होगा।-वैष्णवी, बीकाम द्वितीय

सीमित संसाधनों से कॉलेज की व्यवस्थाओं की दुरुस्त कर रहे हैं, जो पद रिक्त हैं उनके लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।-प्रो. केशव देव, कार्यवाहक प्राचार्य
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