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एलयूसीसी प्रकरण: जेल से रिहा होते ही चेयरमैन को फिर किया गिरफ्तार, कोर्ट में पेश करते ही रिहाई
Wed, 23 Jul 2025 09:48 PM IST
अनुज कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Published by: अनुज कुमार
Updated Wed, 23 Jul 2025 09:48 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के ललितपुर में चिटफंड कंपनी एलयूसीसी के मध्य प्रदेश के चेयरमैन और उनकी पत्नी को जेल से रिहा होते ही गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद कोर्ट में लंबी बहस चली और दोनों की गिरफ्तारी को कोर्ट ने अवैध बता दिया।
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जेल में रिहा होते ही चेयरमैन को फिर किया गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चिटफंड कंपनी एलयूसीसी के मध्य प्रदेश के चेयरमैन और उसकी पत्नी मंगलवार को न्यायालय के आदेश पर रिहा होने के बाद जेल के बाहर ही कोतवाली पुलिस उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ्तार करने पहुंच गई। आरोपी दंपती के अधिवक्ता ने रात में महिला की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रूलिंग बताई तो पुलिस ने सिर्फ चेयरमैन को गिरफ्तार कर लिया और बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने पुलिस द्वारा चेयरमैन की गिरफ्तारी को अवैधानिक मानते हुए फिर से रिहा करने के आदेश दिए, जिस पर पुलिस ने उसे छोड़ दिया।
चिटफंड कंपनी एलयूसीसी एमपी के चेयरमैन आरोपी अनुराग बंसल और उसकी पत्नी आरती बंसल निवासी धुरीताल पश्चिम थाना बैढ़न, जिला सिंगरौली, मध्य प्रदेश हाल निवासी शिव वाटिंक थाना लहसुडिया जिला इंदौर को ललितपुर पुलिस ने 29 जून को गिरफ्तार जनपद न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम/विशेष न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई के दौरान विवेचक ने इस मामले में आरोपी दंपती का चौदह दिन का न्यायिक रिमांड प्रस्तुत किया जिस पर न्यायाधीश ने उनकी गिरफ्तारी अवैध व उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जाना पाते हुए दंपती को एलयूसीसी प्रकरण में दर्ज किए गए बारह मुकदमों में व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने के आदेश जारी कर दिए।
अदालत के आदेश पर रात में जैसे ही दंपती को जिला कारागार से रिहा किया गया तो कोतवाली पुलिस फोर्स के साथ उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जेल परिसर पहुंच गई। पुलिस ने घेराबंदी कर जैसे ही दंपती को गिरफ्तार करने का प्रयास किया तो उनके अधिवक्ता ने पुलिस को हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जिस पर पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग बताते हुए कहा कि शाम छह बजे के बाद किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। इस पर अधिवक्ता और पुलिस में काफी देर तक बहस हुई। फिर पुलिस ने आरोपी अनुराग बंसल को एक अन्य मामले में आरोपी बताते हुए गिरफ्तार कर लिया।
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हालांकि, आरोपी महिला को गिरफ्तार नहीं किया। इस मामले में बुधवार को विवेचक ने आरोपी अनुराग को फिर से न्यायालय में पेश किया जिस पर न्यायाधीश यादवेंद्र सिंह प्रथम ने मामले की गंभीरता और प्रस्तुत न्यायिक निर्णयों का परीक्षण कर आरोपी अनुराग बंसल के रिमांड को अस्वीकार करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के अधिवक्ता कैप्टन अनुपम वर्मा ने कहा कि उच्चतम और उच्च न्यायालयों ने अवैध गिरफ्तारी के विरुद्ध स्पष्ट दिशा निर्देश दिए हैं, लेकिन पुलिस ने इन नियमों का खुला उल्लंघन किया। न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर रिहा करना नागरिक स्वतंत्रता की विजय है। यह आदेश पुलिस को चेतावनी देता है कि कानून के शासन से ऊपर कोई नहीं है।
इस मामले में किया था गिरफ्तार
पुलिस ने थाना नाराहट में दर्ज मुकदमा के अंतर्गत धारा 318(4), 338, 336 (3), 340 (2), 352, 351(3) व अधिनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम 2019 की धारा 3/21 में अनुराग बंसल को बुधवार की रात को गिरफ्तार किया था।
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चिटफंड कंपनी एलयूसीसी एमपी के चेयरमैन आरोपी अनुराग बंसल और उसकी पत्नी आरती बंसल निवासी धुरीताल पश्चिम थाना बैढ़न, जिला सिंगरौली, मध्य प्रदेश हाल निवासी शिव वाटिंक थाना लहसुडिया जिला इंदौर को ललितपुर पुलिस ने 29 जून को गिरफ्तार जनपद न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम/विशेष न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई के दौरान विवेचक ने इस मामले में आरोपी दंपती का चौदह दिन का न्यायिक रिमांड प्रस्तुत किया जिस पर न्यायाधीश ने उनकी गिरफ्तारी अवैध व उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जाना पाते हुए दंपती को एलयूसीसी प्रकरण में दर्ज किए गए बारह मुकदमों में व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने के आदेश जारी कर दिए।
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अदालत के आदेश पर रात में जैसे ही दंपती को जिला कारागार से रिहा किया गया तो कोतवाली पुलिस फोर्स के साथ उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जेल परिसर पहुंच गई। पुलिस ने घेराबंदी कर जैसे ही दंपती को गिरफ्तार करने का प्रयास किया तो उनके अधिवक्ता ने पुलिस को हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जिस पर पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग बताते हुए कहा कि शाम छह बजे के बाद किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। इस पर अधिवक्ता और पुलिस में काफी देर तक बहस हुई। फिर पुलिस ने आरोपी अनुराग बंसल को एक अन्य मामले में आरोपी बताते हुए गिरफ्तार कर लिया।
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हालांकि, आरोपी महिला को गिरफ्तार नहीं किया। इस मामले में बुधवार को विवेचक ने आरोपी अनुराग को फिर से न्यायालय में पेश किया जिस पर न्यायाधीश यादवेंद्र सिंह प्रथम ने मामले की गंभीरता और प्रस्तुत न्यायिक निर्णयों का परीक्षण कर आरोपी अनुराग बंसल के रिमांड को अस्वीकार करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के अधिवक्ता कैप्टन अनुपम वर्मा ने कहा कि उच्चतम और उच्च न्यायालयों ने अवैध गिरफ्तारी के विरुद्ध स्पष्ट दिशा निर्देश दिए हैं, लेकिन पुलिस ने इन नियमों का खुला उल्लंघन किया। न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर रिहा करना नागरिक स्वतंत्रता की विजय है। यह आदेश पुलिस को चेतावनी देता है कि कानून के शासन से ऊपर कोई नहीं है।
इस मामले में किया था गिरफ्तार
पुलिस ने थाना नाराहट में दर्ज मुकदमा के अंतर्गत धारा 318(4), 338, 336 (3), 340 (2), 352, 351(3) व अधिनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम 2019 की धारा 3/21 में अनुराग बंसल को बुधवार की रात को गिरफ्तार किया था।