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कलश स्थापना के साथ मुनिश्री का चतुर्मास प्रारंभ
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चातुर्मास शुरू करते मुनिश्री
- फोटो : LALITPUR
महरौनी। मुनिश्री यादवेंद्र सागर महाराज का चातुर्मास कलश स्थापना के साथ शुरू हो गया। मुनिश्री ने कहा कि चातुर्मास काल एक स्थान पर रहकर धर्म, आराधना और तप करने का पावन समय रहता है। धर्म हमारे आचरण में होना चाहिए।
चातुर्मास कलश स्थापना का शुभारंभ आचार्यश्री विद्यासागर के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया गया। मंगलाचरण सपना सिंघई ने किया। चातुर्मास प्रथम स्वर्ण कलश स्थापना करने का सौभाग्य भागचंद व सुभाष चंद्र सिलौनिया के परिजनों को प्राप्त हुआ। मंगल कलशों की स्थापना करने का सौभाग्य हेमंत सिंघई, प्रेमचंद गुढ़ा, कोमल चंद्र सिंघई और रश्मि मलैया परिवार को प्राप्त हुआ। पाद प्रच्छालन करने का सौभाग्य रतनचंद डोंगरया को मिला। मुनिश्री को शास्त्र भेंट राजेंद्र मलैया ने किया।
मुनिश्री यादवेंद्र सागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास काल एक स्थान पर रहकर धर्म आराधना और तप करने का समय रहता है। धर्म हमारे आचरण में होना चाहिए। मनुष्य में दया, करुणा और ममता का समावेश होना चाहिए। चातुर्मास का यह कालखंड मानव मात्र के लिए धर्म आराधना का होता है। इस अवधि में हम परमात्मा के प्रति जितने अधिक समर्पित होंगे, उतना अधिक जीवन सफल होगा।
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इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत द्वारा उपस्थित महिलाओं और पुरुषों को मास्क बांटे गए। अध्यक्ष कोमल चंद्र सिंघई ने सभी से अपील की कि बिना मास्क के मंदिर में न आएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। कोरोना वायरस के बचाव के लिए सुरक्षा के संसाधनों का उपयोग करें। मंदिर में प्रवेश करने के पूर्व हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं और सैनिटाइजर हाथों में लगाएं। आभार प्रमोद सिंघई ने व्यक्त किया।
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चातुर्मास कलश स्थापना का शुभारंभ आचार्यश्री विद्यासागर के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया गया। मंगलाचरण सपना सिंघई ने किया। चातुर्मास प्रथम स्वर्ण कलश स्थापना करने का सौभाग्य भागचंद व सुभाष चंद्र सिलौनिया के परिजनों को प्राप्त हुआ। मंगल कलशों की स्थापना करने का सौभाग्य हेमंत सिंघई, प्रेमचंद गुढ़ा, कोमल चंद्र सिंघई और रश्मि मलैया परिवार को प्राप्त हुआ। पाद प्रच्छालन करने का सौभाग्य रतनचंद डोंगरया को मिला। मुनिश्री को शास्त्र भेंट राजेंद्र मलैया ने किया।
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मुनिश्री यादवेंद्र सागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास काल एक स्थान पर रहकर धर्म आराधना और तप करने का समय रहता है। धर्म हमारे आचरण में होना चाहिए। मनुष्य में दया, करुणा और ममता का समावेश होना चाहिए। चातुर्मास का यह कालखंड मानव मात्र के लिए धर्म आराधना का होता है। इस अवधि में हम परमात्मा के प्रति जितने अधिक समर्पित होंगे, उतना अधिक जीवन सफल होगा।
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इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत द्वारा उपस्थित महिलाओं और पुरुषों को मास्क बांटे गए। अध्यक्ष कोमल चंद्र सिंघई ने सभी से अपील की कि बिना मास्क के मंदिर में न आएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। कोरोना वायरस के बचाव के लिए सुरक्षा के संसाधनों का उपयोग करें। मंदिर में प्रवेश करने के पूर्व हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं और सैनिटाइजर हाथों में लगाएं। आभार प्रमोद सिंघई ने व्यक्त किया।