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बांस का सामान बनाने वाले कारीगरों की रोजीरोटी पर संकट
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कैप्सन - बिक्री के लिए रखा बांस का बना सामान
- फोटो : TALDEHATE
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कड़ेसराकलां / तालबेहट। पीढ़ियों से बांस की डलियां, सूपा, हाथ का पंखा बनाकर गुजर- बसर कर रहे लोगों को क्या पता था कि कोराना महामारी में उनका कारोबार पूरी तरह से ठप हो जाएगा। हालात ऐसे बनेंगे कि दो वक्त की रोटी के लिए भी लाले पड़ जाएंगे। अक्षय तृतीया पर होने वाली शादियों में हजारों की संख्या में बांस की डलियां और सूपा बिकते थे, लेकिन इस बार सन्नाटा है।
ग्राम कड़ेसराकलां, तालबेहट, बुदाबनी, झॉवर, बम्होरीसर में काफी संख्या में वंशकार समाज के लोग रहते हैं, जिनका मुख्य व्यवसाय मजदूरी करना है। यह अपने हाथ के हुनर से बांस की डलिया, सूपा, हाथ का पंखा, शादी में प्रयोग होने वाले टिपारे एवं बच्चों के खिलौने बनाते हैं। इन परिवारों की रोजी- रोटी इसी सामान की बिक्री से चलती है। यह लोग साल भर सामान घर पर तैयार करते हैं और उसे समीपवर्ती बबीना, झांसी, दतिया, ललितपुर, तालबेहट आदि स्थानों पर लगने वाली हाटों में या फेरी लगाकर गांव- गांव में बेच देते हैं।
कोराना वायरस की रोकथाम के लिए चल रहे लॉकडाउन में आवागमन के साधन बंद होने के कारण यह लोग बांस से तैयार किया गया अपना सामान बेचने के लिए न तो बाहर ले जा रहे हैं और न ही सामान खरीदने गांव में कोई आ रहा है। इससे इनके परिवार की रोजी- रोटी पर संकट गहराने लगा है।
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शादियों का समय आ रहा था। यही सोचकर हमने काफी मात्रा में टिपारे, डलियां बनाई थीं। पर, लॉकडाउन के चलते शादियां न होने से सामान नहीं बिक पा रहा है। इससे काफी नुकसान हो रहा है। वहीं, पूंजी नहीं होने से लड़कियों की शादियां भी टालना पड़ रहीं हैं।
- श्रीमती सूरज वंशकार
बांस से सामान बनाना हम लोगों का पुश्तैनी काम है। इसके अलावा हमारे पास जीवोकोपार्जन का कोई और दूसरा साधन नहीं है। लॉकडाउन में इस सामान का निर्माण कर लिया है, परंतु खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इससे बड़ी बिकट समस्या खड़ी हो गई है।
- किशना वंशकार
हर वर्ष शादियों की बढ़ती संख्या को देखकर इस बार हमने अधिक मुनाफे के लिए काफी मात्रा में कच्चा हरा बांस खरीदकर डलिया, सूपा, हाथ का पंखा आदि बनाकर रखे थे, पर, कोरोना के फेर में हाट, बाजार बंद होने से हमारी संपूर्ण पूंजी फंस गई है। हम पर अब साहूकारों क कर्ज बढ़ता जा रहा है।
- राजाराम वंशकार
संक्रमण के फेर में सामान तक नहीं छू रहे लोग
तालबेहट। वंशकार समाज के कुछ लोगों ने बताया कि लॉकडाउन के कुछ दिन बाद जब प्रशासन की रोक को नजर अंदाज करते हुए वह आसपास के गांवों में अपना सामान बेचने गए तो वहां लोगों ने सामान खरीदना तो दूर उसे हाथ में लेना तक उचित नहीं समझा। यदि किसी ने सामान खरीदना भी चाहा तो उसकी कीमत लागत मूल्य से काफी कम बताई। इस कीमत पर बेचने में घाटे के अलावा कुछ और नहीं नजर आया।
अक्षय तृतीया पर बिकते थे सूपा और टिपारे
तालबेहट। अक्षय तृतीया पर पूरे क्षेत्र में सामूहिक विवाह कार्यक्रम के अलावा शादियों का शुभ होने से सूपा और टिपारे की डलिया की मांग बढ़ जाती थी। हर बार की तरह यह लोग काफी सामान बनाकर रख लेते थे, परंतु इस बार सामान की बिक्री नहीं हो रही है।
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ग्राम कड़ेसराकलां, तालबेहट, बुदाबनी, झॉवर, बम्होरीसर में काफी संख्या में वंशकार समाज के लोग रहते हैं, जिनका मुख्य व्यवसाय मजदूरी करना है। यह अपने हाथ के हुनर से बांस की डलिया, सूपा, हाथ का पंखा, शादी में प्रयोग होने वाले टिपारे एवं बच्चों के खिलौने बनाते हैं। इन परिवारों की रोजी- रोटी इसी सामान की बिक्री से चलती है। यह लोग साल भर सामान घर पर तैयार करते हैं और उसे समीपवर्ती बबीना, झांसी, दतिया, ललितपुर, तालबेहट आदि स्थानों पर लगने वाली हाटों में या फेरी लगाकर गांव- गांव में बेच देते हैं।
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कोराना वायरस की रोकथाम के लिए चल रहे लॉकडाउन में आवागमन के साधन बंद होने के कारण यह लोग बांस से तैयार किया गया अपना सामान बेचने के लिए न तो बाहर ले जा रहे हैं और न ही सामान खरीदने गांव में कोई आ रहा है। इससे इनके परिवार की रोजी- रोटी पर संकट गहराने लगा है।
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शादियों का समय आ रहा था। यही सोचकर हमने काफी मात्रा में टिपारे, डलियां बनाई थीं। पर, लॉकडाउन के चलते शादियां न होने से सामान नहीं बिक पा रहा है। इससे काफी नुकसान हो रहा है। वहीं, पूंजी नहीं होने से लड़कियों की शादियां भी टालना पड़ रहीं हैं।
- श्रीमती सूरज वंशकार
बांस से सामान बनाना हम लोगों का पुश्तैनी काम है। इसके अलावा हमारे पास जीवोकोपार्जन का कोई और दूसरा साधन नहीं है। लॉकडाउन में इस सामान का निर्माण कर लिया है, परंतु खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इससे बड़ी बिकट समस्या खड़ी हो गई है।
- किशना वंशकार
हर वर्ष शादियों की बढ़ती संख्या को देखकर इस बार हमने अधिक मुनाफे के लिए काफी मात्रा में कच्चा हरा बांस खरीदकर डलिया, सूपा, हाथ का पंखा आदि बनाकर रखे थे, पर, कोरोना के फेर में हाट, बाजार बंद होने से हमारी संपूर्ण पूंजी फंस गई है। हम पर अब साहूकारों क कर्ज बढ़ता जा रहा है।
- राजाराम वंशकार
संक्रमण के फेर में सामान तक नहीं छू रहे लोग
तालबेहट। वंशकार समाज के कुछ लोगों ने बताया कि लॉकडाउन के कुछ दिन बाद जब प्रशासन की रोक को नजर अंदाज करते हुए वह आसपास के गांवों में अपना सामान बेचने गए तो वहां लोगों ने सामान खरीदना तो दूर उसे हाथ में लेना तक उचित नहीं समझा। यदि किसी ने सामान खरीदना भी चाहा तो उसकी कीमत लागत मूल्य से काफी कम बताई। इस कीमत पर बेचने में घाटे के अलावा कुछ और नहीं नजर आया।
अक्षय तृतीया पर बिकते थे सूपा और टिपारे
तालबेहट। अक्षय तृतीया पर पूरे क्षेत्र में सामूहिक विवाह कार्यक्रम के अलावा शादियों का शुभ होने से सूपा और टिपारे की डलिया की मांग बढ़ जाती थी। हर बार की तरह यह लोग काफी सामान बनाकर रख लेते थे, परंतु इस बार सामान की बिक्री नहीं हो रही है।
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बांस के सामान का निर्माण करते हुनरमंद- फोटो : TALDEHATE