फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   central minister uma bharti

केंद्रीय मंत्री के क्षेत्र में उनके विभाग को दी झूठी रिपोर्ट

Sat, 16 Apr 2016 12:21 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Sat, 16 Apr 2016 12:21 AM IST
विज्ञापन
central minister uma bharti
कचनाोदा बांध्‍ा - फोटो : demo pic
ललितपुर। किसानों को सिंचाई साधन उपलब्ध कराने के लिए सिंचाई विभाग ने कचनौदा बांध निर्माण के लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से करोड़ों रुपये का अनुदान प्राप्त किया, लेकिन यह अनुदान नियम मुताबिक कहीं ऋण में न बदल जाए, इसलिए मंत्रालय को झूठी रिपोर्ट भेज दी। दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय जल  संसाधन  मंत्रालय की कैबिनेट मंत्री उमा भारती के संसदीय क्षेत्र में ही कचनौदा बांध का निर्माण हुआ है।
विज्ञापन



कचनौदा बांध को सजनाम नदी पर बनाया गया है, इसके निर्माण पर 4 अरब 16 करोड़ 67 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। साथ ही इसे केंद्र सरकार के त्वरित सिंचाई प्रबंधन कार्यक्रम (एआईबीपी) में  शामिल कर करोड़ों रुपये का अनुदान प्राप्त कर लिया गया। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर से एआईबीपी योजना में अनुदान देते समय कई शर्तें लागू की जाती हैं। जिसमें, मुख्य शर्त यह है कि एआईबीपी कार्यक्रम में शामिल प्रोजेक्ट को अगर तय सीमा में निर्मित नहीं किया जाता है, तो राज्य सरकार  को दी गई अनुदान राशि को ऋण में परिवर्तित कर दिया जाता है और ऋण को मय ब्याज  के वसूल किया जाता है।
विज्ञापन



इस स्थिति से बचने के लिए सिंचाई निर्माण खंड (तृृतीय) ने कचनौदा बांध के पूर्ण होने की झूठी रिपोर्ट शासन को भेजकर केंद्रीय मंत्रालय को भिजवा दी, जबकि हकीकत में बांध से सिंचाई के लिए नहरों का निर्माण शुरू ही नहीं किया गया है। बिना नहरों के निर्माण का बांध कैसे पूर्ण हो गया, इसको जांचे बिना ही केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने भी रिपोर्ट को हरी झंडी दिखा दी। जल संसाधन मंत्रालय  की ओर से कचनौदा बांध को पूर्ण करने की पहली तय समय सीमा मार्च 2012 तय की गई थी, लेकिन इसको बढ़ाकर  मार्च 2014 कर दिया गया। कचनौदा बांध से 1,080  हेक्टेयर जमीन को सिंचाई  उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए चार किमी लंबी नहर का निर्माण होना है। कचनौदा बांध का उद्घाटन हो चुका है, लेकिन अभी तक नहरों के लिए न तो जमीन का अधिग्रहण किया गया है और न ही नहर का काम शुरू हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन




किसान देखता रहा, पानी बिकता रहा
कचनौदा बांध के निर्माण के लिए 10 गांवों की 2,371 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहण के लिए चिह्नित किया गया था, जिसमें से अभी केवल 1,248 हेक्टेयर जमीन का  मुआवजा ही वितरित किया गया है। बिना मुआवजा वितरित किए पिछले साल बांध को काफी हद तक भर लिया गया। अक्तूबर माह तक बांध में पानी रहने के कारण डूब क्षेत्र वाले किसानों की खरीफ की फसल बोई ही नहीं गई, किसानों को उम्मीद थी कि रबी की फसल में बांध के पानी का उपयोग हो पाएगा, लेकिन यह केवल सपना साबित हुआ और रबी की फसल के समय तक बांध का पूरा पानी बिजली कंपनी को उपलब्ध करा दिया गया। इस तरह किसान अपनी जमीन पर एकत्रित पानी को बिकते देखता रह गया।



एआईबीपी में अनुुदान को ऋण में परिवर्तित करने का नियम है, लेकिन कचनौदा बांध के  मामले में जनहित को देखते हुए शिथिलता दी गई है। बिना नहर का बांध पूर्ण नहीं माना जा सकता है, लेकिन सिंचाई विभाग ने जल्द ही नहर बनाने का  आश्वासन  दिया था।
- राजेश यादव, निदेशक सेंट्रल वाटर  कमीशन (बुंदेलखंड रीजन)  

अनुदान को ऋण में बदलने का कोई नियम नहीं है और कचनौदा बांध की नहरों के काम के लिए बजट की मांग की गई है।
- विनय श्रीवास्तव, तत्कालीन अधिशाषी अभियंता/ अधीक्षण अभियंता, झांसी, सिंचाई निर्माण खंड (तृतीय)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed