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कंपनी बाग चमाचम, पालिका के पार्क उजड़े चमन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Sep 2016 01:05 AM IST
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- फोटो : demo
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ललितपुर। नगरपालिका ने उद्यान विभाग के कंपनी बाग को करोड़ रुपये रुपये खर्च करके चमाचम कर दिया है, जबकि नगर में पालिका के अपने पार्क बदहाली में हैं, जिनका नागरिक उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
शहर में विभिन्न स्थानों पर छोटे-बड़े कुल एक दर्जन से अधिक पार्क हैं, जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी नगरपालिका की है। लेकिन, नगरपालिका अपने पार्कों के प्रति जिम्मेदारियों को दरकिनार करते हुए अन्य विभागों के पार्क को चमकाने में लगी हुई है।
शहर की कुल आबादी दो लाख का आंकड़ा पार कर गई है, नागरिकों की सुविधा के लिए नगर में विभिन्न स्थानों पर नगरपालिका द्वारा पूर्व में एक दर्जन से अधिक पार्कों का निर्माण कराया गया है। वहीं, इन पार्कों के निर्माण व सौंदर्यीकरण के लिए लाखों रुपये यह सोचकर खर्च किए गए हैं कि इन पार्कों के नजदीक रहने वाले लोग सुबह-शाम टहल सके और बच्चे अपने मनोरंजन के लिए इन पार्कों का उपयोग कर सकें, लेकिन शहर में स्थित नगरपालिका को एक भी पार्क उपयोग के लायक नहीं है। वहीं, नगरपालिका ने अपने पार्कों को स्थानीय लोगों के उपयोग के लायक बनाने के बदले अन्य विभाग के पार्कों को चमकाने में लगी हुई है। शहर के बीचों-बीच करीब दो से ढाई एकड़ जमीन पर बना चंद्रशेखर उद्यान पार्क (कंपनी बाग) पर जिला उद्यान विभाग का स्वामित्व है। नगरपालिका ने जनहित में इस जिला उद्यान विभाग के कंपनी बाग में कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए हैं। पालिका ने कंपनी बाग को आधुनिक पार्क बना दिया है।
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कंपनी बाग में पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, प्रसाधन केंद्र, टहलने के लिए पक्के फुटपाथ, आधुनिक फव्वारे, चाइनीज हब व जिम-योगशाला का निर्माण करा दिया हैं। वहीं, दूसरी ओर नगरपालिका के अपने पार्कों में लोगों के लिए बैठने, टहलने, प्रकाश, साफ-सफाई, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई पाई है। यही करण है, कोई भी नागरिक इन पार्कों में झांकने भी नहीं जाता है। नगर पालिका ने हाल ही में शहर के मुख्य चौराहों पर सौंदर्यीकरण के लिए बने छोटे-छोटे पार्कों का जीर्णोद्घार तो कर दिया है, लेकिन जनता के उपयोग में आने वाले लगभग समस्त पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
पालिका के बदहाल पार्क
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क : शहर के जेल चौराहा स्थित वार्ड नंबर 03 में काफी पुराना पार्क है। वर्तमान में इस पार्क की चार दीवारी के भीतर केवल बाबा साहब की प्रतिमा ही शेष रह गई है। बदहाल इस पार्क में टहलने के लिए न तो फुटपाथ है और न ही बैठने के लिए कुर्सी, क्यारी आदि की कोई व्यवस्था नहीं है, चारों ओर केवल बड़ी-बड़ी घास जमी हुई है।
मान्यवर कांशीराम पार्क : शहर के वार्ड पांच में बयाने नाले के किनारे बना यह पार्क भी काफी बदतर हालत में है। पार्क के गेट पर भीतर से ताला डला हुआ है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पार्क में कोई भी नागरिक झांकने भी नहीं आता है। रखरखाव के अभाव में यह बड़ी-बड़ी व कंटीली झाड़ियों के कारण वनीय क्षेत्र की तरह दिखने लगा है। झाड़ियों में पार्क का पक्का रास्ता तक गायब हो गया है।
राजवैद्य पं. तुलसीराम पार्क : वार्ड नंबर 10 में चर्च के पीछे बने इस पार्क में करीब आधा फुट तक बारिश का पानी जमा है, जिसमें काई व अन्य गंदगी एकत्रित हो गई है। पार्क में बना फुटपाथ काई व घास में नदारद हो गया है। पार्क में कोई भी साधन उपलब्ध नहीं हैं।
महिला पार्क : जिलाधिकारी आवास के पास बना पार्क केवल महिलाओं के लिए लिए है, लेकिन इस पार्क का उपयोग महिलाएं नहीं कर पा रही हैं। जेल चौराहे का पार्क : राजकीय पुस्तकालय के सामने चौराहे पर बना छोटा पार्क चारों ओर से अतिक्रमण की चपेट में है। अस्थायी गुटियों, खोखों व होर्डिंगों ने इस पार्क को चारों से ढक लिया है।
सुपर मार्केट पाके पीछे पार्क : नगरपालिका ने हाल ही में लाखों रुपये की लागत से पार्कों का निर्माण कराया है, लेकिन पूरे पार्कों में सीसी व पेवर ब्रेक्स बिछे होने के कारण यह केवल नाम मात्र के लिए ही पार्क है। इसी तरह शहर में बने नगरपालिका के अन्य पार्कों की स्थिति भी बदहाल है। ा है।
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शहर में विभिन्न स्थानों पर छोटे-बड़े कुल एक दर्जन से अधिक पार्क हैं, जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी नगरपालिका की है। लेकिन, नगरपालिका अपने पार्कों के प्रति जिम्मेदारियों को दरकिनार करते हुए अन्य विभागों के पार्क को चमकाने में लगी हुई है।
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शहर की कुल आबादी दो लाख का आंकड़ा पार कर गई है, नागरिकों की सुविधा के लिए नगर में विभिन्न स्थानों पर नगरपालिका द्वारा पूर्व में एक दर्जन से अधिक पार्कों का निर्माण कराया गया है। वहीं, इन पार्कों के निर्माण व सौंदर्यीकरण के लिए लाखों रुपये यह सोचकर खर्च किए गए हैं कि इन पार्कों के नजदीक रहने वाले लोग सुबह-शाम टहल सके और बच्चे अपने मनोरंजन के लिए इन पार्कों का उपयोग कर सकें, लेकिन शहर में स्थित नगरपालिका को एक भी पार्क उपयोग के लायक नहीं है। वहीं, नगरपालिका ने अपने पार्कों को स्थानीय लोगों के उपयोग के लायक बनाने के बदले अन्य विभाग के पार्कों को चमकाने में लगी हुई है। शहर के बीचों-बीच करीब दो से ढाई एकड़ जमीन पर बना चंद्रशेखर उद्यान पार्क (कंपनी बाग) पर जिला उद्यान विभाग का स्वामित्व है। नगरपालिका ने जनहित में इस जिला उद्यान विभाग के कंपनी बाग में कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए हैं। पालिका ने कंपनी बाग को आधुनिक पार्क बना दिया है।
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कंपनी बाग में पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, प्रसाधन केंद्र, टहलने के लिए पक्के फुटपाथ, आधुनिक फव्वारे, चाइनीज हब व जिम-योगशाला का निर्माण करा दिया हैं। वहीं, दूसरी ओर नगरपालिका के अपने पार्कों में लोगों के लिए बैठने, टहलने, प्रकाश, साफ-सफाई, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई पाई है। यही करण है, कोई भी नागरिक इन पार्कों में झांकने भी नहीं जाता है। नगर पालिका ने हाल ही में शहर के मुख्य चौराहों पर सौंदर्यीकरण के लिए बने छोटे-छोटे पार्कों का जीर्णोद्घार तो कर दिया है, लेकिन जनता के उपयोग में आने वाले लगभग समस्त पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
पालिका के बदहाल पार्क
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क : शहर के जेल चौराहा स्थित वार्ड नंबर 03 में काफी पुराना पार्क है। वर्तमान में इस पार्क की चार दीवारी के भीतर केवल बाबा साहब की प्रतिमा ही शेष रह गई है। बदहाल इस पार्क में टहलने के लिए न तो फुटपाथ है और न ही बैठने के लिए कुर्सी, क्यारी आदि की कोई व्यवस्था नहीं है, चारों ओर केवल बड़ी-बड़ी घास जमी हुई है।
मान्यवर कांशीराम पार्क : शहर के वार्ड पांच में बयाने नाले के किनारे बना यह पार्क भी काफी बदतर हालत में है। पार्क के गेट पर भीतर से ताला डला हुआ है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पार्क में कोई भी नागरिक झांकने भी नहीं आता है। रखरखाव के अभाव में यह बड़ी-बड़ी व कंटीली झाड़ियों के कारण वनीय क्षेत्र की तरह दिखने लगा है। झाड़ियों में पार्क का पक्का रास्ता तक गायब हो गया है।
राजवैद्य पं. तुलसीराम पार्क : वार्ड नंबर 10 में चर्च के पीछे बने इस पार्क में करीब आधा फुट तक बारिश का पानी जमा है, जिसमें काई व अन्य गंदगी एकत्रित हो गई है। पार्क में बना फुटपाथ काई व घास में नदारद हो गया है। पार्क में कोई भी साधन उपलब्ध नहीं हैं।
महिला पार्क : जिलाधिकारी आवास के पास बना पार्क केवल महिलाओं के लिए लिए है, लेकिन इस पार्क का उपयोग महिलाएं नहीं कर पा रही हैं। जेल चौराहे का पार्क : राजकीय पुस्तकालय के सामने चौराहे पर बना छोटा पार्क चारों ओर से अतिक्रमण की चपेट में है। अस्थायी गुटियों, खोखों व होर्डिंगों ने इस पार्क को चारों से ढक लिया है।
सुपर मार्केट पाके पीछे पार्क : नगरपालिका ने हाल ही में लाखों रुपये की लागत से पार्कों का निर्माण कराया है, लेकिन पूरे पार्कों में सीसी व पेवर ब्रेक्स बिछे होने के कारण यह केवल नाम मात्र के लिए ही पार्क है। इसी तरह शहर में बने नगरपालिका के अन्य पार्कों की स्थिति भी बदहाल है। ा है।