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विद्यालय बने प्रबंधक का आवास

Tue, 23 Aug 2016 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 23 Aug 2016 12:52 AM IST
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 Became manager of school accommodation
school, lalitpur news - फोटो : demo
ललितपुर। जिले में बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त कई निजी मान्यता प्राप्त विद्यालय विभाग के नियमों को धता बताकर संचालित हो रहे हैं। किसी के भवन में खेल का मैदान नहीं है तो किसी के पास उचित प्रकाश व छात्राें के लिए बैठक व्यवस्था नहीं है। कई प्रबंधक तो विद्यालय भवन में ही निवास बना कर रह रहे हैं। वहीं, जिम्मेदार अफसर सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं।
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उल्लेखनीय है कि प्राइमरी से लेकर जूनियर स्तर तक की शिक्षा को आसान बनाने के उद्देश्य से निजी स्कूलों को मान्यता प्रदान की जा रही है। जिले में बेसिक शिक्षा परिषद ने हिंदी माध्यम से 270 प्राथमिक, 139 जूनियर विद्यालय एवं अंग्रेजी माध्यम के 48 स्कूलों को मान्यता दे रखी है। इस तरह जिले में कुल 457 विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। वहीं, नगर में अंग्रेजी माध्यम के 15, हिंदी माध्यम के 52 जूनियर एवं 81 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से कई विद्यालय बेसिक शिक्षा परिषद के नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। तमाम विद्यालयों में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है तो कई भवनों में दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप नहीं हैं।
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वहीं, कई भवनों में आकस्मिक निकासी की व्यवस्था नहीं है। कई स्कूलों में फर्नीचर के अभाव में बच्चों को फर्श पर बैठना पड़ रहा है। कई स्कूलों में बिजली गुल हो जाने पर जनरेटर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। कई स्कूलों में योग्य शिक्षकों की कमी है। कई प्रबंधकों ने तो स्कूल भवन में निवास ही बना लिया है तो कई भवन को शादी घर के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि विभाग ने ऐसी कोई मान्यता प्रदान नहीं की है। कई स्कूल तो खपरैल या टीनशेड में चल रहे हैं। वहीं विभागीय अफसर इन स्थितियों को जानकर भी अनजान बने हुए हैं।
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यह होने चाहिए सुरक्षा के इंतजाम
विद्यालय के छात्रों, अध्यापकों को समय-समय पर अग्नि से बचाव का प्रशिक्षण देने, भवन में उपयुक्त स्थानों पर प्राथमिक चिकित्सा बाक्स, अग्निशमन यंत्र, भवन की सीढ़ियां छत पर खुली होनी चाहिए। भवन में कोई भी ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखा जाना चाहिए। रैंप की चौड़ाई न्यूनतम 1500 मीटर, कक्ष में न्यूनतम दो दरवाजे होने चाहिए।


मनमाने प्रकाशन की चल रही किताबें
निजी स्कूलों ने शिक्षा को व्यापार का रूप दे दिया है। हर प्रबंधक अपने मनमाफिक प्रकाशनों के पाठ्यक्रमों को चला रहे हैं। कमोवेश यही स्थिति यूनिफार्म का है। स्कूलों ने कॉपी, किताबों से लेकर यूनिफार्म के लिए दुकान फिक्स कर दी है। जिससे अभिभावकों को बाजार भाव से ज्यादा में खरीदारी करनी पड़ रही है।

मान्यता संबंधी नियमों का पालन कराया जाएगा। यदि किसी ने स्कूल भवन में आवास बना लिए हैं तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
आभा अग्रवाल 
खंड शिक्षा अधिकारी
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