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बच्चे मरते रहे पखवाड़ा चलता रहा

Thu, 11 Aug 2016 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 11 Aug 2016 01:38 AM IST
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Children are dying goes Fortnight
hospital, lalitpur news - फोटो : demo
ललितपुर। जनपद में बारिश के मौसम में उल्टी-दस्त की बीमारियों से जहां तीन मासूमों की मौत हो गई, वहीं कई इलाकों में दर्जनों लोग डायरिया की चपेट में हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि 26 जुलाई से 7 अगस्त के बीच पूरे जनपद में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा केवल औपचारिक रूप से चलता रहा। अगर इस कार्यक्रम को गंभीरता से लिया गया होता तो शायद डायरिया से तीन मासूमों को अपनी जान नहीं गंवानी होती और न ही दर्जनों लोगों को डायरिया की बीमारी की चपेट में आना पड़ता।
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पिछले हफ्ते कैलगुवां गांव में एक ही परिवार के दो मासूम सहित तीन बच्चों की मौत उल्टी-दस्त के कारण हो गई थी। विडंबना देखिए कि जिस दौरान बच्चों की मौत हुई, उसी दौरान पूरे जनपद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत उल्टी-दस्त पर नियंत्रण करने के सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा आयोजित होता रहा। वहीं ग्राम सैदपुर के कछयाना मोहल्ले में दो दर्जन से ज्यादा लोगों को डायरिया की बीमारी होने के कारण ललितपुर, महरौनी, टीकमगढ़, ग्वालियर के अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा है। पहले यह कार्यक्रम 11 जुलाई से 23 जुलाई के बीच आयोजित होना था, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा की शुरूआत होने के बाद इस कार्यक्रम को आगे के लिए टाल दिया गया था।
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 इस कार्यक्रम को जनपद में 26 जुलाई से शुरू किया गया। इस कार्यक्रम के लिए जनपद में स्वास्थ्य विभाग को 7 लाख 79 हजार 170 रुपये आवंटित किए गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बजट तो पूरा खर्च कर दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। ग्राम कैलगुवां में जहां पर तीन मासूमों की मौत हुई है वहीं, ग्राम सैदपुर में जहां दर्जनों ग्रामीण डायरिया की चपेट में है। ये दोनों गांव जनपद के जिले के विकसित गांवों में की श्रेणी में आते हैं। अगर इन दोनों गांवों में दस्त नियंत्रण पखवाड़े का यह हाल रहा है, तो दूर ग्रामीण अंचलों के गांवों में कितना काम हुआ होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।  
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ऐसे होता है कार्यक्रम का क्रियान्वयन
सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के अंतर्गत जनपद केे सभी गांवों में आशा कार्यकत्रियों द्वारा अपने गांव में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सूची तैयार करनी होती है। इस सूची के बाद आशा कार्यकत्रियों द्वारा पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों वाले घरों में ओआरएस व जिंक पैकेट का वितरण किया जाना होता है। साथ ही कार्यकत्रियों द्वारा चार घरों के बीच ओआरएस घोल को बनाने व पिलाने का तरीका भी बताया जाता है। लेकिन पूरे जनपद में निर्धारित गाइड-लाइन के मुताबिक कोई काम नहीं हुआ। कुछ जगहों पर आशाओं को ओआरएस व जिंक पैकेट उपलब्ध करा दिए गए, लेकिन आशा कार्यकत्रियों द्वारा घर-घर जाकर ओआरएस व जिंक पैकेट उपलब्ध नहीं कराए गए। 

कहां खर्च हो गए साढ़े सात लाख रुपये
सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के अंतर्गत जनपद में स्वास्थ्य विभाग कोे 7 लाख 79 हजार 170 रुपये का बजट आवंटित किया गया था। शासन की ओर से इस बजट को खर्च करने के लिए बकायदा गाइडलाइन भी जारी की गई थी। लेकिन जनपद में इस गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 1,62,535 बच्चों को ओआरएस व जिंक पैकेट वितरित किए जाने थे। यह काम जनपद में कार्यरत 861 आशाओं द्वारा कराया जाना था। ओआरएस पैकेट खरीदने के लिए 3 लाख 25 हजार 70 रुपये उपलब्ध कराए गए। चार गाड़ियों के संचालन के लिए चालीस हजार रुपये दिए गए। इसके साथ ही कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए 1 लाख 18 हजार रुपये उपलब्ध कराया गया। आईईसी कार्यक्रम के लिए 1 लाख 18 हजार रुपये उपलब्ध होने के बाद भी पूरे जनपद में कहीं पर भी कोई कार्यक्रम, पंपलेट, पेंटिंग आदि नहीं की गई। इसके साथ ही शासन द्वारा जारी गाइडलाइन में स्पष्ट लिखा था, कि कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय समाचार पत्रों, एफएम रेडियो, पत्रकार वार्त्ता, रैली आदि का आयोजन करें  लेकिन जनपद में कोई भी कदम प्रचार-प्रसार के लिए नहीं उठाया गया। 

एक फीता पड़ा डेढ़ लाख रुपये का
सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े का शुभारंभ करने के लिए शासन की ओर से डेढ़ लाख रुपये का बजट केवल जनपदीय व ब्लॉक स्तर पर शुभारंभ कार्यक्रम को उपलब्ध कराया गया था। दिलचस्प बात यह है, कि पूरे जनपद में कहीं पर पखवाड़े का शुुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन भव्य स्तर पर नहीं किया गया। जनपदीय स्तर पर गोविंद नगर में स्थित अरबन हेल्थ पोस्ट पर शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में ओआरएस कॉर्नर का शुभारंभ किया गया है। इस प्रकार स्वास्थ्य विभाग ने डेढ़ लाख रुपये खर्च कर एक फीता काटकर कार्यक्रम की गुपचुप शुरूआत कर दी। जबकि शासन की गाइड लाइन के अनुसार शुभारंभ मंत्री, विधायक या अन्य किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा कराया जाना था। जनपद में यह शुुुभारंभ सीएमओ डॉ. प्रताप सिंह से कराया गया था।


इनका कहना है
पूरे जनपद में सघन दस्त नियत्रंण पखवाड़े के तहत ओआरएस व जिंक पैकेट का वितरण कराया गया है। जहां पर वितरण नहीं किया गया है, उसकी शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
 - डॉ. डीसी दोहरे नोडल अधिकारी 
   - सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा कार्यक्रम
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