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देखरेख के अभाव में ढहता जा रहा बुदनी का सूर्य मंदिर
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भी सात मंजिला था बुदनी का सूर्य मंदिर अब दो मंजिला ही बचा है
- फोटो : LALITPUR
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ प्राचीन विरासतों को समेटे जिले का सूर्य मंदिर देखरेख के अभाव में ढह रहा है। यह मंदिर कभी सात मंजिल का था, देखरेख के अभाव में अब दो मंजिल ही बचा है। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में चंदेलों ने कराया था।
ललितपुर के प्राकृतिक सौंदर्य की वास्तविक छटा बरसात के मौसम में दिखाई देती है। यहां जगह-जगह प्राचीन एवं दर्शनीय स्थल मौजूद हैं। इनमें कई मंदिर एवं दर्शनीय स्थलों को पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन ले रखा है। इसके बाद भी उनकी सही तरीके से देखरेख नहीं हो पा रही है। लोगों का कहना है कि यदि पुरातत्व विभाग इन स्थलों को संरक्षित करने की दिशा में गंभीरता से प्रयास करता तो शायद जिले के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध मिलतीं।
ऐसे में तहसील पाली के अंतर्गत गांव बुदनी (नाराहट) का प्राचीन सूर्य मंदिर भी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। इस मंदिर को चंदेल काल में बनाया गया था। मंदिर में लगे पत्थरों की बेहतरीन नक्काशी लोगों को खूब आकर्षित करती है। इसमें भगवान के 24 अवतारों की मूर्तियां स्थापित हैं । इस मंदिर में आठ फीट ऊंची सूर्य भगवान की प्रतिमा स्थापित है, जिसके दोनों हाथ खंडित हैं। मंदिर में हमेशा अगरबत्ती की सुगंध सी आती रहती है। प्राचीन सूर्य भगवान मंदिर के पास बावड़ी बनी है, जिस पर बहुत बड़ी पत्थर की शिला रखी हुई है। मंदिर पर लेख हुआ है, जिसे कोई समझ नहीं पाता है। पूरे परिसर में सैकड़ों प्रतिमाएं छिन्न-भिन्न अवस्था में बिखरी पड़ी हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं, जिससे मंदिर बदहाल अवस्था में है।
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सैलानियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी
बुदनी स्थित सूर्य मंदिर के पास पेयजल, बिजली की कमी महसूस होती है, साथ ही मार्ग भी खस्ताहाल है। इसके अलावा सैलानी एवं दर्शनार्थियों को ठहरने की भी व्यवस्था नहीं है। मठों तक पहुंचने के लिए मार्ग कच्चा और पगडंडीनुमा है, जिससे सैलानियों को यहां आने-जाने में काफी असुविधा होती है। ग्रामीणों ने बताया कि पुरातत्व विभाग ने करीब पांच साल पहले चहारदीवारी का कार्य शुरू करवाया था जिसे आधा अधूरा ही छोड़ दिया है। इससे मंदिर की सुरक्षा नहीं हो पा रही है।
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कई दैवीय मूर्तियां भी विराजित हैं
सूर्य मंदिर के बाहरी हिस्से में बड़ी संख्या में विष्णु भगवान, राधाकृष्ण, हनुमानजी, शिवजी सहित कई दैवीय मूर्तियां विराजी हैं। पास ही एक बड़ी बावड़ी है, जिस पर बहुत बड़ी पत्थर की शिला रखी हुई है।
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पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर की रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जो भी कार्य यहां करवाया जाता है, उसे आधा अधूरा करके छोड़ दिया जाता है, जिससें प्राचीन धरोहरें सुरक्षित नहीं हैं। जितेन्द्र तिवारी बुदनी
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चंदेल कालीन सूर्य भगवान मंदिर पत्थरों की नक्काशी से बना हुआ है। यही नहीं, यहां 24 अवतारों की मूर्तियां हैं। इसके बाद भी मंदिर खंडहर होते जा रहे हैं। गिरिराज शरण रावत
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बुजुर्ग बताते हैं कि पूर्व में यह मंदिर सात मंजिला था, इसके ऊपर का जो दीपक रखा था, वह चंदेरी स्थित मंदिर के ऊपर रखे दीपक के बराबर था। मंदिर में सुगंधित खुशबू आती रहती है। वृंद्रावन तिवारी
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सैकड़ों की संख्या में मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं, जिनका रखरखाव नहीं हो रहा है। जिस कारण मूर्तियां धीरे-धीरे ग़ायब होतीं जा रही हैं। इसे देखरेख की जरूरत है, पुरातत्व विभाग को ध्यान देना चाहिए। प्रवीण कुमार
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जब से मंदिर विभाग के अधीनस्थ हुआ है, तब से यह ऐसा ही है। चहारदीवारी का जितना बजट आया था, उतना काम करा दिया गया है। जैसे ही और बजट मिलता है तो अधूरे काम को पूरा करा दिया जाएगा। रवि रस्तोगी अवर संरक्षण अभियंता भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
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ललितपुर के प्राकृतिक सौंदर्य की वास्तविक छटा बरसात के मौसम में दिखाई देती है। यहां जगह-जगह प्राचीन एवं दर्शनीय स्थल मौजूद हैं। इनमें कई मंदिर एवं दर्शनीय स्थलों को पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन ले रखा है। इसके बाद भी उनकी सही तरीके से देखरेख नहीं हो पा रही है। लोगों का कहना है कि यदि पुरातत्व विभाग इन स्थलों को संरक्षित करने की दिशा में गंभीरता से प्रयास करता तो शायद जिले के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध मिलतीं।
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ऐसे में तहसील पाली के अंतर्गत गांव बुदनी (नाराहट) का प्राचीन सूर्य मंदिर भी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। इस मंदिर को चंदेल काल में बनाया गया था। मंदिर में लगे पत्थरों की बेहतरीन नक्काशी लोगों को खूब आकर्षित करती है। इसमें भगवान के 24 अवतारों की मूर्तियां स्थापित हैं । इस मंदिर में आठ फीट ऊंची सूर्य भगवान की प्रतिमा स्थापित है, जिसके दोनों हाथ खंडित हैं। मंदिर में हमेशा अगरबत्ती की सुगंध सी आती रहती है। प्राचीन सूर्य भगवान मंदिर के पास बावड़ी बनी है, जिस पर बहुत बड़ी पत्थर की शिला रखी हुई है। मंदिर पर लेख हुआ है, जिसे कोई समझ नहीं पाता है। पूरे परिसर में सैकड़ों प्रतिमाएं छिन्न-भिन्न अवस्था में बिखरी पड़ी हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं, जिससे मंदिर बदहाल अवस्था में है।
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सैलानियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी
बुदनी स्थित सूर्य मंदिर के पास पेयजल, बिजली की कमी महसूस होती है, साथ ही मार्ग भी खस्ताहाल है। इसके अलावा सैलानी एवं दर्शनार्थियों को ठहरने की भी व्यवस्था नहीं है। मठों तक पहुंचने के लिए मार्ग कच्चा और पगडंडीनुमा है, जिससे सैलानियों को यहां आने-जाने में काफी असुविधा होती है। ग्रामीणों ने बताया कि पुरातत्व विभाग ने करीब पांच साल पहले चहारदीवारी का कार्य शुरू करवाया था जिसे आधा अधूरा ही छोड़ दिया है। इससे मंदिर की सुरक्षा नहीं हो पा रही है।
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कई दैवीय मूर्तियां भी विराजित हैं
सूर्य मंदिर के बाहरी हिस्से में बड़ी संख्या में विष्णु भगवान, राधाकृष्ण, हनुमानजी, शिवजी सहित कई दैवीय मूर्तियां विराजी हैं। पास ही एक बड़ी बावड़ी है, जिस पर बहुत बड़ी पत्थर की शिला रखी हुई है।
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पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर की रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जो भी कार्य यहां करवाया जाता है, उसे आधा अधूरा करके छोड़ दिया जाता है, जिससें प्राचीन धरोहरें सुरक्षित नहीं हैं। जितेन्द्र तिवारी बुदनी
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चंदेल कालीन सूर्य भगवान मंदिर पत्थरों की नक्काशी से बना हुआ है। यही नहीं, यहां 24 अवतारों की मूर्तियां हैं। इसके बाद भी मंदिर खंडहर होते जा रहे हैं। गिरिराज शरण रावत
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बुजुर्ग बताते हैं कि पूर्व में यह मंदिर सात मंजिला था, इसके ऊपर का जो दीपक रखा था, वह चंदेरी स्थित मंदिर के ऊपर रखे दीपक के बराबर था। मंदिर में सुगंधित खुशबू आती रहती है। वृंद्रावन तिवारी
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सैकड़ों की संख्या में मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं, जिनका रखरखाव नहीं हो रहा है। जिस कारण मूर्तियां धीरे-धीरे ग़ायब होतीं जा रही हैं। इसे देखरेख की जरूरत है, पुरातत्व विभाग को ध्यान देना चाहिए। प्रवीण कुमार
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जब से मंदिर विभाग के अधीनस्थ हुआ है, तब से यह ऐसा ही है। चहारदीवारी का जितना बजट आया था, उतना काम करा दिया गया है। जैसे ही और बजट मिलता है तो अधूरे काम को पूरा करा दिया जाएगा। रवि रस्तोगी अवर संरक्षण अभियंता भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण

मंदिर में स्थापित सूर्य भगवान- फोटो : LALITPUR

मूर्तियों सें नक्काशी सें बना हुआ है मंदिर- फोटो : LALITPUR

बिखरी पड़ी हैं मूर्तियां- फोटो : LALITPUR