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शीतल पेय का कारोबार ठप, दुकानदारों बैठे हाथ पर हाथ धरे
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डोंगरा खुर्द/ ललितपुर। बेरहम कोरोना ने ठंडे पेय पदार्थों का कारोबार चौपट कर दिया है। लगातार दूसरे साल भी रोजगार नहीं मिलने के कारण इस कारोबार से जुड़े लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। ऐसे में उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे पेट पाला जाए।
गर्मियों का मौसम आते ही शीतल पेय का करोबार करने वाले दुकानदारों को रोजगार मिलने की उम्मीद जाग जाती है लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते पिछले वर्ष की तरह इस बार भी ठंडे का कारोबार ठंडा नजर आ रहा है। आलम यह है की ठंडा पेय पदार्थ के सीजन में अच्छा खासा करोबार करने वाले दुकानदार इस समय हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। गर्मियों का सीजन आते ही गांव हो या शहर, हर जगह शीतल पेय की दुकानें सज जाती है। आइसक्रीम, कुल्फी, बर्फ के गोले, आइसक्रीम कोन, लस्सी, फालूदा, गन्ने का रस, शिकंजी, कोल्डड्रिंक्स, सोडा वाटर आदि का कारोबार चल निकलता था। इस करोबार से छोटे से छोटे गांव में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिल जाता था। छोटे- छोटे बच्चे भी आइसक्रीम बेचकर कुछ पैसा कमा लेते थे । शीतल पेय का कारोबार लगभग चार- पांच माह चल जाता था और इस कारोबार से कम समय में दुकानदारों को अच्छा मुनाफा मिल जाता था।
लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते पिछले वर्ष की भांति इस बार भी ठंडे का कारोबार लगभग ठप है। दुकानों में कोल्डड्रिंक्स भरी पड़ी हैं लेकिन कोरोना संक्रमण के डर से लोगों ने शीतल पेय के सेवन से तौबा कर ली है। इस बार ठंडे का कारोबार करने वाले दुकानदारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है और उनके चेहरे पर मायूसी छाई हुई है।
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कोरोना महामारी के चलते दो साल से ठंडा के कारोबार में भारी गिरावट आई है। लोग इसको पीना पसंद नहीं कर रहे हैं जिससे ठंडे की बिक्री नहीं हो रही है।
- राहुल जायसवाल
दो साल से गन्ना के जूस की बिक्री कम हो रही है। गांव- गांव घूमकर मजदूरी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
- सुरेंद्र सिंह
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गर्मियों का मौसम आते ही शीतल पेय का करोबार करने वाले दुकानदारों को रोजगार मिलने की उम्मीद जाग जाती है लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते पिछले वर्ष की तरह इस बार भी ठंडे का कारोबार ठंडा नजर आ रहा है। आलम यह है की ठंडा पेय पदार्थ के सीजन में अच्छा खासा करोबार करने वाले दुकानदार इस समय हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। गर्मियों का सीजन आते ही गांव हो या शहर, हर जगह शीतल पेय की दुकानें सज जाती है। आइसक्रीम, कुल्फी, बर्फ के गोले, आइसक्रीम कोन, लस्सी, फालूदा, गन्ने का रस, शिकंजी, कोल्डड्रिंक्स, सोडा वाटर आदि का कारोबार चल निकलता था। इस करोबार से छोटे से छोटे गांव में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिल जाता था। छोटे- छोटे बच्चे भी आइसक्रीम बेचकर कुछ पैसा कमा लेते थे । शीतल पेय का कारोबार लगभग चार- पांच माह चल जाता था और इस कारोबार से कम समय में दुकानदारों को अच्छा मुनाफा मिल जाता था।
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लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते पिछले वर्ष की भांति इस बार भी ठंडे का कारोबार लगभग ठप है। दुकानों में कोल्डड्रिंक्स भरी पड़ी हैं लेकिन कोरोना संक्रमण के डर से लोगों ने शीतल पेय के सेवन से तौबा कर ली है। इस बार ठंडे का कारोबार करने वाले दुकानदारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है और उनके चेहरे पर मायूसी छाई हुई है।
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कोरोना महामारी के चलते दो साल से ठंडा के कारोबार में भारी गिरावट आई है। लोग इसको पीना पसंद नहीं कर रहे हैं जिससे ठंडे की बिक्री नहीं हो रही है।
- राहुल जायसवाल
दो साल से गन्ना के जूस की बिक्री कम हो रही है। गांव- गांव घूमकर मजदूरी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
- सुरेंद्र सिंह