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पुल डूबने से जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर रहे पांच गांव के ग्रामीण

Mon, 23 Aug 2021 01:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 01:00 AM IST
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bridge covered with water, villager cross river by boat
नाव में मोटर साईकिल रखकर पार करते गांव के लोग - फोटो : LALITPUR
ङोगरा खुर्द /ललितपुर। विकास खंड मड़ावरा के ग्राम पारौल एवं बरखेरा के पास से निकली जामनी नदी पर बना दशकों पुराना जीर्णशीर्ण पुल बारिश के चलते जामनी बांध के भराव क्षेत्र में पानी बढ़ने से डूब चुका है। इससे इस पुल के रास्ते से मध्य प्रदेश आने जाने वाले लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं और ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर नाव में ही दो पहिया वाहन रखकर नदी पार कर रहे हैं, ऐसे में यहां हादसों का डर बना हुआ है।
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नाराहट क्षेत्र में ग्राम बरखेरा के पास से निकली जामनी नदी पर काफी समय पहले बरखेरा के पास नदी पार करने के लिए काम चलाऊ रिपटा का निर्माण कराया गया था, जो देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हालत में है। बारिश के समय यह रिपटा बांध के भराव क्षेत्र का पानी बढ़ने से जलमग्न हो जाता है और नदी के रास्ते आवागमन ठप हो जाता है, जो लगभग आठ माह के लिए बंद रहता है। मजबूरी में यहां आसपास के लगभग पांच गांव के लोगों को अपनी जान जोखिम में डालते हुए मोटरसाइकिल चालक एवं राहगीर नाव के सहारे नदी पार करना पड़ रही है। इस समस्या के चलते क्षेत्रवासी वर्षों से जूझते चले आ रहे हैं। परेशान ग्रामीणों ने पूर्व में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को ज्ञापन भी दिया, लेकिन समस्या का निस्तारण नहीं होने पर पिछले विधानसभा के चुनाव में ग्राम पारौल व बरखेरा के लोगों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। उस समय क्षेत्रीय विधायक मनोहर लाल पंथ ने ग्रामीणों को पुल निर्माण का आश्वासन दिया था। जिसके बाद यहां नवीन ऊंचे फुट ओवर ब्रिज के निर्माण नौ करोड़ की राशि से बनाने को स्वीकृत तो हो गया, लेकिन एक वर्ष में इस ओवरब्रिज के लिए मात्र पिलर का काम भी पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश राज्यों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। यह पुल बन जाने से दर्जनों गावों के लोगों को काफी सुविधा होगी और इस रास्ते पर आवागमन बाधित नहीं होगा।
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रक्षाबंधन के पर्व पर बहनों को होती है आवागमन में परेशानी
भाई बहन के प्रेम के प्रतीक पर्व रक्षाबंधन पर अधिकांश बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने आती है, लेकिन इस त्योहार पर जामनी नदी में पानी का लेवल ज्यादा रहता है और तेज बहाव होता है, जिससे रिपटा जलमग्न हो जाता है। ऐसी स्थिति में ब्रहनों को नाव का सहारा लेकर नदी पार करनी पड़ती है, जो जोखिम भरा सफर होने के साथ काफी खर्चीला भी है। जो नाव में सफर नहीं करते उनके लिए तीस किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है।
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बरखेरा पुल बनने की बरसात से पहले उम्मीद थी लेकिन पुल का निर्माण कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है लोग बहुत परेशानी उठा रहे है। इस ओर शासन प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। -हरनारायण शर्मा।
आधा दर्जन गांव के लोगों की रिश्तेदारी मध्यप्रदेश में आती है लेकिन बरखेरा से जो सीधा रास्ता है वह पूरे आठ महीने तक बंद रहता है। इमरजेंसी में लोग अपनी जान जोखिम में डालकर भरी नदी में नाव में बैठकर पार करते हैं। -अर्जुन सिंह राजपूत।
आठ महीने नदी में पानी भरा रहने से आवागवन बंद रहता है, जिससे क्षेत्र को लोगों को कई किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। पुल बनने से दर्जनो गांव लोगों को निकलने में सुविधा मिलेगी।-महेंद्र सिंह

डोंगराखुर्द से दिदौनिया के लिए यह सीधा मार्ग है, लेकिन बरखेरा के पास जामनी नदी का जलभराव काफी गहरा रहता है और पानी पूरे आठ महीने तक रहने से लोग चार महीने ही निकल पाते है, यहां पुल का निर्माण होने से लोगों को सुविधा मिलेगी। -मुकेश तिवारी।

नदी के पुल के अधूरे पड़े पिलर के कार्य

नदी के पुल के अधूरे पड़े पिलर के कार्य- फोटो : LALITPUR

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