बुंदेली भाषा के इ्रस्तेमाल से शिक्षण में आएगी रोचकता

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Sat, 21 Dec 2019 01:39 AM IST
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ललितपुर। स्कूल में अब मस्साब मोड़ीमोड़न खौं चिरवा चिरइया की कानियां सुनाहैं । बुंदेली कविताएं, पांच बरस के बालक भए ले पाटी पांडे़ कैं गए भी अब स्कूल की पढ़ाई का हिस्सा बनेंगी। यह निर्णय शुक्रवार को नगर संसाधन केन्द्र में तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन के अवसर पर लिया गया। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि छोटे बच्चों को स्कूल में भी घर जैसा माहौल मिल सके, जिस तरह से परिवार में दादी, दादा और मां उन्हें बुंदेली भाषा में कहानियां, कविताएं व कहावतें सुनाते हैं, ऐसे ही अब स्कूल के शिक्षक उन्हें सुनाएंगे, इससे बच्चों की स्कूल आने में रुचि बढ़ेगी।
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यह प्रयोग कक्षा 1 व 2 के बच्चों पर किया जाएगा। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षण कार्य को प्रभावी बनाने के लिए नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसमें क्षेत्रीय भाषा के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इसे ध्यान में रखकर पिछले वर्ष लैंग्वेज लर्निंग फाउंडेशन व एससीआरटी के सहयोग से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस दौरान प्रतिभागियों ने कई गांवों में जाकर ग्रामीण परिवेश में प्रचलित बुंदेली कहानियों, कविताओं, पहेली, लोरी का संकलन किया गया था। गठित टीम द्वारा कक्षा 1 व 2 के लिए उपयोगी संग्रह को एकत्रित कर उसका ड्राफ्ट तैयार किया गया। इसके उपरांत तैयार सामग्री की प्रिटिंग, चित्रांकन का कार्य कराया गया। बहुत सी पुस्तकें, पोस्टर, बिग बुक, फ्लेश कार्ड भी तैयार किए गए। इसी संदर्भ में तीन दिवसीय कार्यशाला नगर संसाधन केंद्र में आयोजित की गई। इस मौके पर कक्षा कक्ष में इस सामग्री के प्रभावी उपयोग को लेकर चर्चा की गई। इसमें प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 व 2 के बच्चों को पढ़ाने वाले विभिन्न ब्लाक के लगभग 20 अध्यापकों को आमंत्रित किया गया। प्रथम दिवस साक्षरता व मौखिक भाषा के विकास के लिए तकनीकी सिद्धांत के बारे में चर्चा की गई एवं स्केफोल्डिंग के कॉन्सेप्ट को भी समझाया गया। द्वितीय दिवस बच्चों में ध्वनि चेतना व शब्दों को जोड़ना और कक्षा के लोकतंत्रात्मक वातावरण निर्माण पर विस्तृत चर्चा की गई। तृतीय दिवस कहानी के प्रस्तुतिकरण पर चर्चा की गई। अंत में तैयार सामग्री प्रतिभागियों को वितरित की गई। कार्यशाला में एलएलएफ की ओर से निधि काजी, आकांक्षा त्यागी, जितेन्द्र, प्रतिभागियों में अनंत तिवारी, ह्दयेश गोस्वामी, अश्रुति शर्मा, मंजूलता सिंह, सोमप्रकाश तिवारी, दीप्ती यादव, बृजेश तिवारी, प्रमोद साहू, लक्ष्मी तिवारी, आरती वर्मा, प्रीति त्रिपाठी, अनामिका जैन, नीलम, कृष्णकुमार पाठक, शीलचंद जैन, कंचनप्रभा बडौनियां, मयंक बबेले, उमाशंकर नामदेव, नीरज दुबे, उमेश झा, रामकिशोर विश्वकर्मा मौजूद रहे।
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