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ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव में भाजपा ने सपा को दी करारी शिकस्त
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ललितपुर। विधानसभा से पहले जिला पंचायत और अब ब्लॉक प्रमुख के पदों पर भाजपा ने सपा को करारी शिकस्त दी है। भाजपा के दिग्गजों के आगे सपा की गोपनीय रणनीत भी काम नहीं आई नतीजतन बृहस्पतिवार को निर्धारित समय तक प्रत्याशियों की घोषणा तो दूर सपाई किसी का नामांकन भी नहीं करा सके। शुक्रवार को बिरधा ब्लॉक से एक नाम वापस हो जाएगा क्योंकि यहां मां बेटे के परचे भरे गए हैं। इसके बाद पांच ब्लॉकों पर भाजपा का परचम फहरना तय हो जाएगा, जबकि तालबेहट में मतदान के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
भाजपा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को अगले वर्ष विधानसभा का प्री इलेक्शन मान कर लड़ा, लेकिन चुनाव परिणामों ने उसे आइना दिखा दिया। इस चुनाव में सदस्य पद पर सपा की बढ़त ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी। पार्टी नेतृत्व जिला पंचायतों और ब्लॉक प्रमुखों पर कब्जा जमाने के लिए रणनीत बनाई और उसमें कामयाब भी हो गए। भाजपा ने पहले जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट पर कब्जा जमाने के लिए सपा प्रत्याशी पर न सिर्फ दबाव बनाया बल्कि उसके सदस्यों को भी अपने पाले में खड़ा कर दिया। नतीजतन सपा प्रत्याशी नामांकन तक नहीं करा सकीं। इस सफलता और सपा नेताओं का कोई खास विरोध न होने पर भाजपा ने ब्लॉक प्रमुखों के पदों पर भी परचम फहराने की रणनीति बना ली, जो कि आज नामांकन में साफ देखने को मिली। सपा के तमाम दावों के बावजूद सपाई किसी ब्लॉक में अपना नामांकन कराने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। हैरत की बात तो यह है कि बुधवार को सपा प्रवक्ता ने गोपनीय रणनीति बनाकर आज नामांकन में प्रत्याशियों के शामिल होने का दावा किया था, लेकिन तीन बजे तक कोई सपाई दावेदार एआरओ कक्ष तक जाने का साहस तक न जुटा सका। ऐसे में चार ब्लॉकों में भाजपा प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचित होना तय हो गया है। जबकि, शुक्रवार को बिरधा में भाजपा प्रत्याशी की मां का नाम वापस होने के बाद यह ब्लॉक भी भाजपा के कब्जे में आ जाएगा।
सपा की गुटबंदी ने पंचायत चुनाव में पार्टी को धरातल पर ला दिया
छह बीडीसी सदस्य जीतने के बाद भी एक प्रमुख का नामांकन तक नहीं हुआ दाखिल
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर नामांकन दाखिल न होने पर जिलाध्यक्ष पर गिर चुकी है गाज
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में छह बीडीसी सदस्यों को जिताकर लाने वाली समाजवादी पार्टी आपसी गुटबंदी का शिकार हो गई। उसी का नतीजा रहा कि पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष पद को खोने के बाद ब्लॉक प्रमुख के पद के लिए किसी भी सीट पर एक नामांकन दाखिल तक नहीं करा सके।
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जिले में अरसे से समाजवादी पार्टी दो गुटों मेें बंटी आ रही है। पंचायत चुनाव में दोनों गुट आमने सामने आ गए हैं. बताया जाता है कि निवर्तमान जिलाध्यक्ष तिलक यादव और पूर्व सांसद प्रतिनिधि मौजूद रहे। राजेश यादव के बीच पहले से ही अंदर खाने से मतभेद रहते थे। पार्टी ने राजेश यादव की मां अतल देवी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी घोषित किया तो तिलक यादव को यह रास नहीं आया। वह खुलकर विरोध तो नहीं कर सके लेकिन प्रत्याशी के साथ भी खड़े नहीं हुए। इसी का नतीजा यह हुआ कि सपा प्रत्याशी अपना नामांकन नहीं करा सकीं। शिकायत पर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने जिलाध्यक्ष तिलक यादव को पद से हटा दिया। इसी का नतीजा रहा कि ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव में सपा कमजोर पड़ती गई और छह सीटो में किसी भी सीट पर पार्टी प्रत्याशी का नामांकन तक नहीं करा सकी।
छह में से पांच ब्लॉक में पार्टी के प्रत्याशी निर्विरोध जीत रहे हैं। एक ब्लॉक में संघर्ष की स्थिति है। यदि मतदान हुआ तो हम चुनाव जीतेंगे। हमारे पास पर्याप्त संख्या में क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं। तालबेहट में निर्दलीय प्रत्याशी ने भाजपा प्रत्याशी को धमकाया है।-राजकुमार जैन, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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इस चुनाव में लोकतंत्र की हत्या हुई है। बार में ब्लॉक अध्यक्ष जो टोड़ी के प्रधान हैं, उन्हें पुलिस ने बैठाए रखा। महरौनी में पार्टी प्रत्याशी के पति को हिरासत में लिया गया और प्रत्याशी को घर से नहीं निकलने दिया। इसकी आनलाइन शिकायत निर्वाचन आयोग से की गई है।-खुशाल साहू, प्रवक्ता, सपा
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भाजपा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को अगले वर्ष विधानसभा का प्री इलेक्शन मान कर लड़ा, लेकिन चुनाव परिणामों ने उसे आइना दिखा दिया। इस चुनाव में सदस्य पद पर सपा की बढ़त ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी। पार्टी नेतृत्व जिला पंचायतों और ब्लॉक प्रमुखों पर कब्जा जमाने के लिए रणनीत बनाई और उसमें कामयाब भी हो गए। भाजपा ने पहले जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट पर कब्जा जमाने के लिए सपा प्रत्याशी पर न सिर्फ दबाव बनाया बल्कि उसके सदस्यों को भी अपने पाले में खड़ा कर दिया। नतीजतन सपा प्रत्याशी नामांकन तक नहीं करा सकीं। इस सफलता और सपा नेताओं का कोई खास विरोध न होने पर भाजपा ने ब्लॉक प्रमुखों के पदों पर भी परचम फहराने की रणनीति बना ली, जो कि आज नामांकन में साफ देखने को मिली। सपा के तमाम दावों के बावजूद सपाई किसी ब्लॉक में अपना नामांकन कराने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। हैरत की बात तो यह है कि बुधवार को सपा प्रवक्ता ने गोपनीय रणनीति बनाकर आज नामांकन में प्रत्याशियों के शामिल होने का दावा किया था, लेकिन तीन बजे तक कोई सपाई दावेदार एआरओ कक्ष तक जाने का साहस तक न जुटा सका। ऐसे में चार ब्लॉकों में भाजपा प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचित होना तय हो गया है। जबकि, शुक्रवार को बिरधा में भाजपा प्रत्याशी की मां का नाम वापस होने के बाद यह ब्लॉक भी भाजपा के कब्जे में आ जाएगा।
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सपा की गुटबंदी ने पंचायत चुनाव में पार्टी को धरातल पर ला दिया
छह बीडीसी सदस्य जीतने के बाद भी एक प्रमुख का नामांकन तक नहीं हुआ दाखिल
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर नामांकन दाखिल न होने पर जिलाध्यक्ष पर गिर चुकी है गाज
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में छह बीडीसी सदस्यों को जिताकर लाने वाली समाजवादी पार्टी आपसी गुटबंदी का शिकार हो गई। उसी का नतीजा रहा कि पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष पद को खोने के बाद ब्लॉक प्रमुख के पद के लिए किसी भी सीट पर एक नामांकन दाखिल तक नहीं करा सके।
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जिले में अरसे से समाजवादी पार्टी दो गुटों मेें बंटी आ रही है। पंचायत चुनाव में दोनों गुट आमने सामने आ गए हैं. बताया जाता है कि निवर्तमान जिलाध्यक्ष तिलक यादव और पूर्व सांसद प्रतिनिधि मौजूद रहे। राजेश यादव के बीच पहले से ही अंदर खाने से मतभेद रहते थे। पार्टी ने राजेश यादव की मां अतल देवी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी घोषित किया तो तिलक यादव को यह रास नहीं आया। वह खुलकर विरोध तो नहीं कर सके लेकिन प्रत्याशी के साथ भी खड़े नहीं हुए। इसी का नतीजा यह हुआ कि सपा प्रत्याशी अपना नामांकन नहीं करा सकीं। शिकायत पर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने जिलाध्यक्ष तिलक यादव को पद से हटा दिया। इसी का नतीजा रहा कि ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव में सपा कमजोर पड़ती गई और छह सीटो में किसी भी सीट पर पार्टी प्रत्याशी का नामांकन तक नहीं करा सकी।
छह में से पांच ब्लॉक में पार्टी के प्रत्याशी निर्विरोध जीत रहे हैं। एक ब्लॉक में संघर्ष की स्थिति है। यदि मतदान हुआ तो हम चुनाव जीतेंगे। हमारे पास पर्याप्त संख्या में क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं। तालबेहट में निर्दलीय प्रत्याशी ने भाजपा प्रत्याशी को धमकाया है।-राजकुमार जैन, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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इस चुनाव में लोकतंत्र की हत्या हुई है। बार में ब्लॉक अध्यक्ष जो टोड़ी के प्रधान हैं, उन्हें पुलिस ने बैठाए रखा। महरौनी में पार्टी प्रत्याशी के पति को हिरासत में लिया गया और प्रत्याशी को घर से नहीं निकलने दिया। इसकी आनलाइन शिकायत निर्वाचन आयोग से की गई है।-खुशाल साहू, प्रवक्ता, सपा