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Lalitpur News: चंदेरी दे रही द्वापर काल की गवाही, बुआ के घर आते थे श्रीकृष्ण
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ललितपुर। भगवान श्रीकृष्ण का ललितपुर से सटे समीपवर्ती चंदेरी से भी नाता रहा है। महाभारत कालीन चेदि देश अथवा चेदि राष्ट्र की राजधानी के रूप में विख्यात बूढ़ी चंदेरी का शासक शिशुपाल था। वह श्रीकृष्ण की बुआ का पुत्र था। अपनी बुआ के घर श्रीकृष्ण आते-जाते रहते थे। आज भी शिशुपाल के महल के अवशेष यहां पर मौजूद हैं, जो द्वापर काल की गवाही देते हैं। इन्हें देखने के लिए काफी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर भगवत नारायण शर्मा बताते हैं कि मान्यता के अनुसार ललितपुर से सटे मध्य प्रदेश का चंदेरी नगर महाभारत काल में चेदि देश अथवा चेदि राष्ट्र था। इसकी राजधानी के रूप में विख्यात बूढ़ी चंदेरी है। वहां का शासक शिशुपाल था। यह वही राजा शिशुपाल था, जिसे इंद्रप्रस्थ में हुए यज्ञ आयोजन में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से मारा था। वर्तमान में बूढ़ी चंदेरी स्थित पुरातन ऐतिहासिक अवशेषों को आज भी क्षेत्रवासी राजा शिशुपाल की गढ़ी संबोधित करते हुए परिचय कराते हैं। सूनसान शांत घने जंगलों, वन प्राणियों से भरपूर और उर्वशी नामक नदी के किनारे बसी पुरानी चंदेरी आज बूढ़ी चंदेरी के नाम से जानी जाती है। यह ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व से सराबोर स्थल आज भी कई तरह की जानकारियां अपने गर्भ में छुपाए हुए है।
इतिहास में चंदेरी का महत्वपूर्ण स्थान
घने जंगलों में उर्वशी नामक नदी के किनारे इस नगरी में साक्ष्य के रूप में आबादी के निशान बिखरे पड़े हैं। प्राचीन कुआं, प्राचीन लंबी सुरक्षा दीवार, सनातन मंदिर, मंदिरों के अवशेष, जैन मंदिरों की श्रंखला, सती चिह्न एवं पाए गए शिलालेख इत्यादि प्रामाणिक साक्ष्य हैं। यह भी संभव है कि महाभारत कालीन चेदि देश की राजधानी होने से इस नगरी को 'चेदिपुरी' या 'चेदिगिरि' कहा जाता था, जिसका कालांतर में नाम चंदेरी हो गया। भारतीय इतिहास में चंदेरी का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
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शिशुपाल से जुड़ा है चंदेरी साड़ियों का इतिहास
यहां की चंदेरी और महेश्वरी साड़ी विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। बताया जाता है कि द्वापर युग में चेदी नरेश शिशुपाल ने चंदेरी सिल्क की खोज की थी और वह इस कपड़े के वस्त्र पहनता था। शिशुपाल, पांडवों और कौरवों का भाई था और श्री कृष्ण की भी बुआ का पुत्र था। महाभारत काल में श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन से शिशुपाल का वध किया था।
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नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर भगवत नारायण शर्मा बताते हैं कि मान्यता के अनुसार ललितपुर से सटे मध्य प्रदेश का चंदेरी नगर महाभारत काल में चेदि देश अथवा चेदि राष्ट्र था। इसकी राजधानी के रूप में विख्यात बूढ़ी चंदेरी है। वहां का शासक शिशुपाल था। यह वही राजा शिशुपाल था, जिसे इंद्रप्रस्थ में हुए यज्ञ आयोजन में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से मारा था। वर्तमान में बूढ़ी चंदेरी स्थित पुरातन ऐतिहासिक अवशेषों को आज भी क्षेत्रवासी राजा शिशुपाल की गढ़ी संबोधित करते हुए परिचय कराते हैं। सूनसान शांत घने जंगलों, वन प्राणियों से भरपूर और उर्वशी नामक नदी के किनारे बसी पुरानी चंदेरी आज बूढ़ी चंदेरी के नाम से जानी जाती है। यह ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व से सराबोर स्थल आज भी कई तरह की जानकारियां अपने गर्भ में छुपाए हुए है।
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इतिहास में चंदेरी का महत्वपूर्ण स्थान
घने जंगलों में उर्वशी नामक नदी के किनारे इस नगरी में साक्ष्य के रूप में आबादी के निशान बिखरे पड़े हैं। प्राचीन कुआं, प्राचीन लंबी सुरक्षा दीवार, सनातन मंदिर, मंदिरों के अवशेष, जैन मंदिरों की श्रंखला, सती चिह्न एवं पाए गए शिलालेख इत्यादि प्रामाणिक साक्ष्य हैं। यह भी संभव है कि महाभारत कालीन चेदि देश की राजधानी होने से इस नगरी को 'चेदिपुरी' या 'चेदिगिरि' कहा जाता था, जिसका कालांतर में नाम चंदेरी हो गया। भारतीय इतिहास में चंदेरी का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
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शिशुपाल से जुड़ा है चंदेरी साड़ियों का इतिहास
यहां की चंदेरी और महेश्वरी साड़ी विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। बताया जाता है कि द्वापर युग में चेदी नरेश शिशुपाल ने चंदेरी सिल्क की खोज की थी और वह इस कपड़े के वस्त्र पहनता था। शिशुपाल, पांडवों और कौरवों का भाई था और श्री कृष्ण की भी बुआ का पुत्र था। महाभारत काल में श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन से शिशुपाल का वध किया था।