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जिला अस्पताल में खुले में फैंका जा रहा बायोमेडीलक वेस्ट मटेरियल

Wed, 25 Sep 2019 01:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 25 Sep 2019 01:33 AM IST
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biomedical waste leaving in open
जिला अस्पताल में खुले में फेंका जा रहा मेडिकल कचरा - फोटो : LALITPUR
फोटो-07, 08
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जिला अस्पताल में खुले में फेंका जा रहा कचरा
फैल सकती हैं संक्रामक बीमारियां
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिला अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट मेटेरियल (कचरा) को खुले में फेंककर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। मरीजों को लगने वाली नीडिल और सिरिंज खुले में फेंकी जा रही हैं। ड्रिप के वेस्ट मेटेरियल और अन्य कचरा भी फेंका जा रहा है। इससे संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा है।
बायोमेडिलक वेस्ट मेटेरियल के खुले में फेंकने से आम लोग भी संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। प्रदूषण फैलने से आम लोग भी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं। शासन ने बायोमेडिकल वेस्ट से फैलने वाले प्रदूषण और बीमारियों को रोकने के लिए निस्तारण के लिए सभी चिकित्सा इकाइयों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में पंजीयन कराकर एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया है।
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प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में पंजीयन से चिकित्सा इकाई से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरा का उठान अनुबंधित इकाई द्वारा किया जाता है। कचरे के उठान तक इसको नियमानुसार सुरक्षित रखने का भी मानक है, जिसमें कचरे को अलग-अलग थैलों में रखकर बंद कमरे में रखा जाता है। लेकिन, जिला अस्पताल में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर खुले में बायोमेडिकल वेस्ट मेटेरियल डालकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अस्पताल से निकलने वाली नीडिल और इंजेक्शन को खुले में फेंका जा रहा है। ड्रिप के साथ ही लगने वाली अन्य चिकित्सा सामग्री को भी ऐसे ही फेंक दिया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में स्थित ट्रॉमा सेंटर के पीछे मेडिकल के वेस्ट मेटेरियल को खुले में फेंक दिया जा रहा है। यहां पर नीडिल और ड्रिप के साथ ही अन्य सामान पड़ा है। मरीजों की दूषित पट्टियां भी फेंकी जा रही हैं। कांच की सीसी वाले इंजेक्शन पड़े हैं, जो मरीजों के उपयोग के बाद डाल दिए गए हैं। ऐसे में यहां गुजरने वाले लोग बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। सुई भी पांव या अन्य अंग में लगने से बीमारियों की चपेट में आने का भय बना रहता ल्है।

प्रसवोत्तर केंद्र से भी मेडिकल कचरे को खुले में डाला जा रहा है। ऐसे में मरीजों के साथ ही अन्य लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। जबकि, स्वास्थ्य विभाग को बायोमेडिकल वेस्ट मेटेरियल के निस्तारण कराने का पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। जिले में जब जिम्मेदारों की यह स्थिति है तो निजी क्षेत्रों के अस्पतालों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जिला महिला अस्पताल का बायोमेडिकल वेस्ट मेटेरियल भी खुले में डाला जा रहा है। यहां पर प्रसव के दौरान उपयोग में लाए जाने वाली पट्टी व वस्त्रों को फेंका जा रहा है। इससे बीमारियां फैलने का भय बना रहता है। कचरा से बरसात होने के कारण दुर्गंध भी फैल रही है।
यह है कचरा रखने का नियम
पीला बैग - मरीजों का कचरा, संक्रमित कचरा, लैब के मेटेरियल व ड्रेसिंग की पट्टी।
लाल बैग - संक्रमित प्लास्टिक, कैथेटर, कैनुला, सुई, ट्यूब, बोतल
नीला बैग - कांच का सामान, ट्रेट इंजेक्शन, एक्युल स्लाइड, कांच की सीरिंज, निडिल, ब्लेड, धातु के धारदार एवं नुकीला सामान।
काला बैग - पेशाब, बलगम, मवाद, संक्रमित द्रव्य, संक्रमित कपड़े, ओटी के वस्त्र, लेबर रुम के वस्त्र।
ट्रामा सेंटर के पास व प्रसवोत्तर केंद्र के बगल में बायोमेडीकल कचरा खुले में फेंकने का मामला संज्ञान में आया है। इसको दिखवा कर शीघ्र ही हटवाया जाएगा।
- डा. एसके वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष
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