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Lalitpur News: करोड़ों का राजस्व देने वाली मंडी में फैली अव्यवस्था
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सड़कों पर गड्ढे और रेलिंग टूटी, सफाई न होने से जमा हुआ कचरा, किसान और व्यापारी परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। हर साल लगभग 25 करोड़ का राजस्व देने वाली नवीन गल्ला मंडी परिसर में किसानों को सुविधाएं मिलना तो दूर अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। मंडी में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। दो दिन की बारिश के बाद यहां नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। यहां तक कि कई जगह सड़कें भी कीचड़युक्त होने से किसानों व पल्लेदारों को निकलने में परेशानी हो रही है। मंडी में जगह-जगह सड़कों पर गड्ढे हो गए हैं तो वहीं सड़कों के बीच बनाई गई रेलिंग भी टूट गई है।
वहीं, पानी की सुविधा न होने से मूत्रालयों में गंदगी फैली रहती है। ऐसे में मंडी में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। इस गंदगी के बीच किसान, व्यापारी और मजदूर कार्य करने के लिए मजबूर हैं। जनपद मुख्यालय पर स्थित नवीन कृषि उत्पादन मंडी में सभी तहसीलों के किसान अपनी उपज बेचने के लिए आते हैं। वहीं, सीमा से सटे मध्यप्रदेश के कई जनपदों के किसान भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचे हैं।
सीजन में मंडी में कई बार एक ही दिन में लगभग 30 से 40 हजार क्विंटल तक जिंस की आवक होती है। सीजन के समय मंडी में एक ही महीने में लगभग दो करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त होता है। कई किसान अपनी उपज बेचने के लिए रात देर शाम तक मंडी में रुके रहते हैं। मंडी में पीछे की ओर लगी एक हाईमास्ट लाइट अब तक ठीक नहीं हो सकी है। इससे उस क्षेत्र में अंधेरा पसरा रहता है। वहीं, कई प्याऊ की नलों की टोंटियां टूटी पड़ी हैं या सूखी पड़ी हैं।
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पूर्व सांसद उमा भारती की ओर से लगवाए गए प्याऊ से भी यहां किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं, मंडी के मुख्य गेट से प्रवेश के बाद सड़कों के मध्य लगाई गई रेलिंग व उसके पिलर तक टूट गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कई बार निरीक्षण कर व्यवस्थाएं सुधारने का वादा भी किया गया लेकिन बहुत अधिक सुधार नहीं हो सका है।
वर्जन
सड़क पर गड्ढों को भरने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। सफाई व्यवस्था कराई जा रही है। बारिश होने से कुछ स्थानों पर कीचड़ हो गया है, जिसकी सफाई कराई जाएगी। - भूपेंद्र राठौर, प्रभारी मंडी सचिव
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। हर साल लगभग 25 करोड़ का राजस्व देने वाली नवीन गल्ला मंडी परिसर में किसानों को सुविधाएं मिलना तो दूर अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। मंडी में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। दो दिन की बारिश के बाद यहां नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। यहां तक कि कई जगह सड़कें भी कीचड़युक्त होने से किसानों व पल्लेदारों को निकलने में परेशानी हो रही है। मंडी में जगह-जगह सड़कों पर गड्ढे हो गए हैं तो वहीं सड़कों के बीच बनाई गई रेलिंग भी टूट गई है।
वहीं, पानी की सुविधा न होने से मूत्रालयों में गंदगी फैली रहती है। ऐसे में मंडी में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। इस गंदगी के बीच किसान, व्यापारी और मजदूर कार्य करने के लिए मजबूर हैं। जनपद मुख्यालय पर स्थित नवीन कृषि उत्पादन मंडी में सभी तहसीलों के किसान अपनी उपज बेचने के लिए आते हैं। वहीं, सीमा से सटे मध्यप्रदेश के कई जनपदों के किसान भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचे हैं।
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सीजन में मंडी में कई बार एक ही दिन में लगभग 30 से 40 हजार क्विंटल तक जिंस की आवक होती है। सीजन के समय मंडी में एक ही महीने में लगभग दो करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त होता है। कई किसान अपनी उपज बेचने के लिए रात देर शाम तक मंडी में रुके रहते हैं। मंडी में पीछे की ओर लगी एक हाईमास्ट लाइट अब तक ठीक नहीं हो सकी है। इससे उस क्षेत्र में अंधेरा पसरा रहता है। वहीं, कई प्याऊ की नलों की टोंटियां टूटी पड़ी हैं या सूखी पड़ी हैं।
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पूर्व सांसद उमा भारती की ओर से लगवाए गए प्याऊ से भी यहां किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं, मंडी के मुख्य गेट से प्रवेश के बाद सड़कों के मध्य लगाई गई रेलिंग व उसके पिलर तक टूट गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कई बार निरीक्षण कर व्यवस्थाएं सुधारने का वादा भी किया गया लेकिन बहुत अधिक सुधार नहीं हो सका है।
वर्जन
सड़क पर गड्ढों को भरने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। सफाई व्यवस्था कराई जा रही है। बारिश होने से कुछ स्थानों पर कीचड़ हो गया है, जिसकी सफाई कराई जाएगी। - भूपेंद्र राठौर, प्रभारी मंडी सचिव